CBSE : डिजिलॉकर में मार्कशीट के साथ मिलेगी आंसरशीट, सीबीएसई रिजल्ट प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करेगी केंद्र सरकार
अगले साल सीबीएसई छात्रों को उनकी मार्कशीट और सर्टिफिकेट के साथ-साथ उनकी आंसरशीट की स्कैन की हुई कॉपी भी सीधे डिजिलॉकर में मिलने की संभावना है। केंद्र सरकार ऐसा विचार कर रही है।

सीबीएसई अगले साल से बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करने की योजना बना रहा है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (सीबीएसई) की ऑनस्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) पर उठे विवाद के बाद केंद्र सरकार छात्रों को पूरी आंसर शीट डिजिलॉकर (Digilocker) में उपलब्ध कराने पर विचार कर रही है। छात्रों को उनकी मार्कशीट और सर्टिफिकेट के साथ-साथ उनकी आंसरशीट की स्कैन की हुई कॉपी भी सीधे डिजिलॉकर में मिलने की संभावना है। यह व्यवस्था अगले साल से लागू हो सकती है। 12वीं के छात्रों के पुनर्मूल्यांकन के नतीजे ओएसएम का भविष्य तय करेंगे। ओएसएम विवाद के बाद परीक्षा सिस्टम में ज्यादा पारदर्शिता और डिजिटलीकरण लाने की व्यापक कोशिश के तहत इस कदम पर विचार किया जा रहा है।
हालांकि, सरकार ने भी यह माना है कि ओएसएम में खामियां हैं। इससे जुड़ी तकनीकी दिक्कतों के समाधान के प्रयास जारी हैं। आईआईटी मद्रास और आईआईटी कानपुर के निदेशक की अगुवाई में एक टीम पोर्टल सहित सभी समस्याओं का अध्ययन करके एक रिपोर्ट देगी और यह टीम समस्याओं को ठीक करने में भी मदद करेगी। उधर, सीबीएसई के ऑनलाइन पेमेंट गेटवे से चार बैंक जोड़े गए हैं। इनमें एसबीआई, केनरा बैंक, इंडियन बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा शामिल हैं। संभवतः यह पोर्टल एक जून से लाइव होगा।
वर्तमान में क्या है सिस्टम
अभी सीबीएसई छात्रों को नतीजे घोषित होने के बाद डिजिलॉकर के जरिए सिर्फ़ उनकी डिजिटल मार्कशीट, माइग्रेशन सर्टिफिकेट और पासिंग सर्टिफिकेट ही मिलते हैं। जो छात्र अपनी आंसर शीट देखना चाहते हैं, उन्हें नतीजे घोषित होने के बाद स्कैन की हुई कॉपी या वेरिफिकेशन के लिए अलग से आवेदन करना पड़ता है और तय फीस चुकानी पड़ती है। प्रस्तावित सिस्टम के तहत छात्रों को किसी अलग आवेदन प्रक्रिया से गुजरे बिना ही डिजिलॉकर के जरिए अपनी चेक की हुई आंसर शीट तक पहुंच अपने-आप मिल सकती है। इस प्रक्रिया में अक्सर कई हफ्ते लग जाते हैं और हर साल लाखों आवेदन आते हैं। सूत्रों ने संकेत दिया कि सीबीएसई का निजी तौर पर मानना है कि आंसर शीट तक सीधी पहुंच से भ्रम कम हो सकता है, मूल्यांकन प्रक्रिया पर भरोसा बढ़ सकता है और अंकों के वेरिफिकेशन और पुनर्मूल्यांकन से जुड़े विवाद कम हो सकते हैं।
अभी तक कोई टाइमलाइन नहीं
सीबीएसई ने अभी तक इसे लागू करने की समयसीमा के बारे में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन सूत्रों के अनुसार बोर्ड इस रूपरेखा पर सक्रिय रूप से काम कर रहा है और इस प्रस्ताव को चरणों में पेश किया जा सकता है, जिसकी शुरुआत 2027 की बोर्ड परीक्षा से होगी। यदि इसे लागू किया जाता है, तो यह कदम हाल के वर्षों में सीबीएसई परीक्षा परिणामों के बाद की पारदर्शिता व्यवस्था में सबसे बड़े बदलावों में से एक होगा।
एक उत्तर पुस्तिका में होते हैं 40 पेज
सूत्रों ने कहा कि इस बार 17 लाख छात्रों की 90 लाख आंसर शीट स्कैन की गई थीं। एक उत्तर पुस्तिका में करीब 40 पेज होते हैं। इस हिसाब से करीब 40 करोड़ शीट्स को स्कैन किया गया था। इनमें से 68 हजार को शिकायतों के बाद दोबारा स्कैन किया गया। इसके बाद भी 13 हजार में स्कैनिंग ठीक से नहीं हुई तो इनकी मैन्युअल जांच की गई।
वहीं, वेदांत का उदाहरण देते हुए सूत्रों ने कहा, 20 छात्रों की कॉपियां मिक्स होने का मामला पाया गया है। इनका पुनर्मूल्यांकन कराया गया है। सिक्योरिटी फीचर्स की गड़बड़ी की वजह से ऐसा हो सकता है।
सीबीएसई का पोर्टल एक जून से शुरू होगा
सीबीएसई ने परीक्षा परिणाम के बाद उत्तर पुस्तिकाओं के सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। बोर्ड ने घोषणा की है कि पोस्ट-रिजल्ट गतिविधियों के लिए निर्धारित पोर्टल अब एक जून से शुरू होगा। सीबीएसई के अनुसार, यह फैसला इसलिए लिया गया है, ताकि छात्रों को आवेदन करते समय किसी तरह की तकनीकी दिक्कत का सामना न करना पड़े और पूरी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रहे। इस घोषणा के बीच, बड़ी संख्या में छात्रों और अभिभावकों ने उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं।
स्पष्टीकरण मांगना प्रक्रिया का हिस्सा
इस पूरे विवाद पर एक सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि रिजल्ट खराब होने पर जवाबदेह तय करना कोई नई बात नहीं है। उन्होंने कहा, यह तय प्रक्रिया का हिस्सा है। पहले भी शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगे गए हैं और इसके बाद कई कक्षाओं के नतीजों में सुधार भी देखा गया है। इसे प्रशासनिक कार्रवाई के बजाय जिम्मेदारी तय करने के रूप में देखा जाना चाहिए।
खराब नतीजों पर शिक्षकों से जवाब मांगा
सीबीएसई कक्षा 12वीं का परिणाम संतोषजनक न आने पर दिल्ली सरकार के स्कूलों के प्रिंसिपल्स ने संबंधित विषय के शिक्षकों को मेमोरेंडम (कारण बताओ नोटिस) जारी कर 3 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। नोटिस में कहा गया है कि खराब रिजल्ट से संस्थान की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। शिक्षकों को आगे बेहतर परिणाम के लिए एक्स्ट्रा क्लास लेने, टेस्ट कराने और कमजोर छात्रों पर व्यक्तिगत ध्यान देने की सलाह दी गई है। वहीं, गवर्नमेंट स्कूल टीचर्स एसोसिएशन ने शिक्षकों से जवाब मांगने पर कड़ा विरोध जताया। संघ ने दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद को पत्र लिखकर मांग की है कि शिक्षकों को जारी किए गए सभी शो-कॉज नोटिस तुरंत वापस लिए जाएं। शिक्षक संघ का साफ कहना है कि रिजल्ट में आई गिरावट का मुख्य कारण ओएसएम प्रणाली की तकनीकी कमियां हैं, न कि शिक्षकों की मेहनत।




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