Silver prices slash by 5000 rupees amid middle east crisis what should investors do know ₹5000 सस्ती हुई चांदी, अब आगे कितना गिरेगा भाव? क्या कहते हैं एक्सपर्ट- जानिए, Business Hindi News - Hindustan
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₹5000 सस्ती हुई चांदी, अब आगे कितना गिरेगा भाव? क्या कहते हैं एक्सपर्ट- जानिए

मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के बीच जहां सोना सुरक्षित निवेश के तौर पर तेजी पकड़ रहा है, वहीं चांदी की कीमतों ने इस हफ्ते निवेशकों को चौंका दिया है।

Sun, 8 March 2026 04:59 PMVarsha Pathak लाइव हिन्दुस्तान
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₹5000 सस्ती हुई चांदी, अब आगे कितना गिरेगा भाव? क्या कहते हैं एक्सपर्ट- जानिए

Silver Price: मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के बीच जहां सोना सुरक्षित निवेश के तौर पर तेजी पकड़ रहा है, वहीं चांदी की कीमतों ने इस हफ्ते निवेशकों को चौंका दिया है। आमतौर पर किसी बड़े वैश्विक संकट के समय सोना-चांदी दोनों में तेजी देखने को मिलती है, लेकिन इस बार चांदी ने उल्टा रुख दिखाया है। स्पॉट मार्केट में इस हफ्ते चांदी की कीमत करीब ₹5,000 से ज्यादा गिर गई है। आंकड़ों के मुताबिक 27 फरवरी को चांदी का भाव करीब ₹2,66,127 था, जो हफ्ते के आखिर तक घटकर लगभग ₹2,60,856 रह गया।

क्या है डिटेल

दरअसल, पिछले शनिवार अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर बड़े हमले किए, जिसके बाद मिडिल ईस्ट में युद्ध का माहौल बन गया। इस संघर्ष में अब तक हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और कई देश इसकी चपेट में आ गए हैं। साथ ही होरमुज़ जलडमरूमध्य में भी तनाव बढ़ गया है, जहां से दुनिया के करीब 20% तेल की सप्लाई गुजरती है। इस वजह से कच्चे तेल और गैस की कीमतों में तेजी आई है और महंगाई को लेकर चिंता भी बढ़ी है। ऐसे माहौल में निवेशक सोने को सुरक्षित विकल्प मानकर खरीद रहे हैं, लेकिन चांदी को उतना फायदा नहीं मिला।

गिरावट की वजह

चांदी की कीमतों में गिरावट की सबसे बड़ी वजह इसका औद्योगिक इस्तेमाल माना जा रहा है। चांदी की कुल मांग का करीब 50 से 55 फीसदी हिस्सा इंडस्ट्री से आता है। इसका उपयोग खास तौर पर सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और कई तकनीकी उपकरणों में होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध की वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को लेकर डर बढ़ गया है। ऐसे में उद्योगों में मांग घटने की आशंका से निवेशक चांदी से दूरी बना रहे हैं।

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इसके अलावा एक और कारण मुनाफावसूली भी है। साल 2025 में चांदी की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया था और पूरे साल में करीब 170% तक तेजी देखी गई थी। 2026 की शुरुआत में भी यह तेजी जारी रही और एमसीएक्स फ्यूचर्स में चांदी का भाव ₹4,30,000 तक पहुंच गया था। लेकिन इसके बाद अचानक तेज गिरावट आई और अब कीमत करीब ₹2,60,000 के आसपास आ गई है। यानी पुराने हाई तक पहुंचने के लिए चांदी को करीब 70% की फिर से तेजी चाहिए।

क्या कहते हैं जानकार

बाजार के जानकारों का कहना है कि यह गिरावट चांदी की कहानी का अंत नहीं है। विश्लेषकों के मुताबिक किसी भी कमोडिटी में जब बहुत तेज और लगातार तेजी आती है तो उसके बाद बड़ी गिरावट या करेक्शन भी सामान्य बात होती है। इलेक्ट्रिफिकेशन, रिन्यूएबल एनर्जी और सोलर सेक्टर में बढ़ती मांग जैसे लंबे समय के फैक्टर अभी भी चांदी के पक्ष में हैं। इसलिए मौजूदा गिरावट को स्थायी कमजोरी नहीं बल्कि एक अस्थायी करेक्शन माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। हालांकि वैश्विक स्तर पर चांदी की सप्लाई सीमित है और इंडस्ट्री में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में बाजार फिलहाल एक नई संतुलित कीमत खोजने की कोशिश कर रहा है। इसलिए कई विश्लेषक इसे गिरावट नहीं बल्कि एक “रीसेट” मान रहे हैं, जिसके बाद लंबे समय में फिर से तेजी की संभावना बन सकती है।

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