बाजार में हाहाकार के बीच 8% टूट गया यह चर्चित शेयर, 15 रुपये के नीचे भाव
स्मॉल फाइनेंस कंपनियों के शेयर भी शुक्रवार को बुरी तरह क्रैश हुए। इनमें से एक कंपनी उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक भी है। इस कंपनी के शेयर में करीब 8 पर्सेंट की गिरावट आई और भाव 13.74 रुपये के निचले स्तर पर आ गया।
Utkarsh Small Finance Bank share: बाजार में मचे हाहाकार के बीच स्मॉल फाइनेंस कंपनियों के शेयर भी शुक्रवार को बुरी तरह क्रैश हुए। इनमें से एक कंपनी उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक भी है। इस कंपनी के शेयर में करीब 8 पर्सेंट की गिरावट आई और भाव 13.74 रुपये के निचले स्तर पर आ गया। शेयर के 52 हफ्ते का हाई और लो 23.73 रुपये और 12.98 रुपये है।
होने वाली है अहम बैठक
उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक ने अपने इक्विटी शेयरधारकों की बैठक बुलाने का नोटिस जारी किया है। यह बैठक NCLT की प्रयागराज पीठ के 11 फरवरी 2026 के आदेश के तहत 28 मार्च 2026 को दोपहर 12:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित की जाएगी। बैठक में Utkarsh कोरइन्वेस्ट लिमिटेड के साथ प्रस्तावित विलय योजना पर विचार और स्वीकृति दी जाएगी। बैंक ने बताया कि बैठक का नोटिस और संबंधित दस्तावेज उसकी आधिकारिक वेबसाइट, बीएसई, एनएसई तथा एनएसडीएल की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं और शेयरधारकों को ई-वोटिंग की सुविधा भी प्रदान की जाएगी।
स्मॉल फाइनेंस कंपनियों के शेयर में क्यों गिरावट?
दरअसल, बिहार विधानसभा द्वारा गुरुवार को बिहार सूक्ष्म वित्त संस्थान (ऋण विनियमन एवं दमनकारी कार्रवाइयों की रोकथाम) विधेयक, 2026 पारित किए जाने की खबरों के बाद स्मॉल फाइनेंस कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई है। इस विधेयक के तहत ऋणदाताओं के लिए ऋण वितरण से पहले राज्य के वित्त विभाग से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य हो गया है। विधेयक के अनुसार, ये नियम बिहार में स्मॉल लोन देने वाली संस्थाओं पर लागू होंगे। इनमें व्यक्ति, साझेदारी फर्म, सीमित देयता भागीदारी (एलएलपी), कंपनियां, सोसायटी, ट्रस्ट, डिजिटल ऋण मंच, मोबाइल एप्लिकेशन और बिहार की सीमा के भीतर स्मॉल लोनदेने के व्यवसाय में संलग्न कोई भी अन्य संस्था या व्यक्ति शामिल हैं। विधेयक में यह भी कहा गया है कि माइक्रोफाइनेंस कंपनियों को बिहार में संचालन करने के लिए राज्य सरकार के साथ अलग से पंजीकरण कराना होगा, भले ही उनके पास भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से लाइसेंस हो।
नोडल प्राधिकारी नियुक्त
इसके अलावा, प्रस्तावित विधेयक के तहत सरकार ने संस्थागत वित्त निदेशक को नोडल प्राधिकारी नियुक्त किया है। विधेयक में कहा गया है कि माइक्रोफाइनेंस कंपनियों को आरबीआई से लाइसेंस प्राप्त करने के बाद निदेशक के पास पंजीकरण कराना होगा। आवश्यक दस्तावेजों के सत्यापन के बाद पंजीकरण 90 दिनों के भीतर पूरा हो जाएगा।
फिलहाल, इस विधेयक ने भारत के महत्वपूर्ण माइक्रोफाइनेंस बाजारों में से एक में नई नियामक अनिश्चितता पैदा कर दी है, जिससे सूचीबद्ध स्मॉल फाइनेंस बैंक शेयरों के मूल्यांकन को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।




साइन इन