CBSE Board Exam 2026: Why Do Question Papers Have QR Codes? Know the Security Reason CBSE Board Exam 2026: CBSE बोर्ड परीक्षा 2026: प्रश्न पत्रों पर क्यों होते हैं QR कोड? जानें नकल रोकने की पूरी रणनीति, Career Hindi News - Hindustan
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CBSE Board Exam 2026: CBSE बोर्ड परीक्षा 2026: प्रश्न पत्रों पर क्यों होते हैं QR कोड? जानें नकल रोकने की पूरी रणनीति

CBSE Board Exam 2026: सीबीएसई बोर्ड के प्रश्न पत्रों पर छपे हुए ‘QR कोड’ का मकसद क्या है और ये कैसे परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने में मदद करते हैं? सीबीएसई ने प्रश्न पत्रों के लीक होने और नकल को रोकने के लिए एक बेहद मजबूत सुरक्षा घेरा तैयार किया है।

Thu, 12 March 2026 09:16 AMPrachi लाइव हिन्दुस्तान
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CBSE Board Exam 2026: CBSE बोर्ड परीक्षा 2026: प्रश्न पत्रों पर क्यों होते हैं QR कोड? जानें नकल रोकने की पूरी रणनीति

CBSE Board Exam 2026: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं इन दिनों देशभर में जारी हैं। इस साल छात्रों और अभिभावकों ने एक विशेष बात पर ध्यान दिया है—बोर्ड के प्रश्न पत्रों पर छपे हुए 'QR कोड'। आखिर इन कोड्स का मकसद क्या है और ये कैसे परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने में मदद करते हैं? शिक्षा के क्षेत्र में तकनीकी क्रांति लाते हुए, सीबीएसई ने प्रश्न पत्रों के लीक होने और नकल को रोकने के लिए एक बेहद मजबूत सुरक्षा घेरा तैयार किया है।

QR कोड का असली मकसद: पारदर्शिता और सुरक्षा

सीबीएसई के अनुसार, प्रश्न पत्रों पर क्यूआर कोड का इस्तेमाल मुख्य रूप से ‘पेपर ट्रेल’ और 'ट्रैकिंग' के लिए किया जाता है। प्रत्येक छात्र को मिलने वाले प्रश्न पत्र पर एक विशिष्ट कोड होता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यदि कोई छात्र या परीक्षा केंद्र का कर्मचारी प्रश्न पत्र की फोटो खींचकर सोशल मीडिया पर वायरल करने की कोशिश करता है, तो बोर्ड तुरंत उस कोड के जरिए यह पता लगा सकता है कि वह पेपर किस केंद्र और किस कमरे से लीक हुआ है।

पेपर लीक पर नकेल

पहले कई बार ऐसी घटनाएं सामने आई हैं जहां परीक्षा शुरू होने के कुछ ही मिनटों बाद पेपर इंटरनेट पर घूमने लगता था। क्यूआर कोड तकनीक ने इस समस्या का समाधान कर दिया है। जैसे ही किसी पेपर की तस्वीर सामने आती है, बोर्ड के अधिकारी उसे स्कैन कर उस विशेष प्रश्न पत्र की पूरी यात्रा (प्रिंटिंग प्रेस से लेकर परीक्षा केंद्र तक) का विवरण निकाल लेते हैं। इससे दोषी व्यक्ति या केंद्र की पहचान करना आसान हो जाता है और उन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

सीबीएसई की अन्य हाई-टेक सुरक्षा व्यवस्थाएं

केवल क्यूआर कोड ही नहीं, सीबीएसई ने सुरक्षा की कई और परतें भी जोड़ी हैं:

जियो-टैगिंग: प्रश्न पत्रों के बक्सों को परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने के दौरान जियो-टैगिंग का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे यह पता रहता है कि बक्सा कब और कहां खोला गया।

इनकैप्सुलेटेड डेटा: डिजिटल तरीके से भेजे जाने वाले प्रश्न पत्रों के लिए विशेष पासवर्ड और लॉगिन का उपयोग किया जाता है, जो परीक्षा शुरू होने से कुछ समय पहले ही अधिकृत अधिकारियों को मिलते हैं।

वॉटरमार्क: प्रत्येक पेपर पर विशेष वॉटरमार्क होते हैं जो फोटो कॉपी किए जाने पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं, जिससे मूल पेपर की पहचान बनी रहती है।

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छात्रों और अभिभावकों के लिए संदेश

बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि यह तकनीक केवल सुरक्षा और गोपनीयता के लिए है। छात्रों को इससे घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह उनके प्रदर्शन या मूल्यांकन को प्रभावित नहीं करता है। इसका उद्देश्य केवल एक निष्पक्ष परीक्षा वातावरण प्रदान करना है ताकि किसी भी मेधावी छात्र के साथ अन्याय न हो। बोर्ड ने यह भी चेतावनी दी है कि जो लोग सोशल मीडिया पर फर्जी पेपर या अफवाहें फैलाते हैं, उन्हें इन तकनीकी सुरक्षा उपायों के जरिए आसानी से पकड़ा जा सकता है।

इस पहल से सीबीएसई ने यह साबित कर दिया है कि वह आधुनिक युग की चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीक का बेहतरीन इस्तेमाल कर रहा है। आने वाले वर्षों में, बोर्ड परीक्षाओं को पूरी तरह से 'फूलप्रूफ' बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के इस्तेमाल पर भी विचार कर रहा है।

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