CBSE Class 12 Maths Paper : 12वीं गणित के पेपर में QR कोड विवाद पर आई सीबीएसई की सफाई, क्या बोला बोर्ड
12वीं कक्षा के मैथ्स के प्रश्न पत्र में क्यूआर कोड संबंधी विवाद पर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने मंगलवार को स्पष्टीकरण जारी किया। सीबीएसई ने पुष्टि की है कि वायरल प्रश्न पत्र असली हैं और उनकी सुरक्षा में कोई सेंध नहीं लगी है। सी

CBSE Class 12 Maths Paper : 12वीं कक्षा के मैथ्स के प्रश्न पत्र में क्यूआर कोड संबंधी विवाद पर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने मंगलवार को स्पष्टीकरण जारी किया। सीबीएसई ने पुष्टि की है कि वायरल प्रश्न पत्र असली हैं और उनकी सुरक्षा में कोई सेंध नहीं लगी है। सीबीएसई ने आगे कहा कि इस मामले को गंभीरता से लिया गया है और बोर्ड यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठा रहा है कि भविष्य में ऐसी समस्याएं दोबारा न हों। आपको बता दें कि सोमवार को आयोजित हुए सीबीएसई 12वीं गणित के प्रश्न पत्र पर मौजूद QR कोड यूजर्स को अंग्रेजी गायक रिक एस्टली के पॉपुलर गाने "Never Gonna Give You Up" के यूटूयूब वीडियो पर ले जा रहा था। इससे छात्रों में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई और संबंधित छात्रों व उनके अभिभावकों के मन में प्रश्न पत्रों की प्रामाणिकता को लेकर चिंताएं पैदा हो गई थीं। स्टूडेंट्स को डर था कि कहीं पेपर के साथ कोई छेडछाड़ न हुई हो।
कई यूजर्स और स्टूडेंट्स ने वीडियो शेयर कर दावा किया कि प्रश्न पत्र पर छपे क्यूआर कोड को स्कैन करने पर यूट्यूबर पर वह वीडियो सॉन्ग खुल रहा था जो इंटरनेट पर काफी मशहूर एक पैंक है, जिसे आमतौर पर "रिकरोल" (rickroll) कहा जाता है।
अपनी आधिकारिक विज्ञप्ति में सीबीएसई ने पुष्टि की कि प्रश्न पत्र असली हैं और परीक्षा की सुरक्षा पूरी तरह से बरकरार है। बोर्ड ने आगे जोर देकर कहा कि QR कोड सुरक्षा के लिए होता है, जिसे किसी भी संभावित लीक की स्थिति में परीक्षा पत्रों की प्रामाणिकता को सत्यापित करने के लिए डिजाइन किया गया है। सीबीएसई ने आश्वासन दिया कि भविष्य में इस तरह के किसी भी भ्रम को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
सीबीएसई 12वीं गणित पेपर के सेक्शन D ने छुड़ाए पसीने
सीबीएसई 12वीं मैथ्स का पेपर देकर निकले कुछ छात्रों ने पेपर को सामान्य बताया, लेकिन केस स्टडी से जुड़े सवालों में उलझने की बात भी कही। इस वजह से कई छात्र परीक्षा केंद्रों के बाहर मायूस दिखाई दिए। सेक्टर-27 स्थित केंब्रिज स्कूल के बाहर छात्रों के चेहरों पर परीक्षा को लेकर मायूसी देखने को मिली। कई छात्रों का कहना था कि एमसीक्यू और अधिकांश प्रश्न ठीक थे, लेकिन केस स्टडी वाले सवालों ने थोड़ी परेशानी खड़ी कर दी। छात्र गणेश शर्मा ने बताया कि प्रश्नपत्र पाठ्यक्रम के अनुसार था, अनुभाग ए आसान रहा, लेकिन अनुभाग सी और डी में कैलकुलस के प्रश्नों में काफी परेशानी हुई। छात्र अदित्य ने कही कि बहुविकल्पीय प्रश्न आसान थे, लेकिन केस स्टडी से जुड़े प्रश्नों में दिक्कत आई। उन्होंने बताया कि एक-दो प्रश्नों में छात्र थोड़े उलझे, लेकिन पेपर का स्तर पिछले वर्ष के समान ही रहा। गणित शिक्षक मुकेश कुमार ने बताया कि पेपर का स्तर सामान्य रहा। बहुविकल्पीय प्रश्न आसान थे, हालांकि कुछ छात्रों को केस स्टडी से जुड़े प्रश्नों में दिक्कत आई। उन्होंने बताया कि एक-दो प्रश्नों में छात्र थोड़े उलझे, लेकिन पेपर का स्तर पिछले वर्ष के समान ही रहा।
गाजियाबाद में भी मुश्किल प्रश्नों को सुलझाने में छात्र उलझ गए। इसके चलते दूसरे प्रश्नों के लिए समय कम रह गया। कम समय के दबाव में कुछ प्रश्न छूट गए, जिससे कई छात्र परीक्षा के बाद मायूस नजर आए। परीक्षा के स्तर को कुछ छात्रों ने कठिन तो कुछ ने मध्यम स्तर का बताया। ठाकुरद्वार स्कूल से परीक्षा देकर आई छात्रा स्वाति गौतम ने बताया कि पेपर में एक नंबर वाले दो तीन बहुविकल्पीय प्रश्नों को करने में ही 15 मिनट का समय लग गया। कई प्रश्नों का स्तर काफी उलझाने वाला था। छात्र सिद्धार्थ रॉय ने बताया कि कुछ प्रश्न तो बहुत ही आसानी से हो गए, लेकिन चार-पांच प्रश्न बहुत ही घुमाकर पूछे गए थे। इसी में सबसे अधिक समय लगा।
मैथ्स की यह परीक्षा उन छात्रों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है जो इंजीनियरिंग, अर्थशास्त्र, डेटा साइंस और अन्य एनालिटिकल क्षेत्रों में अपना करियर बनाना चाहते हैं। छात्रों की शुरुआती प्रतिक्रियाओं से पता चला कि पूरा पेपर मध्यम से लेकर थोड़ा कठिन था; कई उम्मीदवारों ने बताया कि सेक्शन D, जिसमें लंबे जवाब देने होते हैं, प्रश्न पत्र का सबसे मुश्किल हिस्सा था। परीक्षा देने वाले कई छात्रों ने बताया कि पेपर संतुलित था, लेकिन इसमें काफी समय लगा। सोनिया विहार के गवर्नमेंट गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल की छात्रा तनिष्का, जिसका परीक्षा केंद्र खजूरी खास का सर्वोदय कन्या विद्यालय था, ने बताया कि पेपर मध्यम रूप से कठिन था। उसने कहा कि सेक्शन D काफी मुश्किल था और उसमें लंबी-लंबी गणनाएं करनी पड़ीं। उसकी सहपाठी कोमल, जिसने उसी केंद्र पर परीक्षा दी थी, ने भी ऐसी ही राय दी और कहा कि सेक्शन D निश्चित रूप से सबसे कठिन हिस्सा था। दोनों छात्राओं ने बताया कि हालाँकि पेपर पूरी तरह से अप्रत्याशित नहीं था, फिर भी परीक्षा के आखिरी घंटे में समय का सही प्रबंधन करना बहुत ज़रूरी हो गया था।




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