Success Story: 2 साल की उम्र में हुआ पोलियो, किसान पिता ने कर्ज लेकर पढ़ाया, अब दिव्यांग बेटा पढ़ेगा IIT में
Sawan Kumar JEE Advanced: बिहार के किसान के बेटे व 70% दिव्यांग सावन कुमार ने विपरीत हालातों को हराकर जेईई एडवांस्ड 2026 की PwD श्रेणी में AIR 22 हासिल की है। अब वे IIT से कंप्यूटर साइंस पढ़ेंगे।

Success Story of Sawan Kumar in JEE Advanced: कहते हैं कि पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। इस कहावत को बिहार के एक बेहद साधारण परिवार से आने वाले दिव्यांग छात्र सावन कुमार ने पूरी तरह सच साबित कर दिखाया है। देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा 'जेईई एडवांस्ड 2026' (JEE Advanced 2026) के नतीजे जारी होने के बाद सावन कुमार की सफलता की कहानी पूरे देश के छात्रों के लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत बन गई है। गंभीर शारीरिक चुनौतियों और भयानक आर्थिक अभावों को मात देते हुए सावन ने साबित कर दिया कि अगर इरादे फौलादी हों, तो कोई भी रुकावट आपका रास्ता नहीं रोक सकती।
70% दिव्यांगता भी नहीं रोक सकी राह; PwD कैटेगरी में हासिल की ऑल इंडिया रैंक 22
सावन कुमार की जिंदगी की शुरुआत ही संघर्षों से हुई थी, जहां से निकल पाना किसी आम इंसान के बस की बात नहीं होती। जब वह महज दो साल के थे, तभी पोलियो की मार ने उनके दोनों पैरों को अपनी चपेट में ले लिया था। इस बीमारी के कारण उनके दोनों पैरों में लगभग 70 प्रतिशत लोकोमोटर डिसएबिलिटी (चलने-फिरने में अक्षमता) विकसित हो गई। आज भी सावन को चलने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ती है, लेकिन उन्होंने इस शारीरिक स्थिति को कभी अपनी कमजोरी या बैसाखी नहीं बनने दिया।
सावन ने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर जेईई एडवांस्ड 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए पीडब्ल्यूडी (PwD) श्रेणी में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 22 हासिल की है। इसके साथ ही उन्होंने ओबीसी-एनसीएल पीडब्ल्यूडी (OBC-NCL PwD) कैटेगरी में ऑल इंडिया रैंक 9 और कॉमन रैंक लिस्ट (CRL) में 17,532वां स्थान प्राप्त किया है। सावन का मानना है कि जीवन में आने वाली शारीरिक चुनौतियां कभी किसी व्यक्ति के दिमाग की ताकत और उसकी आंतरिक क्षमता को सीमित नहीं कर सकतीं।
बंटाईदार किसान हैं पिता; सिमुलतला से हुई शुरुआती पढ़ाई
सावन कुमार बिहार के समस्तीपुर जिले के विभूतिपुर गांव के रहने वाले हैं। वह एक बेहद साधारण और गरीब पृष्ठभूमि से आते हैं। उनके पिता प्रभु राय के पास अपनी कोई खेती योग्य भूमि नहीं है, वे दूसरों के खेतों को बटाई पर लेकर खेती करते हैं और इसी सीमित आय से पूरे परिवार का पेट पालते हैं। वहीं उनकी मां प्रमिला देवी एक गृहिणी हैं। सावन बचपन से ही पढ़ाई में होशियार थे। उन्होंने एक प्रवेश परीक्षा पास कर बिहार के सुप्रसिद्ध सिमुलतला आवासीय विद्यालय, जमुई में दाखिला लिया, जहां उन्हें कक्षा 6 से 10 तक पूरी तरह निशुल्क शिक्षा मिली।
कोटा ने संवारे सपने
इसके बाद उन्होंने बिहार बोर्ड की 10वीं परीक्षा की राज्य मेरिट लिस्ट में 10वां स्थान हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। बेटे के आईआईटी में पढ़ने के सपने को पूरा करने के लिए परिवार ने कर्ज लेकर और तंगहाली से जूझते हुए उसे राजस्थान के कोटा भेजा। कोटा के कोचिंग इंस्टीट्यूट ने सावन के जज्बे और परिस्थितियों को देखते हुए उनकी कोचिंग फीस में 80 प्रतिशत की भारी छूट दी। इससे पहले सावन ने जेईई मेन 2026 में भी 99.1473246 परसेंटाइल स्कोर करके अपनी मजबूत नींव का परिचय दे दिया था।
अब आईआईटी से कंप्यूटर साइंस पढ़ने का है लक्ष्य
अब देश के टॉप आईआईटी संस्थानों (जैसे आईआईटी बॉम्बे, दिल्ली या मद्रास) से कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग (CSE) की पढ़ाई करना चाहते हैं। उनका यह सफर केवल बीटेक की डिग्री तक ही सीमित नहीं है; सावन का अंतिम लक्ष्य भविष्य में सिविल सर्विसेज (UPSC) की परीक्षा पास करना है ताकि वे प्रशासनिक अधिकारी बनकर समाज के गरीब, असहाय और जरूरतमंद तबके की सेवा कर सकें। उनकी यह ऐतिहासिक कामयाबी न केवल उनके माता-पिता के त्याग का फल है, बल्कि उन लाखों विद्यार्थियों के लिए भी एक मिसाल है जो छोटी-छोटी दिक्कतों के आगे हार मान जाते हैं।




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