Supreme Court on casual worker says pension is a right not favour पेंशन पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला, इन सरकारी कर्मचारियों को मिलेगी राहत, Business Hindi News - Hindustan
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पेंशन पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला, इन सरकारी कर्मचारियों को मिलेगी राहत

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा कि पेंशन सेवा से मिलने वाला एक कानूनी अधिकार है, न कि कोई अपनी मर्जी से दिया जाने वाला फायदा। 18 साल लंबी कानूनी लड़ाई आखिरकार अपने अंजाम तक पहुंची।

Tue, 2 June 2026 10:31 PMDeepak Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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पेंशन पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला, इन सरकारी कर्मचारियों को मिलेगी राहत

Supreme Court on pension: सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के पेंशन को लेकर एक अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि किसी कर्मचारी को केवल इस आधार पर पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता कि उसकी सेवा को औपचारिक रूप से नियमित (रेगुलराइज) नहीं किया गया था। कोर्ट ने यह टिप्पणी बिहार के एक मामले में की है।

क्या है मामला?

दरअसल, बिहार की एक महिला के पति ने डाक विभाग में करीब 30 वर्षों तक कैजुअल लेबर (अस्थायी कर्मचारी) के रूप में काम किया था। लंबे समय तक सेवा देने के बावजूद उनकी नौकरी नियमित नहीं की गई थी। कर्मचारी की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी ने पारिवारिक पेंशन की मांग की, लेकिन केंद्र सरकार ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि कर्मचारी की सेवा कभी नियमित नहीं हुई थी, इसलिए वह पेंशन का हकदार नहीं था। अब सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी ऐसे कर्मचारी को पेंशन देने से मना नहीं किया जा सकता, जिसने किसी सरकारी विभाग में दशकों तक सेवा की हो लेकिन सिर्फ इसलिए कि उसकी नौकरी कभी औपचारिक रूप से पक्की नहीं हुई थी।

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18 साल पुरानी लड़ाई

यह कानूनी लड़ाई 18 साल पुरानी है। यह लड़ाई 18 साल तक चली। यह लड़ाई तीन न्यायिक मंच सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल, पटना हाईकोर्ट और आखिरकार सुप्रीम कोर्ट से होकर गुजरी। अब जब सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि नौकरी पक्की न होने की वजह से, किसी ऐसे कर्मचारी को पेंशन के फायदों से वंचित नहीं किया जा सकता, जिसने अपनी जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा जनसेवा में समर्पित कर दिया हो।

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केंद्र सरकार ने यह तर्क दिया कि ऐसे मामलों में पेंशन लाभों का विस्तार करने से अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को मानने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पेंशन कोई ऐसी कृपा का विषय नहीं है जो नियोक्ता की वित्तीय सुविधा पर निर्भर हो, बल्कि यह लंबे वर्षों की सेवा के माध्यम से अर्जित किया गया एक विलंबित वेतन है। जस्टिस संजय करोल और ए.जी. मसीह की बेंच ने इस बात पर जोर दिया कि जो कर्मचारी लंबे समय तक जरूरी काम करते हैं, उन्हें सिर्फ उनकी नौकरी के नाम या पदनाम के आधार पर मिलने वाले फायदों से वंचित नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी अधिकारियों को यह भी याद दिलाया कि कर्मचारियों के साथ निष्पक्ष व्यवहार करना उनकी जिम्मेदारी है। जजों ने कहा कि सरकार को एक आदर्श नियोक्ता के तौर पर काम करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जिन कर्मचारियों ने सार्वजनिक संस्थानों में सालों तक सेवा की है, उन्हें वे सभी फायदे मिलें जिनके वे हकदार हैं।

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