CBSE ने परीक्षा से सिर्फ 74 दिन पहले दिया था OSM ठेका, 25 और 65 रु की लगी थी बोली, 25 वाली कंपनी को चुना
सीबीएसई ने अपनी ऑनस्क्रीन मार्किंग का ठेका कोएम्प्ट एडु टेक को दिया था। यह ठेका बोर्ड परीक्षा से सिर्फ 74 दिन पहले ही दिया गया था। सवाल उठ रहे हैं कि कॉन्ट्रेक्ट और ओएसएम पर इतनी हड़बड़ी क्यों थी।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 12वीं परीक्षा की ऑनस्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) का ठेका जिस तरह से कंपनी दिया, उससे इसके कामकाज के तौर तरीके पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पता चला है कि आंसरशीट की ऑनस्क्रीन मार्किंग सिस्टम का ठेका हैदराबाद की कंपनी कोएम्प्ट एडु टेक (Coempt Edu Teck) को बोर्ड परीक्षा शुरू होने से महज 74 दिन पहले यानी 5 दिसंबर 2025 को दिया गया था। 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं 17 फरवरी से शुरू होनी थीं। सीबीएसई बोर्ड की ओर से OSM को पूरी तरह लागू करने की घोषणा से सिर्फ 66 दिन पहले ही यह ठेका दिया गया था। अधिकारियों ने शुक्रवार को इसकी पुष्टि की। टेंडर प्रक्रिया में कोएम्प्ट एडु टेक नाम की कंपनी सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी के तौर पर सामने आई थी।
सीबीएसई ने क्वालिटी और लागत दोनों नजरिए से इसे खरा पाते हुए ओएसएम का ठेका दिया। कॉन्ट्रेक्ट देने के इतने कम समय के भीतर आनन फानन में ओएसएम को लागू करना सवालों के घरे में आ गया है। इतनी हड़बड़ी में ठेका क्यों दे दिया गया और इसे देने के बाद बिना पर्याप्त तैयारियों के ओएसएम क्यों लागू कर दिया गया।
कोएम्प्ट ने मांगे 25 रुपये, टीसीएस ने 65 रुपये
दिलचस्प बात यह है कि सीबीएसई बोर्ड को पहले दो टेंडर राउंड में कोई सही कंपनी मिल ही नहीं थी। पहली बार कोई बोली नहीं लगी। दूसरी बार कोई टेक्निकली योग्य बोली लगाने वाला नहीं मिला। इसके बाद तीसरी बार अगस्त 2025 में बोर्ड ने बेहद जरूरी शर्तों में ढील दी। टेंडर के नियमों और शर्तों में ढील दी गई, तब जाकर यह कांट्रैक्ट फाइनल हो पाया। अब सवाल इस बात पर भी उठ रहे हैं कि क्या पैसों की बचत के चक्कर में यह फैसला हुआ। दरअसल, ठेका पाने की इस रेस में टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज (TCS) जैसी बड़ी कंपनी भी शामिल थी, जिसने एक कॉपी जांचने के लिए टैक्स के साथ करीब 65 रुपये प्रति कॉपी मांगे थे। लेकिन कोएम्प्ट एडु टेक ने सिर्फ 25.75 रुपये प्रति कॉपी की बोली लगाई। कोएम्प्ट एडु टेक ने सबसे सस्ती होने के कारण यह ठेका हासिल कर लिया।
हिन्दुस्तान टाइम्स में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, टीसीएस की दरें काफी अधिक थीं, कुछ श्रेणियों के लिए टैक्स के बाद प्रति कॉपी लगभग 65 रुपये थीं। अधिकारियों ने बताया कि कॉन्ट्रैक्ट दिए जाने के समय दोनों कंपनियों के पास कैपेबिलिटी मैच्योरिटी मॉडल इंटीग्रेशन लेवल 5' (CMMI Level 5) सर्टिफिकेशन था जो कि इस क्षेत्र का सर्वोच्च स्तर है।
20 कॉपियां हुईं अदल बदल
करीब 98 लाख कॉपियों की चेकिंग के दौरान अब तक 20 ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जहां बच्चों की आंसर-शीट ही आपस में मिक्स हो गई।
अधिकारी बोले- हाथ से भी होतीं गलतियां
अधिकारियों ने यह भी कहा कि 98 लाख उत्तर पुस्तिकाएं अगर हाथ से चेक होती तो भी इन गलतियों की गुंजाइश रहती। एक अधिकारी ने कहा, 'जिस बच्चे की उत्तर-पुस्तिका की अदला-बदली हुई है, उसके लिए कोई भी स्पष्टीकरण काफी नहीं है। लेकिन अगर गलतियों का एकमात्र कारण तेजी होती, तो ऐसी और भी कई समस्याएं सामने आ सकती थीं।' उन्होंने आगे बताया कि बोर्ड इस बात की जांच कर रहा है कि ये मिक्स कैसे हुईं और इस सिस्टम को पूरी तरह से त्रुटिरहित बनाने के क्या उपाय किए जा सकते हैं।
सामने आई गलतियों और तकनीकी गड़बड़ियों पर लगने वाले जुर्माने के संबंध में अधिकारियों ने बताया कि री-इवेल्यूएशन वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कॉन्ट्रेक्ट के नियम लागू होंगे। अधिकारियों के अनुसार गलत तरीके से स्कैन की गई या आपस में बदल गई उत्तर-पुस्तिकाओं पर प्रति कॉपी 4000 रुपये का जुर्माना लगता है। आंशिक रूप से स्कैन की गई कॉपियों पर 8000 रुपये और पूरी तरह से स्कैन न की गई कॉपियों पर 15000 रुपये का जुर्माना लगाया जाता है।
कोएम्प्ट एडु टेक के चयन का बचाव किया
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं द्वारा तेलंगाना में कंपनी के पिछले कामों को लेकर लगाए गए आरोपों के बीच अधिकारियों ने कोएम्प्ट एडु टेक के चयन का बचाव भी किया। एक अधिकारी ने बताया कि राज्य में परीक्षा के बाद के प्रबंधन से जुड़े कंपनी के काम को लेकर चल रहे मुकदमों की अदालतों द्वारा जांच की जा चुकी है और उसमें कुछ भी असामान्य नहीं पाया गया है।
अगले साल से डिजिलॉकर में आएंगी आंसरशीट
अधिकारियों ने कहा कि अगले साल से छात्रों को डिजिलॉकर के जरिए उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन की हुई कॉपियां उपलब्ध कराई जाएंगी।




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