जंग की आग में झुलस रहा शेयर बाजार, 4 महीने में कैसे 12000 अंक टूटा सेंसेक्स?
बीते एक दिसंबर 2025 को सेंसेक्स 86159 अंक पर था, जो इसका ऑल टाइम हाई है। कहने का मतलब है कि 4 महीने से भी कम समय में सेंसेक्स ने यह गिरावट देखा गया है। निफ्टी की बात करें तो यह 26,373.20 अंक से टूटकर 23000 अंक के स्तर पर आ गया है।

Stock market crash: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 19 मार्च को बड़ी सुनामी आ गई। इस सुनामी के कारण सेंसेक्स और निफ्टी, दोनों में हाहाकार मच गया और निवेशकों के एक दिन में करीब 13 लाख करोड़ रुपये डूब गए।
गुरुवार को सेंसेक्स और निफ्टी का हाल?
तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स 2,496.89 अंक यानी 3.26 प्रतिशत का गोता लगाकर 74,207.24 अंक पर बंद हुआ। जून, 2024 के बाद सेंसेक्स में एक दिन में यह सबसे बड़ी गिरावट है। कारोबार के दौरान, यह 2,753.18 अंक टूटकर 73,950.95 अंक पर आ गया था। पचास शेयरों पर आधारित एनएसई निफ्टी भी 775.65 अंक यानी 3.26 प्रतिशत टूटकर 23,002.15 अंक पर बंद हुआ। सेंसेक्स अपने ऑल टाइम हाई से करीब 12 हजार अंक टूट चुका है। बीते एक दिसंबर 2025 को सेंसेक्स 86159 अंक पर था, जो इसका ऑल टाइम हाई है। कहने का मतलब है कि 4 महीने से भी कम समय में सेंसेक्स ने यह गिरावट देखा गया है। निफ्टी की बात करें तो यह 26,373.20 अंक से टूटकर 23000 अंक के स्तर पर आ गया है। कहने का मतलब है कि निफ्टी 3000 अंक टूट चुका है।
गिरावट के कारण
शेयर बाजार में गुरुवार को तात्कालिक गिरावट कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की वजह से आई है। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत 6.75 प्रतिशत चढ़कर 114.8 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गयी। यह वृद्धि कतर में एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक गैस संयंत्र और कुवैत में दो तेल रिफाइनरियों पर ईरान के हमले के बाद हुई।
बता दें कि ईरान ने गुरुवार को अपने पड़ोसी देशों के ऊर्जा संयंत्रों पर हमले तेज कर दिए। उसने लाल सागर स्थित सऊदी अरब की एक रिफाइनरी को निशाना बनाया और कतर के एलएनजी संयंत्रों और कुवैत की दो तेल रिफाइनरियों पर भी हमले किये। यह हमला इजराइल के उसके मुख्य प्राकृतिक गैस क्षेत्र पर हमले के जवाब में किया गया। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को चेतावनी से इस तनाव के और बढ़ने की आशंका है। वहीं, अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने बुधवार को समाप्त दो दिवसीय बैठक में नीतिगत दरों को 3.5 प्रतिशत से 3.75 प्रतिशत के बीच स्थिर रखने का फैसला किया। इससे अमेरिका के साथ एशिया और यूरोप के शेयर बाजारों में भी बड़ी गिरावट आई।
अगर पिछले चार महीने के हालात को देखें तो अमेरिका के टैरिफ अटैक का भी बड़ा फैक्टर रहा है। पिछले कुछ महीने में अमेरिका की ओर से भारत समेत दुनियाभर के कई देशों के आइटम पर टैरिफ लगाए जाने से बाजार का सेंटिमेंट बिगड़ा है। इसके अलावा रुपये की गिरावट ने भी बाजार की चाल को सुस्त कर दी है। बता दें कि रुपया, डॉलर के मुकाबले 92 रुपये के स्तर को पार कर चुका है।




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