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हर पोर्टफोलियो में क्यों जरूरी है सोना? क्या कह रहा 20 साल का गोल्ड का प्रदर्शन?

गोल्ड पोर्टफोलियो में शामिल होने पर जोखिम को कम करता है, उतार-चढ़ाव को घटाता है और कुल रिटर्न को ज्यादा स्थिर बनाता है। यह हर साल शेयरों से बेहतर प्रदर्शन करने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें संतुलित करने के लिए होता है।

Tue, 21 April 2026 02:34 PMDrigraj Madheshia लाइव हिन्दुस्तान
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हर पोर्टफोलियो में क्यों जरूरी है सोना? क्या कह रहा 20 साल का गोल्ड का प्रदर्शन?

गोल्ड आपके पोर्टफोलियो के लिए क्यों जरूरी है? पोर्टफोलियो में सोना कितना होना चाहिए? जैसे कई तरह के सवाल अगर आपके मन में हैं तो यहां उनका जवाब है। पिछले एक साल में सोने ने करीब 62% का शानदार रिटर्न दिया है। यह आपको बेहद आकर्षक लग सकता है, लेकिन असली कहानी सिर्फ रिटर्न की नहीं है। असल में सोने की ताकत तब दिखती है, जब इसे आपके पूरे इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो के साथ जोड़ा जाता है।

सोना रिटर्न तो देता है, लेकिन लगातार नहीं

ऊपरी तौर पर देखें तो सोने ने कई बार जबरदस्त रिटर्न दिए हैं। कभी-कभी एक साल में 108% तक, लेकिन लंबी अवधि (10-20 साल) में इसका औसत रिटर्न करीब 14-18% के आसपास रहता है। इसके साथ जोखिम भी जुड़ा है। सोने में 20% तक की सालाना गिरावट और 29% तक की बड़ी गिरावट देखी जा चुकी है। यानी यह हमेशा ऊपर जाने वाला निवेश नहीं है, बल्कि घटनाओं और हालात पर निर्भर करता है।

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शेयर में रिटर्न बहुत है पर रिस्क भी ज्यादा है

लंबी अवधि में शेयर ही सबसे ज्यादा दौलत बनाते हैं। भारत में शेयर मार्केट ने औसतन 11-13% और अमेरिका में 15-18% तक रिटर्न दिया है, लेकिन इसके साथ बड़ा जोखिम भी आता है। भारतीय बाजार में अधिकतम गिरावट 59% तक गिरावट रही। पिछले एक साल में निफ्टी 50 में 4 पर्सेंट कीी गिरावट रही। हालांकि, 10 साल में इसने 13 प्रतिशत का रिटर्न दिया। यानी शेयरों में रिटर्न ज्यादा है, लेकिन उतार-चढ़ाव भी उतना ही तेज है।

डेट देता है स्थिरता, लेकिन ग्रोथ सीमित

डेट (कर्ज वाले निवेश) पोर्टफोलियो को स्थिरता देते हैं। इनका रिटर्न आमतौर पर 6-8% रहता है और गिरावट बहुत कम होती है, लेकिन यह तेजी से दौलत बनाने में ज्यादा मदद नहीं करते। इसलिए इन्हें सुरक्षा के तौर पर देखा जाता है।

सोना रखते ही बदल जाता है पोर्टफोलियो का खेल

जब आप पारंपरिक 70% इक्विटी और 30% डेट वाले पोर्टफोलियो में 10 से 15% गोल्ड ऐड करते हैं, तो नतीजे बेहतर हो जाते हैं। रिटर्न करीब 11% से बढ़कर 13% तक पहुंच सकता है, जबकि जोखिम में कोई बड़ा इजाफा नहीं होता। इसका मतलब है कि सोना रिस्क बढ़ाए बिना रिटर्न को बेहतर बना सकता है।

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सोने की सबसे बड़ी ताकत: गिरावट में सुरक्षा

सोने की असली ताकत तब दिखती है जब बाजार गिरता है। जहां एक सामान्य पोर्टफोलियो में 36% तक की सालाना गिरावट देखी गई, वहीं सोना जोड़ने से यह गिरावट काफी कम हो जाती है। कुछ मामलों में यह सिर्फ 8% तक सीमित रह जाती है। यानी जब शेयर गिरते हैं, तब सोना आपके निवेश को संभालने का काम करता है।

पोर्टफोलियो में कितना सोना होना चाहिए?

विशेषज्ञों के अनुसार 10-15% सोना बेसिक डाइवर्सिफिकेशन के लिए पर्याप्त है। अगर पोर्टफोलियो में 20-25% सोना रखते हैं तो बेहतर जोखिम-समायोजित रिटर्न की सभावना है। अगर 30% से ज्यादा सोना रखते हैं तो सुरक्षा तो बढ़ेगी, लेकिन ग्रोथ धीमी हो सकती है।इसलिए सोने को मुख्य निवेश नहीं, बल्कि सपोर्टिंग एसेट के रूप में रखना चाहिए।

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पोर्टफोलियो में सोना क्यों जरूरी है?

सोना न तो हर साल शेयरों से ज्यादा रिटर्न देता है और न ही डेट की तरह नियमित आय देता है, लेकिन जब इसे सही अनुपात में पोर्टफोलियो में शामिल किया जाता है, तो यह पूरे निवेश को मजबूत बना देता है। यह गिरावट कम करता है, रिटर्न को स्थिर बनाता है और लंबी अवधि में बेहतर संतुलन देता है।

Disclaimer: यह जानकारी केवल शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। निवेश से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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