How JEE Advanced iit Roorkee Students mobile number photo details Leaked What is Cloud Storage Configuration IIT : कैसे लीक हो गई JEE Advanced के 1.87 लाख छात्रों की डिटेल्स, क्या है क्लाउड स्टोरेज कॉन्फिगरेशन, Career Hindi News - Hindustan
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IIT : कैसे लीक हो गई JEE Advanced के 1.87 लाख छात्रों की डिटेल्स, क्या है क्लाउड स्टोरेज कॉन्फिगरेशन

JEE Advanced : दून विवि के कंप्यूटर साइंस विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. महीप के अनुसार ऐसी समस्याएं अक्सर तब होती हैं, जब क्लाउड स्टोरेज की सुरक्षा सेटिंग्स सही ढंग से लागू नहीं की जातीं।

Thu, 4 June 2026 06:52 AMPankaj Vijay लाइव हिन्दुस्तान, दीपक मिश्रा, रुड़की
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IIT : कैसे लीक हो गई JEE Advanced के 1.87 लाख छात्रों की डिटेल्स, क्या है क्लाउड स्टोरेज कॉन्फिगरेशन

आईआईटी रुड़की ने माना कि जेईई एडवांस्ड 2026 के परिणाम पोर्टल में 'क्लाउड स्टोरेज कॉन्फिगरेशन' से जुड़ी एक तकनीकी समस्या थी, इससे हजारों छात्रों का डाटा सार्वजनिक हो गया। संस्थान ने यह पुष्टि साइबर सुरक्षा शोधकर्ता बताने वाले एक नाबालिग के दावे के बाद की है। दरअसल, 16 वर्षीय रिनिल अनिल ने 'एक्स' पर दावा किया था कि जेईई एडवांस्ड 2026 के अभ्यर्थी/परिणाम व्यवस्था में पब्लिक क्लाउड स्टोरेज कॉन्फिगरेशन संबंधी गड़बड़ी थी, जिससे बिना किसी प्रमाणीकरण के बड़ी मात्रा में अभ्यर्थियों का डाटा सार्वजनिक हो गया। इससे लगभग 1,79,600 परिणाम रिकॉर्ड और लगभग 1,87,300 एडमिट कार्ड पीडीएफ सार्वजनिक हुए, जिनमें अभ्यर्थियों के नाम, जन्म तिथि और मोबाइल नंबर शामिल थे।

जेईई एडवांस्ड के छात्रों के डाटा के दुरुपयोग की आशंका

जेईई (एडवांस्ड) 2026 के परिणाम पोर्टल में सामने आई तकनीकी खामी के पीछे साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ इंटरनेट एक्सेस मैनेजमेंट यानी आईएएम का सही से पालन ना होना सबसे बड़ी वजह मान रहे हैं। इसके अलावा फाइल को प्राइवेट की जगह पब्लिक एक्सेस देना भी एक वजह हो सकती है। विशेषज्ञों ने इस लीक डेटा के बड़े दुरुपयोग की भी आशंका जताई है। हालांकि डेटा के आईआईटी के अंदर के साथ ही बाहर से भी लीक हो सकने की संभावना से भी इंकार नहीं किया।

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दून विवि के कंप्यूटर साइंस विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. महीप के अनुसार ऐसी समस्याएं अक्सर तब होती हैं, जब क्लाउड स्टोरेज की सुरक्षा सेटिंग्स सही ढंग से लागू नहीं की जातीं। यानी सुरक्षा के लिए कमजोर पासवर्ड किसी फाइल में लगाया जाता है। या किसी फोल्डर को गलती से प्राइवेट की जगह पब्लिक एक्सेस दे दिया जाता है। जिस कारण कोई भी इसे आसानी से क्लाउड से डाउनलोड कर सकता है। इसी का फायदा उठाकर हैकर्स ने डेटा लीक किया होगा। उनका कहना है कि अगर लीक डेटा एडिटेबल हुआ यानी एडिट करने का उसमें विकल्प रहा होगा तो उसमें छेड़छाड़ हो सकती है। खासकर अगर परीक्षा के नंबर वाला डेटा लीक हुआ होगा तो उसमें नंबरों से छेड़छाड़ भी हो सकती है। उनका ये भी कहना है कि तरह की चूक से छात्रों की निजी जानकारी अनधिकृत लोगों तक पहुंच सकती है।

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क्या है क्लाउड स्टोरेज कॉन्फिगरेशन

आईआईटी के विशेषज्ञ ने बताया कि क्लाउड स्टोरेज से डेटा को ऑनलाइन सुरक्षित रखा जा सकता है। इससे आवश्यक फाइलों तक आसानी से पहुंच बनाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि इसे सही कॉन्फिगरेशन और नियमित सुरक्षा अपडेट के माध्यम से डेटा चोरी और साइबर हमलों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

एक प्रोफेसर ने भी उठाए थे डेटा सुरक्षा पर सवाल

आईआईटी रुड़की में पूर्व में सामने आए डेटा लीक प्रकरण के दौरान एक प्रोफेसर ने भी संस्थान की साइबर सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए थे। नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर उन्होंने कहा था कि वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी केवल नामांकन संख्या के जरिए प्राप्त की जा सकती थी। आशंका है कि डेटा या तो लीक हुआ या फिर अनुभाग से बाहर पहुंचा। प्रोफेसर ने इसे साइबर सुरक्षा और गोपनीयता के उल्लंघन का मामला बताया था।

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छात्रों की निजी जानकारी हुई थी सार्वजनिक

आईआईटी रुड़की में इससे पहले डेटा लीक मामले में छात्रों और उनके अभिभावकों की जानकारी सार्वजनिक होने का दावा किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, अकादमिक मामलों से जुड़े रिकॉर्ड इंटरनेट पर उपलब्ध हो गए थे। लीक डाटाबेस में छात्रों और उनके अभिभावकों के मोबाइल नंबर, ईमेल पते, जाति, आर्थिक स्थिति तथा प्रवेश आदि जानकारियां शामिल थीं। बताया गया था कि केवल नामांकन संख्या दर्ज कर किसी छात्र की जानकारी देखी जा सकती थी।

पहले भी सामने आ चुका सुरक्षा में चूक का मामला

जेईई एडवांस्ड 2026 के परिणाम पोर्टल से अभ्यर्थियों का डाटा सार्वजनिक होने की घटना के बाद आईआईटी रुड़की की डाटा सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है। इससे पहले भी पिछले साल अगस्त में संस्थान से जुड़े डाटा सुरक्षा के लीक होने का मामला सामने आ चुका है। आईआईटी रुड़की के छात्रों के डाटा लीक हो चुका है।

इस मामले में हिन्दुस्तान समाचार-पत्र ने खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी। इसके बाद आईआईटी रुड़की ओर से जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था। उस समय अधिकारियों ने सुरक्षा तंत्र को और मजबूत बनाने तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही थी। हालांकि हालिया घटना के सामने आने के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि सुरक्षा व्यवस्थाओं में अपेक्षित सुधार आखिर कितना हो पाया। सोलह वर्षीय रिनिल अनिल ने जेईई (एडवांस्ड) 2026 के परिणाम पोर्टल में क्लाउड स्टोरेज कॉन्फिगरेशन से जुड़ी खामी का दावा किया। इसके बाद आईआईटी रुड़की ने भी तकनीकी समस्या की पुष्टि कर बताया कि क्लाउड स्टोरेज डिवाइस की कॉन्फिगरेशन में दिक्कत थी।

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