दो दिन में ₹33000 घट गए चांदी के दाम, क्या है गिरावट की वजह?
केंद्र सरकार ने रुपये पर दबाव कम करने और आयात बिल नियंत्रित करने के लिए सोना और चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15% कर दिया था। इस फैसले के बाद घरेलू बाजार में चांदी की कीमतों में बड़ा उछाल आया और MCX पर भाव 3 लाख रुपये प्रति किलो के ऊपर पहुंच गए।

सरकार के सोने-चांदी के आयात पर फैसले के बाद अब चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। सिर्फ दो कारोबारी दिन में चांदी के दाम करीब 33 हजार रुपये घट हैं। बता दें कि सरकार द्वारा सोना-चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाने के बाद चांदी की कीमतों में शुरुआती उछाल देखने को मिला था लेकिन अब मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर चांदी के दाम सिर्फ दो कारोबारी सत्रों में करीब 11% यानी 32,624 रुपये प्रति किलोग्राम तक टूट गए हैं। सिर्फ शुक्रवार की बात करें तो चांदी की कीमत में 6% की गिरावट आई यानी करीब 17,500 रुपये प्रति किलो सस्ती हो गई।
सरकार का क्या था फैसला?
दरअसल, केंद्र सरकार ने रुपये पर दबाव कम करने और आयात बिल नियंत्रित करने के लिए सोना और चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15% कर दिया था। इस फैसले के बाद घरेलू बाजार में चांदी की कीमतों में बड़ा उछाल आया और MCX पर भाव 3 लाख रुपये प्रति किलो के ऊपर पहुंच गए। इसके बाद अब चांदी बिकवाली मोड में है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज आंकड़ों के मुताबिक, शुल्क वृद्धि की घोषणा से पहले 12 मई को चांदी वायदा लगभग 2.79 लाख रुपये प्रति किलो पर बंद हुआ था।
13 मई को आयात महंगा होने के कारण कीमतों में तेज उछाल आया लेकिन बाद में बाजार में भारी मुनाफावसूली शुरू हो गई। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊंचे दामों पर मांग कमजोर पड़ना इस गिरावट की बड़ी वजह है। सोने के मुकाबले चांदी का बड़ा हिस्सा औद्योगिक उपयोग में आता है।
इसका इस्तेमाल सोलर पैनल, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, AI इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन एनर्जी सेक्टर में होता है। ऐसे में वैश्विक आर्थिक सुस्ती की आशंका बढ़ने पर चांदी पर ज्यादा दबाव बनता है। विश्लेषकों के अनुसार, ईरान तनाव के कारण शुरुआत में सुरक्षित निवेश के तौर पर कीमती धातुओं में खरीदारी बढ़ी थी। लेकिन बाद में बाजार की चिंता बढ़ते कच्चे तेल के दाम और वैश्विक विकास दर पर असर को लेकर बढ़ गई। इसका असर औद्योगिक धातुओं पर ज्यादा पड़ा और चांदी सुरक्षित निवेश से ज्यादा इंडस्ट्रियल कमोडिटी की तरह व्यवहार करने लगी।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
बोनांजा के सीनियर कमोडिटी एनालिस्ट निरपेंद्र यादव के अनुसार ड्यूटी में 15% की बढ़ोतरी से स्थानीय कीमतें काफी बढ़ जाती हैं, जिससे ज्वेलरी की मांग पर बुरा असर पड़ सकता है और औद्योगिक आयात भी धीमा हो सकता है। उन्होंने आगे कहा कि अगर ईरान संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं तो महंगाई के जोखिमों को देखते हुए सेंट्रल बैंक अपना सख्त रुख बनाए रख सकते हैं।
Enrich मनी के CEO पोनमुडी आर के अनुसार, कीमतों में शुरुआती उछाल मुख्य रूप से ड्यूटी शॉक की प्रतिक्रिया थी। सरकार द्वारा चांदी पर आयात शुल्क 6% से बढ़ाकर 15% करने के कदम के बाद MCX पर चांदी की कीमतें तेजी से बढ़ गईं क्योंकि आयातित चांदी की लागत तुरंत बढ़ गई थी।
लंबे समय के नजरिए से देखें तो चांदी दुनिया भर में सबसे मजबूत स्ट्रक्चरल कमोडिटी थीम में से एक बनी हुई है। इसे AI इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन, सोलर क्षमता के विस्तार, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग से समर्थन मिल रहा है। टाटा म्यूचुअल फंड ने इस महीने की शुरुआत में एक रिपोर्ट में कहा था कि बिगड़ता वैश्विक आर्थिक परिदृश्य मिड टर्म में चांदी की मांग को सीमित कर सकता है। फंड हाउस ने बताया कि सोलर इंस्टॉलेशन की धीमी गति और बड़ी लॉन्ग पोजिशन्स को बेचने से वैश्विक बाजारों में आपूर्ति की कमी कुछ कम हुई है।




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