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SpaceX IPO को लेकर जबरदस्त उत्साह, 75 अरब डॉलर के इश्यू पर टूटे निवेशक, भारतीय कैसे लगा पाएंगे पैसा?

SpaceX IPO: कई बड़े संस्थागत निवेशकों ने अकेले 10 अरब डॉलर या उससे अधिक के शेयर खरीदने के ऑर्डर दिए हैं। SpaceX का अनुमानित वैल्युएशन करीब 1.75 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है, जिससे यह दुनिया के सबसे बड़े IPO में से एक बन सकता है।

Tue, 9 June 2026 07:48 AMDrigraj Madheshia लाइव हिन्दुस्तान
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SpaceX IPO को लेकर जबरदस्त उत्साह, 75 अरब डॉलर के इश्यू पर टूटे निवेशक, भारतीय कैसे लगा पाएंगे पैसा?

एलन मस्क की दुनिया की सबसे बड़ी निजी अंतरिक्ष कंपनी SpaceX के प्रस्तावित IPO को लेकर निवेशकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। रॉयटर्स के मुताबिक, करीब 75 अरब डॉलर के इस मेगा IPO को निवेशकों से उम्मीद से कहीं ज्यादा प्रतिक्रिया मिली है और यह इश्यू पहले ही कई गुना सब्सक्राइब हो चुका है।

वहीं, SpaceX IPO में सीधे निवेश करना भारतीय खुदरा निवेशकों के लिए आसान नहीं होगा। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म, GIFT City के माध्यम से उपलब्ध FIO या लिस्ट होने के बाद अमेरिकी शेयर बाजार में निवेश के जरिए भारतीय निवेशक SpaceX में हिस्सेदारी लेने का अवसर पा सकते हैं।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, कई बड़े संस्थागत निवेशकों ने अकेले 10 अरब डॉलर या उससे अधिक के शेयर खरीदने के ऑर्डर दिए हैं। SpaceX का अनुमानित वैल्युएशन करीब 1.75 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है, जिससे यह दुनिया के सबसे बड़े IPO में से एक बन सकता है।

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AI डेटा सेंटर को अंतरिक्ष में ले जाने की तैयारी

IPO से पहले SpaceX के CEO एलन मस्क ने कंपनी की भविष्य की रणनीति पर बड़ा खुलासा किया है। मस्क ने कहा कि अंतरिक्ष में AI डेटा सेंटर बनाना कोई बेहद कठिन इंजीनियरिंग चुनौती नहीं है, क्योंकि इसके लिए जरूरी अधिकांश तकनीक कंपनी पहले से ही अपने स्टारलिंक सैटेलाइट नेटवर्क में इस्तेमाल कर रही है।

मस्क के मुताबिक, कंपनी ऐसे AI सैटेलाइट विकसित कर रही है जो अंतरिक्ष में कंप्यूटिंग नोड्स की तरह काम करेंगे। ये सौर ऊर्जा से संचालित होंगे और अंतरिक्ष में ही अपनी गर्मी बाहर निकालकर खुद को ठंडा रख सकेंगे।

एक AI सैटेलाइट की ताकत एनवीडिया सर्वर के बराबर

SpaceX के अनुसार, शुरुआती AI सैटेलाइट लगभग 150 किलोवाट पीक पावर और 120 किलोवाट कंप्यूटिंग क्षमता प्रदान कर सकेंगे। मस्क ने बताया कि यह क्षमता लगभग Nvidia GB300 AI सर्वर रैक के बराबर है, जो करीब 140 किलोवाट बिजली खपत करता है। कंपनी का मानना है कि भविष्य में AI डेटा सेंटरों की बढ़ती बिजली जरूरतों को देखते हुए अंतरिक्ष आधारित कंप्यूटिंग एक बड़ा समाधान बन सकती है।

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स्टारलिंक तकनीक बनेगी आधार

SpaceX इंजीनियर इयान डाहल के अनुसार, ये AI सैटेलाइट Starlink V3 सैटेलाइट्स की कई तकनीकों का इस्तेमाल करेंगे। इनमें अपग्रेडेड सोलर पैनल, टेम्परेचर मैनेजमेंट सिस्टम और अन्य महत्वपूर्ण हार्डवेयर शामिल हैं। उन्होंने कहा कि AI सैटेलाइट्स को Starlink की तरह बड़े कम्युनिकेशन एंटीना की जरूरत नहीं होगी, इसलिए इनका डिजाइन अपेक्षाकृत सरल होगा।

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स्टारशिप देगा विस्तार की ताकत

कंपनी का कहना है कि उसका पुन: इस्तेमाल करने लायक रॉकेट स्टारशिप भविष्य में बड़े पैमाने पर सोलर पैनल, कंप्यूटर चिप्स और अन्य उपकरण अंतरिक्ष में पहुंचाने में मदद करेगा। इससे ऑर्बिटल कंप्यूटिंग नेटवर्क को तेजी से विस्तार दिया जा सकेगा। मस्क ने बताया कि टेक्सास के बैस्ट्रोप स्थित SpaceX की AI सैटेलाइट फैक्ट्री अगले साल के अंत तक बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू कर सकती है।

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