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टाटा संस का जल्द आएगा IPO? शेयरहोल्डर्स का भारी दबाव, क्या कहते हैं नियम

Tata Sons IPO: टाटा संस अपनी लिस्टिंग से लगातार बच रहा है। जोकि कंपनी के दूसरे सबसे बड़े शेयर होल्डर्स ने पब्लिक में आकर टाटा संस की लिस्टिंग की डिमांड की है। 

Sat, 16 May 2026 02:29 PMTarun Pratap Singh रॉयटर्स
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टाटा संस का जल्द आएगा IPO? शेयरहोल्डर्स का भारी दबाव, क्या कहते हैं नियम

Tata Sons IPO: टाटा संस के पास कुल 31 कंपनियां है। जिसमें टीसीएस, टाटा मोटर्स और टाटा स्टील जैसी दिग्गज कंपनियां भी शामिल हैं। लेकिन फिर भी टाटा संस शेयर बाजार में खुद की लिस्टिंग नहीं चाह रहा है। आप लम्बे समय से सुनते और पढ़ते आ रहे हैं होंगे कि टाटा संस आईपीओ या स्टॉक मार्केट में लिस्टिंग से दूर हट रहा है। जब एक तरफ से कई नए स्टार्टअप जल्द से जल्द शेयर बाजार में लिस्टिंग के लिए उतावले हैं तब यह दिग्गज कंपनी उससे बच क्यों रही हैं। जबकि टाटा संस के दूसरे शेयरहोल्डर्स लिस्टिंग को लेकर दबाव बना रहे हैं। आइए समझने का प्रयास करते हैं क्या है मामला?

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मौजूदा समय में टाट संस की लिस्टिंग नहीं हुई है। लेकिन टाटा संस के दूसरे सबसे बड़े निवेशक शापूरजी पालोनजी ग्रुप की तरफ से लिस्टिंग के समर्थन में बयान आ गया है। कंपनी ने RBI से लिस्टिंग से दूर रहने की गुहार लगाई है।

टाटा ग्रुप का स्ट्रक्चर कैसा है?

108 साल पुराने इस समूह का संचालन टाटा ट्रस्टस की तरफ से किया जाता है। मौजूदा समय में टाटा ट्रस्टस की टाटा संस में कुल होल्डिंग 66 प्रतिशत की है। जबकि शापूरजी पालोनजी ग्रुप के पास 18.40 प्रतिशत हिस्सा है।

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टाटा ट्रस्ट्स में कुल 13 संस्थाएं शामिल हैं। जिसमें से 7 टाटा संस में डायरेक्ट हिस्सेदारी रखते हैं। टाटा ट्रस्ट के बोर्ड में 6 ट्रस्टी होते हैं जो इन्हीं सस्थाओं से चुने जाते हैं। मौजूदा समय में नोएल टाटा, टाटा ट्र्स्ट्स के चेयकमैन और टाटा संस के डायरेक्टर हैं।

टाटा संस की लिस्टिंग के लिए कौन बना रहा है दबाव

मौजूदा समय में टाटा ट्रस्ट के दो सदस्य वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह ने टाटा संस के लिस्टिंग को कई इंटरव्यू में खुले तौर पर सपोर्ट किया है। उनका कहना है कि सेमीकंडक्टर जैसे नए एरिया में इनवेस्टमेंट के लिए बड़े फंड की आवश्यकता होगी। आंतरिक स्तर इतना बड़ा फंड इकट्ठा नहीं किया जा सकता है। बता दें, SP ग्रुप भी टाटा संस की लिस्टिंग चाहता है।

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क्या कहते हैं RBI के नियम

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के मौजूदा नियमों की वजह से टाटा संस को NBFC का दर्जा मिला है। पिछले महीने आए संशोधित नियमों के अनुसार जिन कंपनियों का एसेट 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक होगा उनके लिए लिस्टिंग अनिवार्य है। मार्च 2025 के आंकड़ों के अनुसार टाटा संस की कुल होल्डिंग्स 1.75 ट्रिलियन डॉलर थी। हालांकि, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पास लिस्टिंग से बचे रहने की छूट देने का अधिकार है। टाटा संस ने केंद्रीय बैंक से लिस्टिंग ना करने को लेकर अपील की है।

एक्सपर्ट्स की मानें तो टाटा संस को लिस्टिंग से दूर रख पाना नए नियमों में और कठिन हो गया है। बता दें, नोएल टाटा प्राइवेट बातचीत में लगातार टाटा संस की लिस्टिंग का विरोध कर रहे हैं।

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