China Gaokao Exam 2026: 1.3 Crore Students Sit for World Toughest Exam Amid India NEET paper leak Row Gaokao Exam: चीन के 1.3 करोड़ छात्रों ने दी 'गाओकाओ' परीक्षा, जेल में छपते हैं पेपर...सेना करती है निगरानी, Career Hindi News - Hindustan
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Gaokao Exam: चीन के 1.3 करोड़ छात्रों ने दी 'गाओकाओ' परीक्षा, जेल में छपते हैं पेपर...सेना करती है निगरानी

China Gaokao Exam 2026: चीन ने 1.3 करोड़ छात्रों के लिए दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षा 'गाओकाओ' का सफल आयोजन किया। भारत में NEET विवाद के बीच चीनी दूतावास ने इशारों-इशारों में भारत के एग्जाम सिस्टम पर चुटकी ली है।

Thu, 11 June 2026 04:39 PMPrachi लाइव हिन्दुस्तान
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Gaokao Exam: चीन के 1.3 करोड़ छात्रों ने दी 'गाओकाओ' परीक्षा, जेल में छपते हैं पेपर...सेना करती है निगरानी

Gaokao Exam 2026: जब भविष्य संवारने और देश की सबसे बड़ी परीक्षा की बात आती है, तो चीन का मैनेजमेंट पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल पेश करता है। भारत में जहां इन दिनों मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) के पेपर लीक और गड़बड़ियों को लेकर भारी बवाल मचा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ पड़ोसी देश चीन ने दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक 'गाओकाओ' (Gaokao) का बेहद शांतिपूर्ण और सफल आयोजन कर दिखाया है।चीनी शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस साल इस ऐतिहासिक परीक्षा के लिए देश भर से लगभग 1.3 करोड़ छात्र-छात्राओं ने रजिस्ट्रेशन कराया था।

जब परीक्षा के लिए रुक जाती हैं फैक्ट्रियां और थम जाता है ट्रैफिक

'गाओकाओ' चीन की राष्ट्रीय कॉलेज प्रवेश परीक्षा है, जो भारत के JEE और NEET दोनों परीक्षाओं के मेल के बराबर मानी जाती है। भारत स्थित चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर इस परीक्षा की सफलता का जिक्र करते हुए लिखा कि महज दो दिनों के भीतर 1.3 करोड़ छात्रों के लिए इस परीक्षा को बिना किसी रुकावट के पूरा कर लिया गया। इस पोस्ट के जरिए चीनी दूतावास इशारों-इशारों में भारत के एग्जाम सिस्टम पर चुटकी ली है।

इस परीक्षा की महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि छात्रों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने में कोई दिक्कत न हो, इसके लिए चीनी प्रशासन ने कड़े कदम उठाए। परीक्षा केंद्रों के आसपास की फैक्ट्रियों के काम को रोक दिया गया ताकि शोर न हो, सड़कों पर ट्रैफिक को पूरी तरह शांत कर दिया गया और पूरे देश की मशीनरी इन छात्रों की मदद के लिए एक साथ खड़ी हो गई। परीक्षा केंद्रों पर एआई (AI) आधारित एंटी-चीटिंग सिस्टम, मेडिकल इमरजेंसी और विशेष पुलिस बल तैनात किए गए थे ताकि निष्पक्षता बनी रहे।

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गाओकाओ का महत्व: भविष्य का फैसला

चीन में 'गाओकाओ' परीक्षा को छात्रों के जीवन की सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा माना जाता है, जो 1952 से शुरू हुई थी। इसका प्रदर्शन तय करता है कि छात्र को कौन सी यूनिवर्सिटी मिलेगी। करीब 1.3 करोड़ छात्र हर साल इस परीक्षा में बैठते हैं। यह परीक्षा दो दिनों तक चलती है और इसमें चीनी भाषा, गणित और अंग्रेजी जैसे विषय अनिवार्य होते हैं। इस परीक्षा में मिले अंकों के आधार पर ही तय होता है कि छात्र को देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में दाखिला मिलेगा या नहीं।

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सेना की निगरानी और गोपनीय प्रिंटिंग

गाओकाओ परीक्षा से कई महीने पहले, विशेषज्ञों और शिक्षकों की एक टीम को एक गुप्त स्थान पर ले जाया जाता है। इस स्थान का बाहरी दुनिया से कोई संपर्क नहीं होता। यहां तक कि उनके मोबाइल फोन भी ले लिए जाते हैं।

सबसे खास बात यह है कि प्रश्नपत्रों की छपाई जेल की उन प्रिंटिंग प्रेस में की जाती है, जहां कड़ी सुरक्षा होती है। प्रिंटिंग के दौरान वहां मौजूद कर्मचारियों को भी परीक्षा खत्म होने तक बाहर जाने की अनुमति नहीं होती। प्रश्नपत्रों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने के लिए जीपीएस (GPS) लगे ट्रकों और सशस्त्र पुलिस बलों का उपयोग किया जाता है।

ड्रोन से परीक्षा सेंटर्स की निगरानी-

गाओकाओ एग्जाम की प्रशासन द्वारा कड़ी निगरानी की जाती है। परीक्षा सेंटर्स की निगरानी ड्रोन से की जाती है। प्रश्नपत्रों को परीक्षा सेंटर्स पर पहुंचाने के लिए जीपीएस ट्रेकिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है।

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पेपर लीक पर मौत की सजा तक का प्रावधान

चीन में नियमों का उल्लंघन करना बहुत महंगा पड़ता है। यदि कोई छात्र नकल करते हुए पकड़ा जाता है, तो उसे अगले तीन साल तक किसी भी राष्ट्रीय परीक्षा में बैठने से प्रतिबंधित कर दिया जाता है। लेकिन अगर कोई व्यक्ति पेपर लीक करने या परीक्षा में संगठित धोखाधड़ी करने का दोषी पाया जाता है, तो उसे 7 साल से लेकर उम्रकैद और कुछ दुर्लभ मामलों में मौत की सजा तक दी जा सकती है। यह सख्त कानून लोगों के मन में डर पैदा करता है।

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