कच्चे तेल की उछलती कीमतों का असर किस-किस सेक्टर पर पड़ेगा?
जब भी कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आती है, तो इसकी लपटें कई उद्योगों को अपनी चपेट में ले लेती हैं। एविएशन से लेकर पेंट उद्योग तक इसकी चपेट में आएंगे। रसायन और प्लास्टिक निर्माताओं को भी अपने फीडस्टॉक (बुनियादी कच्चे माल) के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ती है।

जब भी कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आती है, तो इसकी लपटें कई उद्योगों को अपनी चपेट में ले लेती हैं। एविएशन सेक्टर इस मामले में सबसे अधिक संवेदनशील है, क्योंकि एक एयरलाइन की कुल परिचालन लागत का लगभग 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ ईंधन पर खर्च हो जाता है। इस दबाव के कारण उनके मुनाफे पर संकट आ जाता है और अक्सर हवाई किराए में बढ़ोतरी करनी पड़ती है।
पेंट उद्योग
पेंट कंपनियों पर भी इसकी सीधी मार पड़ती है, क्योंकि उनके कच्चे माल का बड़ा हिस्सा पेट्रोलियम से बनता है। इससे उनकी इनपुट लागत आसमान छूने लगती है और मुनाफे की गुंजाइश कम हो जाती है। रसायन और प्लास्टिक निर्माताओं को भी अपने फीडस्टॉक (बुनियादी कच्चे माल) के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ती है।
टायर उद्योग
इसी तरह, टायर उद्योग भी पेट्रोलियम से बनने वाले डेरिवेटिव पर निर्भर है, जिससे उनकी उत्पादन लागत में इजाफा होता है। वहीं, लॉजिस्टिक्स और परिवहन कंपनियां डीजल की बढ़ती कीमतों से बुरी तरह प्रभावित होती हैं, जिससे उनका माल ढुलाई खर्च बढ़ जाता है और उनके मार्जिन पर असर पड़ता है। यहां तक कि सीमेंट उत्पादकों को भी ऊर्जा की बढ़ती लागत का सामना करना पड़ता है, क्योंकि यह उद्योग पेट कोक जैसे ईंधन पर बहुत अधिक निर्भर करता है।
कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां मध्य पूर्व में जारी युद्ध ने आपूर्ति बाधित होने का खतरा पैदा कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ G7 देशों द्वारा अपने रणनीतिक भंडार से तेल जारी करने की संभावित योजना की खबरों ने कीमतों पर कुछ दबाव बनाया है। ब्रेंट क्रूड सोमवार को 119 डॉलर प्रति बैरल के शुरुआती उच्च स्तर से नीचे आकर लगभग 108 डॉलर पर आ गया, हालांकि यह अभी भी 17 प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) में भी गिरावट दर्ज की गई।
भंडार से तेल जारी करने की तैयारी
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, G7 के वित्त मंत्री अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के सहयोग से सोमवार को संयुक्त रूप से अपने तेल भंडार से तेल जारी करने पर चर्चा कर सकते हैं। अमेरिका सहित तीन G7 देशों ने इस विचार का समर्थन किया है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि लगभग 300 से 400 मिलियन बैरल तेल संयुक्त रूप से जारी किया जा सकता है, जो उनके कुल भंडार का 30 प्रतिशत तक है।
मध्य पूर्व संकट ने बढ़ाई महंगाई की मार
हालांकि, बाजार से गर्मी निकालने की ये कोशिशें मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के सामने फिलहाल कमजोर पड़ती दिख रही हैं। एक सप्ताह पहले अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद युद्ध विराम के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। दुनिया के पांचवें हिस्से तेल की आपूर्ति करने वाली होर्मुज से होने वाला शिपिंग बंद हो गया है।




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