UPPSC-PCS Result 2024: स्कूल टीचर अनामिका मिश्रा को चौथे प्रयास में मिली चौथी रैंक, अब बनेंगी SDM
परिषदीय विद्यालय की शिक्षिका अनामिका मिश्रा ने अपनी मेहनत ने मिसाल पेश की है। उन्हें चौथे प्रयास में यूपी पीसीएस 2024 में चौथी रैंक हासिल हुई है।

कहते हैं कि अगर इरादे फौलादी हों और लक्ष्य पर नजरें टिकी हों तो राह की हर बाधा बौनी हो जाती है। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) द्वारा घोषित पीसीएस-2024 के परिणामों ने एक बार फिर इस बात को साबित कर दिया है। इस बार की सफलता की कहानियों में चमकता हुआ नाम अनामिका मिश्रा का भी है। अयोध्या की रहने वाली अनामिका ने न सिर्फ इस कठिन परीक्षा को पास किया बल्कि चौथे प्रयास में पूरे प्रदेश में चौथी रैंक हासिल कर अपनी मेधा का लोहा मनवाया है।
शिक्षण कार्य के साथ तय किया एसडीएम तक का सफर
अनामिका मिश्रा की यह सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि वह पहले से ही सरकारी सेवा में रहकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रही हैं। अनामिका सहायक अध्यापक भर्ती के माध्यम से परिषदीय प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका के पद पर चयनित हुई थीं। वर्तमान में उनकी तैनाती बस्ती जिले में है। एक सरकारी शिक्षिका की जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ पीसीएस जैसी उच्च स्तरीय परीक्षा के लिए समय निकालना और फिर टॉप-5 में जगह बनाना उनकी कड़ी मेहनत और समय प्रबंधन की बेहतरीन मिसाल है।
अनामिका का परिवार भी शिक्षा और सेवा से जुड़ा है। मूल रूप से अयोध्या के साकेतपुरी की रहने वाली अनामिका के पति आकाश कुमार पांडेय भी सरकारी शिक्षक हैं। एक शिक्षक परिवार से ताल्लुक रखने वाली अनामिका ने अपनी सफलता से यह संदेश दिया है कि नौकरी में रहते हुए भी ऊंचे सपनों को हकीकत में बदला जा सकता है।
छोटे शहरों के मेधावियों ने मारी बाजी
पीसीएस-2024 के परिणाम इस मायने में ऐतिहासिक रहे हैं कि इस बार टॉप-10 की लिस्ट में 'छोटे शहरों' का दबदबा रहा है। दिल्ली की टॉपर नेहा पांचाल को छोड़ दिया जाए, तो शीर्ष नौ मेधावियों में आठ ऐसे हैं जो छोटे जिलों या कस्बों से ताल्लुक रखते हैं। अनामिका मिश्रा जहां चौथे स्थान पर रहीं, वहीं रायबरेली की अनन्या त्रिवेदी ने दूसरी और बिजनौर के अभय प्रताप सिंह ने तीसरी रैंक हासिल की है।
अनामिका के साथ-साथ अयोध्या के लिए यह गर्व का पल है क्योंकि इस बार जिले से 12 से अधिक अभ्यर्थियों का चयन विभिन्न पदों पर हुआ है। इसके अलावा हरदोई की दीप्ति वर्मा, अंबेडकरनगर की पूजा तिवारी और आजमगढ़ के अनुराग पांडेय जैसे युवाओं ने भी टॉप-10 में अपनी जगह पक्की कर यह साबित किया कि अब प्रतिभा किसी बड़े मेट्रो शहर की मोहताज नहीं है।
टायर पंक्चर बनाने वाली बेटी का कमाल
अनामिका मिश्रा की सफलता के साथ ही इस रिजल्ट में गायत्री वर्मा जैसी प्रेरक कहानियां भी सामने आई हैं। बुलंदशहर की गायत्री ने 210वीं रैंक हासिल की है। उनके पिता राजकुमार वर्मा टायर पंक्चर बनाने और चाय बेचने का काम करते हैं। ऐसी कहानियां यह बताती हैं कि उत्तर प्रदेश का सामाजिक और प्रशासनिक ढांचा अब बदल रहा है, जहां एक चाय वाले की बेटी और एक सरकारी शिक्षिका अपनी मेहनत के दम पर सत्ता के गलियारों में नीति-निर्धारक बनने की ओर अग्रसर हैं।




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