RBI ने यस बैंक पर लिया बड़ा एक्शन, 25 रुपये से कम का है शेयर
आरबीआई ने केवाईसी से जुड़े कुछ प्रावधानों का अनुपालन नहीं करने पर यस बैंक पर 31.80 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। बैंक के शेयर परफॉर्मेंस की बात करें तो 1.82% बढ़कर शुक्रवार को 22.93 रुपये पर बंद हुआ।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने प्राइवेट सेक्टर के यस बैंक पर बड़ी कार्रवाई की है। आरबीआई ने केवाईसी से जुड़े कुछ प्रावधानों का अनुपालन नहीं करने पर यस बैंक पर 31.80 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। रिजर्व बैंक ने कहा कि बैंक ग्राहकों के साथ खाता-आधारित संबंध स्थापित करने के लिए केंद्रीय केवाईसी रिकॉर्ड रजिस्ट्री द्वारा दिए गए केवाईसी पहचानकर्ता का इस्तेमाल करने की व्यवस्था लागू करने में नाकाम रहा। एक अन्य बयान में रिजर्व बैंक ने कहा कि संचालन से जुड़े कुछ निर्देशों का पालन नहीं करने पर हिन्दुजा हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड पर 1.8 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
शेयर का परफॉर्मेंस
यस बैंक के शेयर परफॉर्मेंस की बात करें तो 1.82% बढ़कर शुक्रवार को 22.93 रुपये पर बंद हुआ। शेयर के 52 हफ्ते का हाई 24.30 रुपये और 52 हफ्ते का लो 17.19 रुपये है।
बैंक के मैनेजमेंट में हुआ है बदलाव
यस बैंक पर आरबीआई ने ये कार्रवाई ऐसे समय में की है जब विनय मुरलीधर टोंसे ने बैंक की जिम्मेदारी संभाली है। यस बैंक ने तीन साल के लिए बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) का पदभार संभाला है। टोंसे ने इस पद पर प्रशांत कुमार की जगह ली है। बता दें कि पिछले वर्ष जापान की सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉरपोरेशन ने बैंक में करीब 24 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी थी, जिसके बाद वह मुंबई स्थित इस बैंक की सबसे बड़ी निवेशक बन गई।
आरबीआई ने बैंकों को दी ये मंजूरी
इस बीच, भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों के पूंजी पर्याप्तता मानदंडों में ढील देते हुए चालू वित्त वर्ष के लाभ को तिमाही आधार पर पूंजी गणना में शामिल करने की अनुमति दे दी है। रिजर्व बैंक के एक सर्कुलर के मुताबिक, अब बैंकों को तिमाही मुनाफा 'कॉमन इक्विटी टियर-1' (सीईटी-1) पूंजी में शामिल करने के लिए पहले लागू एनपीए से संबंधित अतिरिक्त शर्त का पालन नहीं करना होगा। सीईटी-1 बैंक की मुख्य और उच्च गुणवत्ता वाली पूंजी होती है जो नुकसान की स्थिति में उसे पहला सुरक्षा कवच देती है। इसके सहारे बैंक किसी घाटे या संकट को झेल सकता है।
संशोधित प्रावधानों के तहत बैंक 'पूंजी-जोखिम भारित परिसंपत्ति अनुपात' (सीआरएआर) की गणना में चालू वर्ष के मुनाफे को तिमाही आधार पर जोड़ सकेंगे लेकिन इसके लिए उन्हें निर्धारित शर्तों और एक तय फार्मूले का पालन करना होगा। इसके साथ ही बैंकों के लिए प्रत्येक तिमाही में वित्तीय परिणामों का ऑडिट या सीमित समीक्षा कराना अनिवार्य होगा।
इसी तरह के निर्देश लघु वित्त बैंकों और भुगतान बैंकों के लिए भी जारी किए गए हैं। आरबीआई ने इस संबंध में मसौदा संशोधन अप्रैल में जारी कर हितधारकों से सुझाव मांगे थे। हालांकि, कुछ हितधारकों ने सालाना आधार पर सीईटी-1 गणना बनाए रखने की सलाह दी थी, जिसे आरबीआई ने स्वीकार नहीं किया।




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