CBSE OSM : Who approved it CBSE faces tough questions over controversial OSM contract OSM ठेका किसने मंजूर किया, क्यों अचानक नियम आसान बना दिए गए, कॉन्ट्रैक्ट को लेकर सवालों से घिरा CBSE, Career Hindi News - Hindustan
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OSM ठेका किसने मंजूर किया, क्यों अचानक नियम आसान बना दिए गए, कॉन्ट्रैक्ट को लेकर सवालों से घिरा CBSE

ओएसएम को लेकर सीबीएसई के समक्ष इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) और आंतरिक समितियों द्वारा कई समस्याएं बताई गई थीं लेकिन इसे फिर भी लागू कर दिया गया। अब ओएसएम ठेके की कड़ी जांच की जा रही है।

Wed, 3 June 2026 02:13 PMPankaj Vijay लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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OSM ठेका किसने मंजूर किया, क्यों अचानक नियम आसान बना दिए गए, कॉन्ट्रैक्ट को लेकर सवालों से घिरा CBSE

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दखल के बाद केंद्र सरकार ने सीबीएसई से जुड़े मामलों में कड़ा कदम उठाते हुए सीबीएसई के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया है। साथ ही ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सेवाओं की टेंडर प्रक्रिया की जांच के लिए एक जांच समिति भी गठित की गई है। कैबिनेट सचिवालय द्वारा गठित समिति को अपनी रिपोर्ट एक माह के अंदर डीओपीटी, कार्मिक मंत्रालय को देनी होगी। समिति के गठन और उसकी शर्तों से साफ संकेत है कि वह खरीद में अधिकारियों की भूमिका की भी जांच करेगी। सबसे अहम पहलू यह है कि अब यह मामला भी नीट की तरह सीधे प्रधानमंत्री की निगरानी में आ गया है।

सीबीएसई पर आरोप लग रहे हैं कि उसने एक प्राइवेट टेक्नोलॉजी कंपनी को अपना बहुत ही अहम ऑनस्क्रीन मार्किंग (OSM) का ठेका देने से पहले इंटरनल विभागों से मिल रही चेतावनियों को नजरअंदाज किया। इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम' (CERT-In) ने भी इसमें कई कमियां गिनाई थीं , उसे भी अनसुना कर दिया। जनवरी में बोर्ड द्वारा किए गए एक पायलट प्रैक्टिस से मिली जानकारी के अनुसार इस कॉन्ट्रैक्ट को मंजूरी देने के फैसले में सुरक्षा के जरूरी नियमों को नज़रअंदाज़ किया गया, जिससे डेटा की सुरक्षा और छात्रों की निजता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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CBSE ने किन बातों को नजरअंदाज किया

जांच ​​से पता चला है कि खरीद प्रक्रिया में तब गड़बड़ी हुई जब सुरक्षा से जुड़ी उच्चस्तरीय मंजूरियों पर ध्यान नहीं दिया गया। सुरक्षा से जुड़ी कमजोरियों की टाइमलाइन में चेतावनियों के तीन अलग-अलग स्तर बताए गए हैं, जिन्हें कथित तौर पर बोर्ड के नेतृत्व ने नजरअंदाज कर दिया।

1. CERT-In ने बताया थी सुरक्षा से जुड़ी कमियां

टेंडर की बोली प्रक्रिया पूरी होने से पहले, CERT-In, जो साइबर सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं को संभालने वाली देश की नोडल एजेंसी है, ने कथित तौर पर एक एडवाइजरी जारी की थी। इसमें वेंडर के डिजिटल मूल्यांकन प्लेटफॉर्म के डिजाइन को लेकर चिंताएं जताई गई थीं। एजेंसी ने कई गंभीर कमजोरियों की पहचान की थी, जिनमें अपर्याप्त एन्क्रिप्शन उपाय और संभावित 'बैकडोर एक्सेस पॉइंट' शामिल थे। इनके ज़रिए संवेदनशील और छात्रों की पहचान जाहिर करने वाली जानकारी रखने वाले सेंट्रल सर्वर तक, बिना अनुमति वाले यूजर्स की पहुंच हो सकती थी।

