pulses have become more expensive, while petrol diesel and gas are already wreaking havoc on household budgets दालें भी हुईं महंगी, पेट्रोल-डीजल और गैस पहले से ही बिगाड़ रहे घर का बजट, Business Hindi News - Hindustan
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दालें भी हुईं महंगी, पेट्रोल-डीजल और गैस पहले से ही बिगाड़ रहे घर का बजट

एक महीने में अरहर दाल की कीमतों में सबसे ज्यादा तेजी आई है। थोक बाजार में अरहर करीब 12 फीसदी महंगी होकर नौ हजार से 11,800 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास पहुंच गई है। उड़द दाल के दाम भी 500 से 800 रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़ गए हैं।

Mon, 25 May 2026 09:06 AMDrigraj Madheshia हिन्दुस्तान टीम
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दालें भी हुईं महंगी, पेट्रोल-डीजल और गैस पहले से ही बिगाड़ रहे घर का बजट

पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर पेट्रोल-डीजल और गैस के बाद अब भारत की रसोई पर भी दिखने लगा है। समुद्री मालभाड़ा और कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से दालों का आयात महंगा हो गया है। इसका असर घरेलू बाजार में अरहर, उड़द और मसूर जैसी दालों की थोक कीमतों पर पड़ रहा है। दूसरी तरफ चावल के निर्यात पर दबाव बढ़ने से उसकी कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है।

अरहर की दाल के भाव सबसे अधिक उछले

व्यापारियों के मुताबिक पिछले एक महीने में अरहर दाल की कीमतों में सबसे ज्यादा तेजी आई है। थोक बाजार में अरहर करीब 12 फीसदी महंगी होकर नौ हजार से 11,800 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास पहुंच गई है। उड़द दाल के दाम भी 500 से 800 रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़ गए हैं। वहीं, मार्च के बाद से मसूर दाल की कीमतों में करीब 10 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

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दालें महंगी होने की वजह

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तेजी के पीछे सबसे अहम वजह अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के चलते होर्मुज जलमार्ग के बंद होने से कच्चे तेल की कीमतों में आया उछाल है, जिससे माल ढुलाई से लेकर बीमा कवर की लागत बढ़ गई है, जिसका असर अन्य मार्गों से होने वाले आयात-निर्यात पर भी पड़ा है।

शिपिंग और कंटेनर नेटवर्क प्रभावित

भारत अपनी जरूरत की दालों का बड़ा हिस्सा म्यांमार, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीकी देशों से आयात करता है। दालों का ज्यादातर आयात सीधे होर्मुज मार्ग से नहीं होता, लेकिन इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से वैश्विक शिपिंग और कंटेनर नेटवर्क प्रभावित हुआ है।

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जोखिम शुल्क वसूल रहीं कंपनियां

तेल की कीमतों में उछाल आने से समुद्री मालभाड़ा और बीमा खर्च भी बढ़ गया है। कई शिपिंग कंपनियों ने पश्चिम एशिया मार्ग पर अतिरिक्त जोखिम शुल्क लगा रही हैं। इससे दाल आयात की लागत बढ़ गई है और इसका असर घरेलू बाजार में कीमतों पर पड़ रहा है।

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निर्यात धीमा होने से चावल सस्ता हुआ

उधर, चावल के निर्यात पर दबाव बढ़ने से उसकी कीमतों में गिरावट आई है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश है और पश्चिम एशिया के देशों को बड़ी मात्रा में बासमती और गैर-बासमती चावल भेजता है।

निर्यातकों के अनुसार पश्चिम एशिया जाने वाले जहाजों का बीमा और मालभाड़ा खर्च 15 से 25 फीसदी तक बढ़ गया है। इससे कई निर्यात सौदे महंगे हो गए हैं और नए ऑर्डर धीमे पड़े हैं। खासकर ईरान, इराक, यूएई और सऊदी अरब को होने वाले चावल निर्यात पर असर पड़ा है। इसी वजह से घरेलू बाजार में चावल की कीमतों में करीब 10 फीसदी तक गिरावट दर्ज की गई है।

हालांकि, दूसरी तस्वीर यह भी है कि कुछ निर्यातक अब महंगी दरों पर निर्यात करने को तैयार हुए है, जिसके चलते कुछ मंडियों से चावल की खरीद प्रक्रिया तेज हुई है, जिसका असर कीमतों में तेजी के रूप में भी देखने को मिला है लेकिन यह तेजी कुछ मंडियों व कुछ बाजारों तक सीमित है।

कितने चढ़े दाम

दाल थोक दाम (प्रति क्विंटल) वृद्धि खुदरा कीमत (प्रति किलोग्राम)

अरहर 9,000-₹11,800 12% 155 से 190

उड़द साबूत 7,500-9,000 10% 105 से 150

मसूर 56,00 से 7,500 10% 85 से 120

(सूचना: थोक दाम विभिन्न मंडियों के अनुसार है। वहीं, खुदरा कीमत दाल की गुणवत्ता के आधार पर है।)

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