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एयरटेल पेमेंट बैंक पर RBI का बड़ा एक्शन, 30 लाख रुपये से ज्यादा का लगा जुर्माना

रिजर्व बैंक ने वित्तीय लेखे-जोखे में खुलासे से संबंधित प्रावधानों के उल्लंघन के लिए एयरटेल पेमेंट बैंक पर 31.8 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। रिजर्व बैंक ने साफ किया कि यह कार्रवाई केवल नियमों की अनदेखी के कारण की गई है।

Mon, 30 March 2026 09:29 PMDeepak Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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एयरटेल पेमेंट बैंक पर RBI का बड़ा एक्शन, 30 लाख रुपये से ज्यादा का लगा जुर्माना

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने एयरटेल पेमेंट बैंक पर बड़ी कार्रवाई की है। रिजर्व बैंक ने वित्तीय लेखे-जोखे में खुलासे से संबंधित प्रावधानों के उल्लंघन के लिए 31.8 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। केंद्रीय बैंक ने बताया कि उसने 31 मार्च, 2025 तक की बैंक की आर्थिक स्थिति की निगरानी और जांच के लिए एक कानूनी ऑडिट किया था। इस दौरान बैंक के कामकाज में आरबीआई के निर्देशों की अनदेखी पाई गई, जिसके बाद बैंक को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था।

बैंक की ओर से दिए गए जवाब और दलीलों पर विचार करने के बाद आरबीआई ने पाया कि एयरटेल पेमेंट बैंक ने वित्त वर्ष 2024-25 के अपने सालाना लेखा-जोखा में ग्राहकों की कुछ शिकायतों की जानकारी छिपाई थी। चूंकि यह आरोप सही साबित हुआ, इसलिए बैंक पर मौद्रिक जुर्माना लगाना जरूरी समझा गया। आरबीआई ने साफ किया कि यह कार्रवाई केवल नियमों की अनदेखी के कारण की गई है। इसका मकसद बैंक और उसके ग्राहकों के बीच हुए किसी भी लेनदेन या समझौते की वैधता पर सवाल उठाना या उस पर कोई फैसला देना नहीं है।

एक्शन मोड में है आरबीआई

हाल ही में आरबीआई ने कुछ निर्देशों का पालन न करने के लिए यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और पाइन लैब्स पर भी मौद्रिक जुर्माना लगाया है। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया पर 95.40 लाख रुपये, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया पर 63.60 लाख रुपये, बैंक ऑफ इंडिया पर 58.50 लाख रुपये और पाइन लैब्स पर 3.10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

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किस बैंक ने क्या गलती की थी?

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के मामले में ग्राहक द्वारा अधिसूचना की तारीख से 10 कार्य दिवसों के भीतर अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन में शामिल राशि को कुछ ग्राहकों के खातों में जमा नहीं किया गया था। साथ ही ग्राहकों को अनधिकृत बैंकिंग लेनदेन की रिपोर्ट करने के लिए 24 घंटे सुविधा प्रदान नहीं की गयी और कुछ केसीसी खातों में सिस्टम-आधारित परिसंपत्ति वर्गीकरण प्रक्रिया में 'मैन्युअल' हस्तक्षेप का सहारा लिया गया था।

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वहीं, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया पर जुर्माना इसलिए लगाया गया क्योंकि बैंक निर्धारित समय सीमा के भीतर कुछ ग्राहकों के केवाईसी रिकॉर्ड को केन्द्रीय केवाईसी रिकॉर्ड्स रजिस्ट्री पर अपलोड करने में विफल रहा और कुछ ग्राहकों के अतिरिक्त बीएसबीडी (बुनियादी बचत बैंक जमा) खाते खोले, जिनके पास पहले से ही बैंक में बीएसबीडी खाते थे।

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इसके अलावा, कुछ प्राथमिकता वाले क्षेत्र के ऋण खातों में तदर्थ सेवा शुल्क/निरीक्षण शुल्क व प्रसंस्करण शुल्क एकत्र करने और परिपक्वता की तारीख से उनके पुनर्भुगतान की तारीख तक कुछ सावधि जमा रसीदों (टीडीआर) पर ब्याज का भुगतान नहीं करने के लिए बैंक ऑफ इंडिया पर जुर्माना लगाया गया है। वहीं, पाइन लैब्स ने पीपीआई (प्रीपेड भुगतान उत्पाद) धारकों के केवाईसी को पूरा किए बिना कई पूर्ण-केवाईसी प्रीपेड भुगतान उपकरण (पीपीआई) जारी किए, जिसके कारण जुर्माना लगाया गया।

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