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2. इंटरनल टेक्निकल समिति की चेतावनियां

CBSE की अंदरूनी आईटी और मूल्यांकन समिति ने कथित तौर पर तकनीकी मूल्यांकन प्रक्रिया के दौरान अपनी आपत्तियां जताई थीं। उन्होंने चेतावनी दी थी कि वेंडर के पास 'डिस्ट्रिब्यूटेड डिनायल ऑफ़ सर्विस' (DDoS) हमलों से बचाव के मजबूत उपाय नहीं हैं, और डिजास्टर रिकवरी स्किल नहीं दिखाई है।

3. पिछला रिकॉर्ड संदिग्ध

सबसे बड़ी चूक यह थी कि कंपनी के पिछले प्रदर्शन को पूरी तरह से नजरअंदाज़ कर दिया गया। सार्वजनिक रिकॉर्ड से पता चलता है कि चुने गए वेंडर को पहले एक राज्य शिक्षा बोर्ड द्वारा एक बड़ी तकनीकी गड़बड़ी के लिए दंडित किया गया था। इस गड़बड़ी के कारण परीक्षा के नतीजे कई हफ्ते देर से आए थे। इसके अलावा उस पर प्रतियोगी परीक्षाओं की आंसर-की लीक करने के भी आरोप लग चुके थे।

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मार्किंग पर छात्र के सवालों में उलझा सीबीएसई

झारखंड के 17 साल के छात्र सार्थक सिद्धांत ने मंगलवार को संसदीय समिति के सामने प्रजेंटेशन दिया। सार्थक ने 12वीं की परीक्षाओं में ऑनलाइन मार्किंग के लिए वेंडर चुनने की टेंडर प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। सार्थक के प्रजेंटेशन में पूछे गए सवालों से सीबीएसई बैकफुट पर नजर आया।

सार्थक ने कहा कि कोएम्प्ट एड्यूटेक (पहले ग्लोबारेना) को टेंडर देने के लिए सीबीएसई ने नियमों में कई बदलाव किए। इससे यह सवाल उठता है कि प्रस्ताव अनुरोध जारी करने के बाद भी शर्तों में बार-बार फेरबदल क्यों किया? कंपनी की बैलेंस शीट के अनुसार 50 करोड़ का फाइनेंशियल ब्लैकलिस्टिंग का उल्लेख होना चाहिए।

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सार्थक ने आगे कहा कि पुराने टेंडर में खराब परफॉरमेंस के तीन सख्त क्लॉज थे, जो नए आरएफपी में पूरी तरह हटा दिए गए।

- इसके अलावा सार्थक ने कहा कि ब्लैकलिस्टिंग नियम, सीएमएमआई सर्टिफिकेशन, फाइनेंशियल योग्यता और प्रोजेक्ट अनुभव के मानदंडों में भी ढील दी गई। सीबीएसई के विभिन्न टेंडर दस्तावेजों की तुलना की गई, जिसमें कम से कम 15 बड़ी गड़बड़ियां पाई हैं।

एस. राधा चौहान होंगी कमेटी की अध्यक्ष

समिति ओएसएम सेवाओं की खरीद, टेंडर प्रक्रिया और उससे जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच करेगी। जांच समिति की अध्यक्षता कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन की चेयरपर्सन एस. राधा चौहान करेंगी। समिति को सीबीएसई द्वारा ओएसएम सिस्टम के लिए सेवाओं की खरीद से जुड़े सभी मामलों की जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरकारी आदेश में कहा गया कि समिति की अध्यक्ष जरूरत पड़ने पर अन्य विभागों और कार्यालयों के अधिकारियों की मदद भी ले सकेंगी।

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