कच्चे तेल के दाम में उबाल, शुगर कंपनियों की चांदी, 11% तक चढ़ गए शेयर के दाम
राणा शुगर्स, धामपुर शुगर मिल्स, डालमिया भारत शुगर, द्वारिकेश शुगर और बजाज हिन्दुस्तान के शेयरों में सोमवार को इंट्राडे के दौरान 8% तक की तेजी आई है। क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों ने शुगर सेक्टर के लिए सेंटीमेंट मजबूत करने का काम किया है।

घरेलू शेयर बाजार में सोमवार को आई तेज गिरावट के उलट चीनी (शुगर) कंपनियों के शेयरों में अच्छी तेजी देखने को मिली है, क्योंकि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की बढ़ती कीमतों ने शुगर सेक्टर के लिए सेंटीमेंट मजबूत करने का काम किया है। राणा शुगर्स लिमिटेड, धामपुर शुगर मिल्स, डालमिया भारत शुगर, द्वारिकेश शुगर इंडस्ट्रीज, श्री रेणुका शुगर्स, बजाज हिन्दुस्तान और प्राज इंडस्ट्रीज के शेयरों में सोमवार को इंट्राडे के दौरान 11 पर्सेंट तक की तेजी आई है। ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल के दाम 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब जा पहुंचे हैं। ऊंचे ऑयल प्राइसेज को एथनॉल प्रॉडक्शन के लिए सपोर्टिव माना जाता है, इससे गन्ने की डिमांड को मजबूती मिलती है और शुगर कंपनियों को फायदा होता है।
11% तक उछल गए शुगर कंपनियों के शेयर
राणा शुगर्स लिमिटेड के शेयर सोमवार को BSE में 11 पर्सेंट की तेजी के साथ 12.70 रुपये पर पहुंच गए। चीनी कंपनी द्वारिकेश शुगर इंडस्ट्रीज के शेयर सोमवार को BSE में इंट्राडे के दौरान 8 पर्सेंट से अधिक के उछाल के साथ 41.65 रुपये पर पहुंच गए। डालमिया भारत शुगर एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड के शेयर सोमवार को BSE में 7 पर्सेंट से ज्यादा की तेजी के साथ 332 रुपये पर जा पहुंचे हैं। धामपुर शुगर मिल्स लिमिटेड के शेयर भी 7 पर्सेंट से अधिक के उछाल के साथ 130.60 रुपये पर कारोबार कर रहे हैं। बजाज हिन्दुस्तान शुगर के शेयरों में 6.8 पर्सेंट, उत्तम शुगर मिल्स के शेयरों में 6.2 पर्सेंट, प्राज इंडस्ट्रीज के शेयरों में करीब 6 पर्सेंट, श्री रेणुका शुगर्स के शेयरों में 4.8 पर्सेंट और बलरामपुर चीनी मिल्स के शेयरों में 3.5 पर्सेंट की तेजी आई है।
शुगर स्टॉक्स पर कैसे असर डालता है कच्चा तेल
कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की बढ़ती कीमतें एथनॉल के प्रॉडक्शन को आर्थिक रूप से और आकर्षक बनाता है। यह प्रॉड्यूसर्स को चीनी की बजाय इस बायोफ्यूल (एथनॉल) की तरफ ज्यादा गन्ना डायवर्ट करने के लिए प्रोत्साहित करता है। यह अक्सर शुगर कंपनियों को फायदा पहुंचाता है, क्योंकि क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतें सेक्टर की प्रॉफिटैबिलिटी को सुधारती हैं। जब ऑयल महंगा हो जाता है तो फ्यूल सप्लायर्स के लिए पेट्रोल के साथ एथनॉल की ब्लेंडिंग ज्यादा इकनॉमिकल हो जाती है। इस वजह से शुगर मिल्स अक्सर गन्ने का एक बड़ा हिस्सा एथनॉल प्रॉडक्शन की तरफ डायवर्ट कर देती हैं।
एथेनॉल ब्लेंडिंग क्या है?
एथेनॉल (Ethanol) गन्ने, मक्के और दूसरे अनाज से बनाया जाने वाला बायोफ्यूल है। एथेनॉल को फॉसिल फ्यूल का रिन्यूएबल अल्टरनेटिव माना जाता है। कच्चे तेल के आयात (क्रूड ऑयल इंपोर्ट्स) पर निर्भरता और कॉर्बन उत्सर्जन घटाने के लिए भारत सरकार ने एथेनॉल को पेट्रोल के साथ ब्लेंड करने का मैंडेट दिया है। इस पॉलिसी के तहत ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पेट्रोल को मार्केट में बेचने से पहले इसमें एथेनॉल का एक तय पर्सेंटेज मिक्स करती हैं। एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम किसानों और एग्रीकल्चरल इकनॉमी को भी सपोर्ट करता है, क्योंकि इससे गन्ना और मक्के जैसे फसलों की डिमांड बढ़ती है।




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