JEE : CBSE 12वीं में कम अंक से IIT और NIT की उम्मीदें टूटीं, आरोपों पर बोर्ड ने दी सफाई, क्या कहा
सीबीएसई ने कहा है कि 12वीं कक्षा की ऑनलाइन मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और समान अवसर आधारित है तथा ओएसएम प्रणाली इसी उद्देश्य से लागू की गई है। छात्रों ने कम अंक के लिए इसे जिम्मेदार ठहराया था।

CBSE digital evaluation issues 2026: सीबीएसई 12वीं में इस वर्ष पिछले साल के मुकाबले 3 फीसदी कम विद्यार्थी पास हुए। इसके अलावा 90 और 95 फीसदी अंक पाने वाले छात्रों की संख्या में भी कमी आई है। क्या विद्यार्थियों के कम मार्क्स की वजह सीबीएसई 12वीं की कॉपियों का ऑनलाइन मूल्यांकन किया जाना है। फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी और गणित जैसे विषयों में प्राप्त कम अंकों को लेकर सोशल मीडिया पर बहुत से विद्यार्थियों ने गुस्सा जाहिर किया है। उन्होंने अपने कम स्कोर के लिए सीबीएसई की कंप्यूटर पर ऑनलाइन कॉपी चेकिंग सिस्टम पर ठीकरा फोड़ा है। इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर नई बहस छिड़ गई है।
आपको बता दें कि सीबीएसई बोर्ड ने 12वीं पहली बार ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम के जरिए करीब 98 लाख कॉपियों की डिजिटल जांच कराई। विद्यार्थियों ने कहा कि इसका खामियाजा 12वीं साइंस के छात्रों को भुगतना पड़ा है। साइंस के मुख्य विषयों में 100 नंबर पाने वाले अपेक्षाकृत कम रहे। मैथ में 1283, केमिस्ट्री में 1061 और फिजिक्स में 96 छात्र ही 100 नंबर पा सके। जबकि, आर्ट्स और स्किल/कॉमर्स आधारित विषयों में ऐसे छात्र ज्यादा रहे। पेंटिंग में 15334, साइकोलॉजी में 2533, एआई में 3326 ने 100 नंबर हासिल किए।
छात्रों ने क्या आरोप लगाए
कुछ छात्रों ने आरोप लगाया था कि कॉपियों की स्कैनिंग ठीक से न होने के कारण मूल्यांकन में दिक्कत हुई। किसी छात्र का अंतिम उत्तर सही था, लेकिन उसने बीच के जरूरी स्टेप्स नहीं लिखे थे, तो उसे पूरे अंक नहीं मिले। इस सिस्टम में सही उत्तर के बजाय स्टेप्स पर ध्यान दिया गया।
आईआईटी, एनआईटी और ट्रिपलआईटी की उम्मीदों को झटका
आईआईटी, एनआईटी और ट्रिपलआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश के लिए सामान्य वर्ग के छात्रों को 12वीं बोर्ड में कम से कम 75% अंक लाना अनिवार्य है। या फिर अपने बोर्ड के टॉप 20 पर्सेंटाइल में होना जरूरी है। इस बार डिजिटल चेकिंग और सख्त मार्किंग के चलते बड़ी संख्या में छात्र इस आंकड़े तक नहीं पहुंच पाए। कई छात्रों ने जेईई मेन जैसी कठिन परीक्षाओं में 80-99 पर्सेंटाइल तक हासिल किए, लेकिन बोर्ड परीक्षा में उनके अंक 75% से कम रह गए। अच्छे जेईई स्कोर के बावजूद बोर्ड की पात्रता पूरी न होने से कई होनहार छात्र जोसा (JoSAA) काउंसलिंग व एडमिशन प्रक्रिया से बाहर हो गए हैं। जोसा काउंसलिगं से ही आईआईटी, एनआईटी और ट्रिपलआईटी में दाखिला होता है।
क्या हो सकती है वजह
एक्सपर्ट्स के मुताबिक जेईई और नीट की तैयारी करने वाले छात्र शॉर्टकट ट्रिक्स और MCQ (बहुविकल्पीय प्रश्न) के आदी हो चुके हैं। उनकी विस्तार से उत्तर लिखने की आदत छूट गई है, जो बोर्ड परीक्षा के लिए सबसे जरूरी चीज होती है। इस बार सीबीएसई ने उत्तर लिखने के निर्धारित तरीके और स्टेप मार्किंग पर बहुत ज्यादा जोर दिया। इस बार शिक्षकों को सख्त गाइडलाइन का पालन करना पड़ा, जिसके तहत सिस्टम में हर स्टेप के लिए अंक तय थे और सही उत्तर के बजाय स्टेप्स पर अधिक ध्यान दिया गया।
मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी :सीबीएसई
सीबीएसई ने कक्षा 12वीं के परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद सोशल मीडिया पर ऑन स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों पर शुक्रवार को स्पष्टीकरण जारी किया। बोर्ड ने कहा कि मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और समान अवसर आधारित है तथा ओएसएम प्रणाली इसी उद्देश्य से लागू की गई है।
बोर्ड के अनुसार फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी और गणित जैसे विषयों में प्राप्त अंकों को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की टिप्पणियां सामने आई हैं। सीबीएसई ने स्पष्ट किया कि ऑन स्क्रीन मार्किंग प्रणाली का उद्देश्य उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में पारदर्शिता व वस्तुनिष्ठता सुनिश्चित करना है। सीबीएसई ने कहा कि छात्रों को पुनर्मूल्यांकन और उत्तर पुस्तिकाओं की कॉपी प्राप्त करने का अवसर देना भी पारदर्शी व्यवस्था का हिस्सा है।
19 मई से स्कैन कॉपी के लिए आवेदन कर सकेंगे
नई दिल्ली। सीबीएसई ने सीनियर सेकेंडरी परीक्षा 2025-26 के विद्यार्थियों के लिए मूल्यांकित उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी प्राप्त करने, अंक सत्यापन व पुनर्मूल्यांकन की विस्तृत समय-सारिणी जारी कर दी है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि पूरी प्रक्रिया केवल ऑनलाइन माध्यम से ही होगी और निर्धारित तिथि व समय के बाद कोई आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। विद्यार्थी 19 से 22 मई तक आवेदन कर सकेंगे।




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