महंगा होने वाला है हेल्थ इंश्योरेंस, 10–15% तक बढ़ सकते हैं प्रीमियम
हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर में प्रीमियम बढ़ोतरी अब एक अस्थायी नहीं बल्कि लॉन्ग ट्रेंड बनता दिख रहा है। मेडिकल महंगाई, बढ़ते क्लेम और बदलते रिस्क प्रोफाइल के चलते आने वाले वर्षों में भी प्रीमियम बढ़ते रह सकते हैं।

भारत में हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी रखने वालों के लिए यह खबर थोड़े परेशान करने वाली है। आने वाले समय में बीमा थोड़ा महंगा साबित हो सकता है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगले 12 से 18 महीनों में हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम में 10–15% तक बढ़ोतरी हो सकती है। यह बढ़ोतरी एक साथ नहीं बल्कि रिन्यूअल के समय धीरे-धीरे लागू की जाएगी।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि उम्र, शहर, सम इंश्योर्ड और क्लेम हिस्ट्री के आधार पर यह बढ़ोतरी अलग-अलग हो सकती है। खासकर मेट्रो शहरों में रहने वाले और सीनियर सिटीजन को ज्यादा असर झेलना पड़ सकता है।
क्यों महंगा हो सकता है हेल्थ इंश्योरेंस
इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह तेजी से बढ़ती महंगाई है। भारत में हेल्थकेयर लागत हर साल करीब 14–15% की दर से बढ़ रही है, जो सामान्य महंगाई से कहीं ज्यादा है। अस्पतालों के बढ़ते चार्ज, महंगे इलाज, एडवांस डायग्नोस्टिक टेस्ट और पोस्ट-कोविड बढ़े क्लेम्स ने इंश्योरेंस कंपनियों पर दबाव बढ़ा दिया है। इसके चलते कंपनियां अब प्रीमियम बढ़ाने को मजबूर हैं।
दिल, कैंसर जैसी बीमारियों का असर
भारत में तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी और दिल, कैंसर जैसी लाइफस्टाइल बीमारियों के मामलों में इजाफा भी प्रीमियम बढ़ने की बड़ी वजह है। इसके अलावा, पब्लिक हेल्थ सिस्टम की सीमाओं के कारण लोग निजी अस्पतालों पर ज्यादा निर्भर हो रहे हैं, जिससे इलाज का खर्च और बढ़ रहा है।
क्लेम रेशियो 90% के पार , कंपनियों पर बढ़ा दबाव
इंडस्ट्री डेटा के मुताबिक, हाल के वर्षों में क्लेम रेशियो 90% के पार पहुंच चुका है। इसका मतलब है कि कंपनियां जितना प्रीमियम ले रही हैं, उसका बड़ा हिस्सा क्लेम में चला जा रहा है। यही वजह है कि इंश्योरेंस कंपनियां अब कीमतों में “स्ट्रक्चरल रीसेट” कर रही हैं, यानी लंबे समय के लिए प्रीमियम बढ़ाने की दिशा में कदम उठा रही हैं।
पिछले कुछ सालों में पहले ही बढ़ चुके हैं प्रीमियम
हाल के आंकड़े बताते हैं कि वित्तवर्ष 2023 से 2025 के बीच इंडिविजुअल हेल्थ पॉलिसी प्रीमियम करीब 23% तक बढ़ चुके हैं। वहीं फैमिली फ्लोटर प्लान की औसत लागत 2021 में जहां करीब ₹15,000 थी, वह 2025 में बढ़कर ₹22,000 से ज्यादा हो गई है यानी करीब 46% की बढ़ोतरी।
क्या करें पॉलिसीहोल्डर्स?
इस बढ़ती महंगाई के बीच पॉलिसीहोल्डर्स के लिए सही रणनीति जरूरी है। समय पर पॉलिसी रिन्यू करना, पर्याप्त कवर बनाए रखना और जरूरत के अनुसार प्लान चुनना बेहद अहम हो जाता है। कम कवर लेने या पॉलिसी छोड़ने से मेडिकल इमरजेंसी में जेब से ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है, जिसे “अंडरइंश्योरेंस” का खतरा कहा जाता है।




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