जंग वापसी या कुछ और… शेयर बाजार में भूचाल के क्या हैं कारण?
ईरान और इजराइल के बीच एक बार फिर से जंग शुरू हो गई है। इसका असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखा। इस तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से हुई बढ़ोतरी है।

Stock market crash: ईरान और अमेरिका-इजराइल की जंग एक बार फिर से शुरू हो गई है। इस तनाव भरे माहौल से भारत समेत दुनियाभर के निवेशक सहमे हुए हैं। इसका असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखा। सप्ताह के पहले दिन यानी सोमवार को शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 925 अंक तक टूट गया। यह गिरावट मार्केट ओपन होने के 30 मिनट के भीतर देखी गई। इस दौरान सेंसेक्स 73,350 अंक के नीचे भी आ गया। निफ्टी की बात करें तो करीब 300 अंक टूटकर 23,100 अंक के नीचे आ गया। आइए समझ लेते हैं कि सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट के प्रमुख कारण क्या हैं?
जंग की एक बार फिर से शुरुआत
ईरान और इजराइल के बीच एक बार फिर से जंग शुरू हो गई है। इजराइल ने कहा है कि ईरान ने उस पर मिसाइलें दागी हैं जो अप्रैल की शुरुआत में नाजुक युद्धविराम लागू होने के बाद ईरान की ओर से किया गया इस तरह का पहला हमला है। इजराइल ने भी ईरान को माकूल जवाब दिया है। इस हमले के बाद युद्ध समाप्त करने के मकसद से समझौते के लिए मध्यस्थता के प्रयास और मुश्किल हो गए हैं। इजराइल ने कहा कि यह हमला ईरान समर्थित हिजबुल्ला द्वारा दिन में उत्तरी इजराइल पर गोलीबारी किए जाने के जवाब में किया गया। बहरहाल, इजराइली हमले के बाद ईरान ने देश के मुख्य हवाई अड्डे इमाम खुमैनी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास के हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया।
ट्रंप की अपील
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से ईरान द्वारा किए गए मिसाइल हमलों का जवाब न देने का आग्रह किया और कहा कि इससे तीन महीने से जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए शांति समझौते की बातचीत खतरे में पड़ जाएगी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने नेतन्याहू से बात की ताकि दोनों देशों के बीच नए सिरे से तनाव पैदा होने से शांति समझौते पर असर न पड़े। ट्रंप ने ईरान से भी बातचीत की मेज पर लौटने का आग्रह किया।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
इस तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से हुई बढ़ोतरी है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 3.5% बढ़कर लगभग $96.5 प्रति बैरल हो गई। इस तनाव ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल की सप्लाई के भविष्य को लेकर भी चिंताएं बढ़ा दी हैं, जो दुनिया के सबसे अहम एनर्जी रूट में से एक है।
-फेडरल रिजर्व इस साल के आखिर में ब्याज दरें बढ़ा सकता है। CME FedWatch डेटा के अनुसार दिसंबर 2026 तक फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना एक हफ्ते पहले के 45.2% से बढ़कर 72.3% हो गई है। इससे विदेशी निवेश के फ्लो को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने 2026 में अब तक 28.63 अरब डॉलर के भारतीय शेयर बेचे हैं, जो 2025 में देखे गए सालाना निकासी के रिकॉर्ड से भी अधिक है।
RBI का फैसला
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने शुक्रवार को ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया सेंट्रल बैंक ने वित्त वर्ष 2027 के लिए महंगाई का अनुमान 4.6% से बढ़ाकर 5.1% कर दिया। इसके साथ ही, इसने आर्थिक विकास का अनुमान 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया। वहीं, मार्च तिमाही में GDP ग्रोथ 7.8% रही। यह पिछली तिमाही के मुकाबले कम है।




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