यूपी में स्मार्ट मीटर रोलबैक से किसे लगेगा झटका, किस पर होगा बड़ा असर?
Smart Meter News: योगी सरकार ने बढ़े हुए बिल और तकनीकी गड़बड़ियों को लेकर उपभोक्ताओं के विरोध के बाद प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने को अनिवार्य वाला नियम वापस ले लिया है। इस रोलबैक से किसे सबसे अधिक झटका लगेगा, आइए एक्सपर्ट से समझें…

उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर के खिलाफ बढ़ते विरोध और रोलबैक का असर अब पूरे उद्योग पर पड़ने वाला है। हालांकि, उपभोक्ताओं में जागरूकता और विश्वास बहाल करके इस मुश्किल को टाला जा सकता है। यह बात किम्बल प्राइवेट लिमिटेड में मार्केटिंग, ब्रांड और थॉट लीडरशिप की प्रमुख प्रज्ञा पल्लवी ने एएनआई से बातचीत में कही।
रोलबैक से इंडस्ट्री पर क्या असर होगा?
प्रज्ञा पल्लवी ने साफ कहा, “क्या इससे इंडस्ट्री प्रभावित होगी? हां, यह निश्चित रूप से प्रभावित करेगा।” उन्होंने आगे कहा कि अतीत में भी इस तरह के विरोध हुए हैं, लेकिन उद्योग ने विश्वास जीतकर काम जारी रखा है। वह मानती हैं कि स्मार्ट मीटर एक सिद्ध तकनीक है और धीरे-धीरे इसे स्वीकार किया जाएगा।
योगी सरकार ने पीछे खींचे कदम
बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार ने बढ़े हुए बिल और तकनीकी गड़बड़ियों को लेकर उपभोक्ताओं के विरोध के बाद प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने को अनिवार्य वाला नियम वापस ले लिया है। अब राज्य में फिर से पोस्टपेड बिलिंग लागू कर दी गई है और जीरो बैलेंस पर बिजली कनेक्शन काटने पर रोक लगा दी गई है।
क्यों हो रहा स्मार्ट मीटर का विरोध ?
प्रज्ञा के मुताबिक, उपभोक्ताओं के विरोध की सबसे बड़ी वजह जागरूकता की कमी और तकनीक को सही से न समझ पाना है। लोगों के मन में यह डर है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिल ज्यादा आता है। उन्होंने सुझाव दिया, “इन सवालों को और सावधानी से और आम भाषा में समझाने की जरूरत है। जागरूकता सिर्फ यूपी के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए जरूरी है।”
समाधान क्या है?
पल्लवी ने जोर देकर कहा कि उद्योग और बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को चाहिए कि आखिरी छोर तक संचार (लास्ट-माइल कम्युनिकेशन) मजबूत करें। उपभोक्ताओं को प्रीपेड बिलिंग, बिल कैलकुलेशन और मोबाइल ऐप के इस्तेमाल की बारीकियां समझाएं। उपभोक्ताओं को प्रोएक्टिव तरीके से जोड़ें ताकि वे कंफ्यूज न हों।
कैसे बदलेगा नजरिया
प्रज्ञा पल्लवी ने स्मार्ट मीटर की तुलना स्मार्टफोन से करते हुए कहा कि जिस तरह लोगों ने स्मार्टफोन की उपयोगिता समझने के बाद उसे अपनाया, वैसे ही स्मार्ट मीटर के साथ होगा। एक बार लोगों को इसके फायदे समझ में आ गए, तो विश्वास अपने आप बढ़ जाएगा।
उपभोक्ता बनेगा उत्पादक
बेहतरीन पहलू यह है कि स्मार्ट मीटरिंग के जरिए उपभोक्ता प्रोस्यूमर (prosumer) बन सकता है। यानी वह खुद अपने घर की छत पर सोलर सिस्टम लगाकर बिजली पैदा कर सकता है और उसे ग्रिड को बेच सकता है। यह खासतौर पर कृषि प्रधान राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
सरकार और उद्योग की पहल क्या है: पल्लवी के अनुसार, स्मार्ट मीटरिंग कंपनियों और यूटिलिटीज ने हाल ही में देशव्यापी जागरूकता अभियान चलाए हैं, जिसमें घर-घर जाकर लोगों को बिलिंग सिस्टम, स्मार्ट मीटर के फायदे और मोबाइल ऐप के इस्तेमाल की जानकारी दी गई।
लंबी अवधि में फायदे: गौरतलब है कि स्मार्ट मीटर सिर्फ एक बिलिंग डिवाइस नहीं है, बल्कि यह एनर्जी एफिशिएंसी, सस्टेनेबिलिटी और जलवायु परिवर्तन से निपटने के वैश्विक लक्ष्यों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाता है।




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