NTA-CBSE की गलतियों से टूट रहा भरोसा, धर्मेंद्र प्रधान दें इस्तीफा; 73 रिटायर्ड अधिकारियों ने दिए ये सुझाव
देश के 73 रिटायर्ड सरकारी अधिकारियों ने NTA और CBSE की परीक्षा और कॉपी जांच प्रणाली की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि NEET-UG पेपर लीक और CBSE की नई डिजिटल कॉपी जांच व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठे हैं, जिससे छात्रों और अभिभावकों का भरोसा कमजोर हुआ है।

देश के 73 रिटायर्ड सरकारी अधिकारियों ने NTA और CBSE की परीक्षा व कॉपी जांच प्रणाली की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि NEET-UG पेपर लीक और CBSE की नई डिजिटल कॉपी जांच व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठे हैं, जिससे छात्रों और अभिभावकों का भरोसा कमजोर हुआ है। संवैधानिक आचरण समूह (CCG) की ओर से जारी एक खुले पत्र में इन अधिकारियों ने कहा कि परीक्षा से जुड़ी गड़बड़ियां बार-बार सामने आ रही हैं। इसलिए NTA और CBSE की कार्यप्रणाली की स्वतंत्र और समयबद्ध समीक्षा होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी समस्याएं न हों।
23 लाख से अधिक छात्र प्रभावित
उन्होंने कहा कि NEET-UG पेपर लीक मामले से 23 लाख से ज्यादा छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ। पूर्व नौकरशाहों का आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में मौजूद कमियों के कारण कुछ लोगों को परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र मिल जाता है, जिससे मेहनत करने वाले छात्रों के साथ अन्याय होता है और परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।
ये पूर्व अधिकारी हैं शामिल
एक खुले पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले 73 पूर्व नौकरशाहों में पूर्व विदेश सचिव शिवशंकर मेनन, पूर्व स्वास्थ्य सचिव के सुजाता राव, पंजाब पुलिस के पूर्व प्रमुख जूलियो रिबेरो, पूर्व निर्वाचन आयुक्त अशोक लवासा और दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग जैसे पूर्व वरिष्ठ नौकरशाहों के नाम शामिल हैं।
ऑन-स्क्रीन मार्किंग पर पूर्व अधिकारियों का सवाल
पूर्व अधिकारियों ने CBSE की कक्षा 12 बोर्ड परीक्षाओं में लागू की गई ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) डिजिटल कॉपी जांच प्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि इस नई व्यवस्था को लागू करने के दौरान कई तकनीकी समस्याएं सामने आईं, जैसे पोर्टल का बार-बार बंद होना, कुछ उत्तर पन्नों का गायब होना, कॉपियों का आपस में गड़बड़ हो जाना और नंबर देने में गलतियां होना। ये समस्याएं खासकर फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स जैसे विषयों में ज्यादा देखने को मिलीं। पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि नई प्रणाली को जल्दबाजी में लागू करने के कारण छात्रों के परिणाम प्रभावित हुए, जिससे पिछले वर्षों की तुलना में पास होने वाले छात्रों का प्रतिशत और टॉप अंक दोनों कम हो गए।
क्या है पूर्व नौकरशाहों की मांग
पूर्व अधिकारियों ने सरकार से मांग की है कि NTA और CBSE की मूल्यांकन (कॉपी जांच) प्रणाली की किसी स्वतंत्र न्यायिक समिति या विशेषज्ञों के समूह से जांच कराई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रश्नपत्र लीक रोकने के लिए आधुनिक सुरक्षा तकनीक और मजबूत डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाए। साथ ही, पूरे देश में किसी भी नई डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को लागू करने से पहले उसकी किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच (ऑडिट) कराई जाए।
धर्मेंद्र प्रदान के इस्तीफे की मांग
पत्र में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से भी इन कथित गड़बड़ियों की जिम्मेदारी लेने की मांग की गई है। इसके लिए उन्होंने उन उदाहरणों का हवाला दिया, जब बड़े सार्वजनिक मामलों में जिम्मेदारी लेते हुए नेताओं ने इस्तीफा दिया था। इनमें लाल बहादुर शास्त्री (1956), माधवराव सिंधिंया (1993), नीतीश कुमार (1999) और शिवराज पाटिल (2008) के नाम शामिल हैं। ऐसे में मौजूदा खामियों के लिए भी अब केंद्रीय शिक्षा मंत्री की ही जवाबदेही बनती है।




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