युद्ध का असर: कच्चा तेल 100 डॉलर के पार, डॉलर की मजूबती से सोना हुआ सस्ता
War Impacts: मजबूत होती अमेरिकी डॉलर और बढ़ती महंगाई की आशंकाओं के चलते सोने की कीमतों में गिरावट आई है। यह सब तब हुआ है ,जब मिडिल ईस्ट में जंग अब दूसरे हफ्ते में दाखिल हो चुकी है और कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुकी हैं।

मजबूत होती अमेरिकी डॉलर और बढ़ती महंगाई की आशंकाओं के चलते सोने की कीमतों में गिरावट आई है। यह सब तब हुआ है ,जब मिडिल ईस्ट में जंग अब दूसरे हफ्ते में दाखिल हो चुकी है और कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुकी हैं। ब्लूमबर्ग के मुताबिक ब्रेंट 28% बढ़कर $118.73 प्रति बैरल हो गया, जो अप्रैल 2020 के बाद सबसे बड़ी इंट्राडे तेज़ी है, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 31% उछला।
सिंगापुर में सुबह 6:56 बजे स्पॉट गोल्ड 0.9% गिरकर 5,124.48 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। चांदी 1.6% गिरकर 83.22 डॉलर प्रति औंस रही। प्लैटिनम 3% से अधिक टूटा और पैलेडियम 0.9% लुढ़क गया। ब्लूमबर्ग डॉलर स्पॉट इंडेक्स में 0.4% की तेजी आई, जबकि पिछले हफ्ते इसमें 1.3% की बढ़त हुई थी।
कारोबार की शुरुआत में सोना गिरकर 5,120 डॉलर प्रति औंस के आसपास आ गया। इससे पहले, एक महीने से अधिक समय में सोने ने अपना पहला साप्ताहिक घाटा दर्ज किया था। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण बड़े तेल उत्पादक देशों ने अपना उत्पादन घटा दिया है। वहीं, डॉलर इंडेक्स भी 0.4% चढ़ गया।
तेल के दाम ने बढ़ाई फेडरल रिजर्व की मुश्किल
सोने पर दबाव इसलिए भी बना है क्योंकि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने अमेरिका में महंगाई की आशंका को और हवा दे दी है। इस वजह से यह संभावना बढ़ गई है कि फेडरल रिजर्व (अमेरिकी केंद्रीय बैंक) ब्याज दरों में कटौती करने के बजाय उन्हें यथावत रख सकता है या फिर बढ़ा भी सकता है। आमतौर पर, बढ़ी हुई ब्याज दरें और मजबूत डॉलर, सोने-चांदी जैसी कीमती धातुओं के लिए नकारात्मक संकेत माने जाते हैं। दूसरी तरफ, दुनिया भर के शेयर बाजारों में आ रही भारी गिरावट के बीच निवेशकों ने सोने को नकदी जुटाने के एक जरिए के तौर पर भी इस्तेमाल किया है।
हालांकि, कारोबार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है और तेजी की रफ्तार थम गई है, फिर भी सोने ने इस साल अब तक करीब 20% का रिटर्न दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा वैश्विक व्यापार और भू-राजनीति में उथल-पुथल मचाने के साथ-साथ फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता पर खतरे ने सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों को समर्थन दिया है।
मिडिल ईस्ट युद्ध का बढ़ता असर
मिडिल ईस्ट में जंग अब अपने 10वें दिन में प्रवेश कर चुकी है। सप्ताहांत में, तेहरान ने अपना नया सर्वोच्च नेता चुन लिया और फारस की खाड़ी क्षेत्र में हमले जारी रखे। वहीं, इजराइल ने ईरान की राजधानी में ईंधन डिपो पर हमला किया और इस्लामिक गणराज्य के पावर ग्रिड को निशाना बनाने की धमकी दी है। ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों और होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली शिपिंग रुक जाने से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं।




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