CBSE के फैसले से अव्यवस्था फैलेगी, 9वीं में 3 भाषाएं पढ़ने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे छात्र, सुनवाई अगले सप्ताह
सीबीएसई की ओर से 9वीं और 10वीं में थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी लागू की जा रही है, जिस पर छात्रों और अभिभावकों ने ऐतराज जताया है। उनका कहना है कि इस नियम के विद्यार्थियों पर पढ़ाई का बोझ बढ़ सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि वह केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की उस नई नीति को चुनौती देने वाली याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई करेगा जिसके तहत एक जुलाई से नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए तीन भाषाओं की पढ़ाई अनिवार्य की गई है। सीबीएसई की नई नीति के तहत कक्षा 9वीं में छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी जिसमें से 2 भारतीय मूल की भाषाएं होनी चाहिए। तीसरी भाषा (आर 3 ) के तहत इंग्लिश या कोई फॉरेन लैंग्वेज चुन सकेंगे। थ्री लैंग्वेज पॉलिसी के तहत, एक भारतीय और एक विदेशी भाषा के साथ एक क्षेत्रीय भाषा पढ़ाई जानी है। इस फैसले से 9वीं और 10वीं के मिलाकर लगभग 50 लाख बच्चे प्रभावित होंगे। यह नियम एकेडमिक ईयर 2026-27 से लागू हो जाएगा। बोर्ड ने स्कूलों को जारी लिस्ट में से तीसरी भाषा चुनने के लिए 31 मई तक का समय दिया है।
वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख किया। रोहतगी ने कहा, ''यह एक बेहद जरूरी जनहित याचिका (पीआईएल) है। याचिकाकर्ता विद्यार्थी, शिक्षक और अभिभावक हैं। वे सीबीएसई की उस नयी नीति को चुनौती दे रहे हैं जिसके तहत नौवीं कक्षा में दो और भाषाएं अनिवार्य कर दी गई हैं।'
रोहतगी ने मामले को सोमवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आग्रह किया और कहा, 'इस नीति से अव्यवस्था पैदा होगी।' भारत के प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि अगले सप्ताह विविध मामलों की सुनवाई होगी और इस मामले को सूचीबद्ध किया जाएगा।
क्या है सीबीएसई की 3 भाषा पॉलिसी
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा हाल में जारी एक परिपत्र के अनुसार बोर्ड ने नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए कम से कम दो मूल भारतीय भाषाओं समेत तीन भाषाओं की पढ़ाई एक जुलाई से अनिवार्य कर दी है। यह कदम सीबीएसई द्वारा अपनी अध्ययन योजना को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और स्कूल शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या प्रारूप (एनसीएफ-एसई)-2023 के अनुरूप करने की प्रक्रिया का हिस्सा है। यह परिपत्र 15 मई को जारी किया गया था। परिपत्र के अनुसार विदेशी भाषा का चयन करने वाले छात्र दो भारतीय भाषाओं का अध्ययन करने के बाद ही तीसरी भाषा के रूप में या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में इसका चयन कर सकते हैं।
परिपत्र में कहा गया है, 'एक जुलाई, 2026 से कक्षा नौ के लिए तीन भाषाओं (आर1, आर2, आर3) का अध्ययन अनिवार्य होगा जिनमें कम से कम दो मूल भारतीय भाषाएं होनी चाहिए।'
CBSE ने साफ कर दिया है कि कक्षा 10 में तीसरी भाषा यानी R3 का बोर्ड एग्जाम नहीं कराया जाएगा। इस विषय का मूल्यांकन स्कूल स्तर पर ही होगा। स्कूल इंटरनल परीक्षा लेकर अंक देंगे और वही अंक CBSE प्रमाणपत्र में दिखाई देंगे। नई किताबें तैयार होने तक छात्रों को तीसरी भाषा के लिए कक्षा 6 की किताबों से पढ़ाया जाएगा।
क्या है छात्रों की दिक्कतें
- छात्रों को 9वीं क्लास में पहुंचने के बाद अब अचानक से कोई नई भाषा सीखनी पड़ेगी, जो उसने 8वीं तक नहीं पढ़ी है।
- 6-8वीं तक जिन छात्रों ने इंग्लिश, हिंदी के अलावा स्पेनिश, जर्मन जैसी भाषा पढ़ी थी, उनके लिए अब विदेशी भाषा की पढ़ाई करना मुश्किल होगा।
बोर्ड बदलना चाह रहे विद्यार्थी
कई रिपोर्ट्स के मुताबिक काफी विद्यार्थी सीबीएसई के इस फैसले के बाद अपना बोर्ड बदलने की सोच रहे हैं। इस समस्या को लेकर विद्यार्थी करियर काउंसलर से भी संपर्क साथ रहे हैं। सीबीएसई के अलावा दिल्ली- एनसीआर में 'काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशंस (CISCE)' के भी स्कूल हैं और छात्र पूछ रहे हैं कि इस समय इस बोर्ड से जुड़े कौन-से स्कूल में दाखिला हो सकता है।
6वीं क्लास में लागू हो चुका है नियम
बोर्ड ने इससे पहले 9 अप्रैल को एक सकुर्लर जारी कर 6वीं क्लास के लिए थ्री लैंग्वेज पॉलिसी अनिवार्य की थी।




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