UKG की 1 साल की फीस 4 लाख, IIT की 4 साल की फीस 2 लाख, आईआईटी पासआउट की पोस्ट पर छिड़ी तीखी बहस
प्ले स्कूलों की मोटी फीस ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर तीखी बहस छेड़ दी है। आईआईटी बॉम्बे से पासआउट एक स्टूडेंट ने अपनी चार साल की इंजीनियरिंग की फीस को मुंबई के एक प्ले स्कूल की सालाना फीस से आधा बताया है।

प्ले स्कूलों की मोटी फीस ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर तीखी बहस छेड़ दी है। आईआईटी बॉम्बे से पासआउट एक स्टूडेंट ने अपनी चार साल की इंजीनियरिंग की फीस को मुंबई के एक प्ले स्कूल की सालाना फीस से आधा बताया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में अविरल भटनागर ने कहा कि मुंबई में उनके कजिन की बेटी की यूकेजी क्लास की फीस हर साल 4 लाख से ज्यादा हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि आईआईटी बॉम्बे में बीटेक के दौरान चार साल की उनकी फीस इससे आधी थी।'
भटनागर ने अपनी पोस्ट में कहा, 'कजिन ने मुझे बताया कि उनकी बेटी की यूकेजी की फीस मुंबई में हर साल 4 लाख से ज्यादा हो रही है। आईआईटी बॉम्बे में मेरी फीस पूरे चार साल की फीस से आधी थी। पढ़ाई का बढ़ता खर्च एक छिपी हुई महंगाई की ओर इशारा करता है जिसके बारे में कोई बात नहीं कर रहा है। शायद एआई (AI) ट्यूटर इसे फिर से सस्ता बना देंगे।'
यूकेजी की एक साल की फीस की तुलना आईआईटी बॉम्बे की चार साल की फीस से किए जाने के बाद इंटरनेट पर कड़ी प्रतिक्रियाएं आईं। सोशल मीडिया यूजर्स इस मुद्दे पर बंटे नजर आए। एक यूजर ने तर्क दिया कि आसमान छूती स्कूल फीस महंगाई से ज्यादा लाइफस्टाइल चॉइस की वजह से है। उन्होंने लिखा, 'यह महंगी शिक्षा महंगाई से नहीं बल्कि लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन से जुड़ी है। आपका कजिन पहले से ही अमीर है, वह अपने बच्चे को एक टॉप नर्सरी स्कूल में भेजना चाहता है। एक बार जब हमारे पास पैसे आ जाते हैं, तो हम सस्ते से समझौता नहीं करते।' यूजर ने इसे इनकम बढ़ने पर रोज़मर्रा की सुख-सुविधाओं पर ज्यादा खर्च करने जैसा बताया गया।
सरकारी की हालत खस्ता, इसलिए प्राइवेट को बढ़ावा
एक अन्य यूजर ने लिखा, 'एजुकेशन, शादी और मेडिकल केयर भारत में सबसे ज्यादा मुनाफा देने वाले बिजनेस हैं। सरकारी स्कूल और हॉस्पिटल सबसे खराब हालत में हैं, जिससे प्राइवेट स्कूल और हॉस्पिटल को बढ़ावा मिलता है। भारत सिर्फ अमीर लोगों के लिए है।'
कुछ लोगों ने अपने पर्सनल एक्सपीरियंस भी शेयर किए। एक यूजर ने लिखा, ‘अभी अपनी चार साल की बेटी का एडमिशन नोएडा के एक अच्छे स्कूल में करवाया है, जिसकी फीस लगभग 75 लाख रुपये सालाना है। मैंने अपनी पूरी इंजीनियरिंग 2 लाख रुपये में की है।’
कुछ ने बताया स्टेट का मामला
हर कोई इस बात से सहमत नहीं था कि यह महंगाई का मामला है। एक और यूज़र ने कमेंट किया, 'इसका महंगाई से कोई लेना-देना नहीं है, बल्कि स्टेटस से है। लोगों को उनके मजे करने दो। आपको अपने बच्चे को ऐसे स्कूल में भेजने की जरूरत नहीं है, जिसकी फीस 4 लाख सालाना हो।'
एआई और होमस्कूलिंग पर हो जोर
इस समस्या के समाधान के रूप में कुछ लोगों ने भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और होमस्कूलिंग जैसे विकल्पों पर विचार करने का सुझाव दिया है। एक ने लिखा, 'होमस्कूलिंग को बढ़िया बनाने का समय आ गया है।' दूसरे ने कहा, 'मौजूदा जॉब मार्केट को देखते हुए, एजुकेशन पर सच में एआई का कब्जा हो जाना चाहिए। नहीं तो अगर कुछ नहीं तो, रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (ROI) का कॉन्सेप्ट ही खत्म हो जाएगा।'
कुछ लोगों ने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा एक मौलिक अधिकार है। एक ने कहा, 'शिक्षा पाना एक मौलिक अधिकार है। इसका मतलब है कि इसे पैसे कमाने का जरिया नहीं होना चाहिए। फिर भी स्कूल खुलेआम ऐसा कर रहे हैं।'




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