₹40 के नीचे आया एनर्जी कंपनी का यह शेयर, 2 साल में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट
भारतीय शेयर बाजार में पवन ऊर्जा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी सुजलॉन एनर्जी के शेयरों में गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही है। सोमवार, 2 मार्च को स्टॉक में एक और बड़ी गिरावट देखने को मिली और यह करीब 8.3% टूटकर ₹40 के नीचे फिसल गया।

Suzlon Energy Share: भारतीय शेयर बाजार में पवन ऊर्जा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी सुजलॉन एनर्जी के शेयरों में गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही है। सोमवार, 2 मार्च को स्टॉक में एक और बड़ी गिरावट देखने को मिली और यह करीब 8.3% टूटकर ₹40 के नीचे फिसल गया। दिन के कारोबार में शेयर ₹39.13 तक चला गया, जो मई 2024 के बाद का सबसे निचला स्तर है। कभी तेज रफ्तार से भागने वाला यह शेयर अब निवेशकों को चिंता में डाल रहा है, खासकर इसलिए क्योंकि इसमें बड़ी हिस्सेदारी रिटेल निवेशकों की है।
क्या है डिटेल
दरअसल, इस गिरावट की शुरुआत जून 2025 से हुई थी, जो अब लंबी करेक्शन में बदल चुकी है। सितंबर 2024 में ₹86 के शिखर से यह शेयर करीब 50% से ज्यादा टूट चुका है। बीते नौ महीनों में से आठ महीनों में स्टॉक लाल निशान में बंद हुआ है और कुल मिलाकर लगभग 40% की गिरावट दर्ज की है। कैलेंडर ईयर 2025 में भी शेयर 15% से ज्यादा गिरा, जो पांच साल में इसकी पहली सालाना गिरावट रही।
दिसंबर तिमाही के नतीजे
कंपनी के दिसंबर तिमाही नतीजे बाज़ार के अनुमान के मुताबिक रहे, फिर भी निवेशकों का भरोसा पूरी तरह लौट नहीं पाया। विश्लेषकों का कहना है कि बाकी यूटिलिटी कंपनियों की तरह सुजलॉन को भी प्रोजेक्ट कमीशनिंग बढ़ाने में दिक्कत आ रही है। जमीन अधिग्रहण, राइट ऑफ वे (RoW) और ग्रिड कनेक्टिविटी जैसी चुनौतियां बड़ी अड़चन बनी हुई हैं। हाल ही में कंपनी ने बड़ा मैनेजमेंट बदलाव भी किया है। 24 फरवरी को बोर्ड ने अजय कपूर को नया सीईओ नियुक्त किया, जबकि मौजूदा ग्रुप सीईओ जेपी चालासानी को ग्रुप एग्जीक्यूटिव काउंसिल में शामिल किया गया है।
ब्रोकरेज फर्म की राय
हालांकि ब्रोकरेज हाउस जेएम फाइनेंशियल का मानना है कि केवल नेतृत्व में बदलाव से हालात नहीं सुधरेंगे। उनके मुताबिक कंपनी में कई हाई-प्रोफाइल अधिकारियों की एंट्री से ग्रुप डायनामिक्स बिगड़ने का जोखिम है और इससे मुख्य कारोबार यानी विंड टरबाइन जेनरेटर (WTG) मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस कमजोर हो सकता है। सबसे बड़ी चिंता डिलीवरी और कमीशनिंग के बीच बढ़ते गैप की है। पिछले सात तिमाहियों में 3,175 मेगावॉट उपकरण डिलीवर किए गए, लेकिन सिर्फ 778 मेगावॉट ही कमीशन हो पाए।
ब्रोकरेज ने वित्त वर्ष 2027 और 2028 के लिए डिलीवरी अनुमान घटा दिए हैं, हालांकि ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखते हुए ₹64 का टारगेट दिया है। वहीं Nuvama Institutional Equities ने भी ‘बाय’ रेटिंग कायम रखी है लेकिन लक्ष्य घटाकर ₹55 कर दिया है। दूसरी ओर Motilal Oswal अब भी इस शेयर पर सकारात्मक रुख रखते हुए ₹74 का टारगेट दे रहा है।
कुल मिलाकर, सुजलॉन के सामने असली चुनौती ज़मीन पर प्रोजेक्ट्स को तेजी से लागू करने की है। पवन ऊर्जा सेक्टर में जमीन, पीपीए, लागत और ग्रिड कनेक्टिविटी जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। जब तक डिलीवरी के मुकाबले कमीशनिंग की रफ्तार नहीं बढ़ती, तब तक शेयर में स्थिरता आना मुश्किल दिख रहा है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि कंपनी जमीनी स्तर पर कितनी तेजी से सुधार ला पाती है।




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