CBSE ने टेंडर देने से ठीक पहले हटा दी थी 'ब्लैकलिस्टिंग' की शर्त, डॉक्यूमेंट से हुआ बड़ा खुलासा?
CBSE OSM Row: सीबीएसई ने 'कोएम्प्ट एजुटेक' (Coempt EduTeck) को करोड़ों रुपये का टेंडर देने से ठीक पहले टेंडर नियमों से ‘ब्लैकलिस्टिंग’ की सबसे महत्वपूर्ण शर्त को ही गायब कर दिया था।

CBSE: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) का 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (OSM) यानी डिजिटल मूल्यांकन सिस्टम इस समय देश के सबसे बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद के केंद्र में आ गया है। कक्षा 10वीं और 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं की डिजिटल चेकिंग में सामने आई गंभीर लापरवाहियों के बीच अब एक और बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। सीबीएसई ने हैदराबाद की कंपनी 'कोएम्प्ट एजुटेक' (Coempt EduTeck) को करोड़ों रुपये का टेंडर देने से ठीक पहले अपने ही नियमों की किताब बदल डाली थी। बोर्ड ने अंतिम समय में टेंडर नियमों से ‘ब्लैकलिस्टिंग’ की सबसे महत्वपूर्ण शर्त को ही गायब कर दिया था।
17 साल के छात्र ने खोली पोल: कैसे बदले गए टेंडर के नियम?
सीबीएसई के इस कथित 'टेंडर घोटाले' का पर्दाफाश किसी बड़ी जांच एजेंसी ने नहीं, बल्कि झारखंड के रहने वाले 17 वर्षीय छात्र सार्थक सिद्धांत ने किया है। सार्थक ने सीबीएसई के विभिन्न चरणों के टेंडर डॉक्यूमेंट का बारीकी से अध्ययन कर एक ब्लॉग लिखा, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
सार्थक के विश्लेषण के अनुसार, अगस्त 2025 में जारी ओरिजनल टेंडर डॉक्यूमेंट में साफ लिखा था कि यदि कोई कंपनी डिजिटल मूल्यांकन (OSM) में गंभीर गलतियां या डेटा लीक करती है, तो एक विशेष समिति के फैसले के बाद उसे ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है और उसका कॉन्ट्रैक्ट रद्द किया जा सकता है। लेकिन 20 सितंबर 2025 को एक संशोधित पत्र जारी कर बोर्ड ने चुपके से 'ब्लैकलिस्टिंग' शब्द को हटा दिया। इसके बाद दिसंबर 2025 में यह बड़ा कॉन्ट्रैक्ट 'कोएम्प्ट एजुटेक' को सौंप दिया गया।
क्यों है यह छात्रों के लिए चिंता का विषय?
इस नियम परिवर्तन का असर हाल ही में आए बोर्ड रिजल्ट्स के मूल्यांकन पर साफ दिख रहा है। एथिकल हैकर्स ने दावा किया है कि इस वेंडर कंपनी के सर्वर के खराब कॉन्फिगरेशन के कारण देश भर के लाखों छात्रों की आंसर शीट्स और गोपनीय डेटा इंटरनेट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हो गए थे।
नियमों में बदलाव के कारण, इतनी बड़ी सुरक्षा चूक और कॉपियों के मूल्यांकन में गड़बड़ी के बावजूद, सीबीएसई कानूनी रूप से इस कंपनी को ब्लैकलिस्ट नहीं कर सकती। बोर्ड अब केवल जुर्माना लगाने तक ही सीमित रह गया है, जैसे हर 15 मिनट की देरी या गलती पर ₹1 लाख का फाइन।
राजनीतिक गलियारों में मचा हड़कंप
विपक्ष के बड़े नेताओं, जिनमें राहुल गांधी भी शामिल हैं, ने इस छात्र के दावों का समर्थन करते हुए सरकार और शिक्षा मंत्रालय पर तीखे हमले किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि नियमों को इस तरह मरोड़ा गया ताकि एक खास कंपनी को फायदा पहुंचाया जा सके, भले ही इसके लिए टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) जैसी बड़ी अनुभवी कंपनियों को रेस से बाहर करना पड़ा हो। इसके चलते अब छात्र संगठनों और अभिभावकों द्वारा कॉपियों के पुनर्मूल्यांकन और एक स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग तेज हो गई है। हालांकि, सीबीएसई ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि टेंडर प्रक्रिया में सभी सरकारी नियमों का पालन किया गया था।




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