SBI से ICICI बैंक तक प्रधानमंत्री जन धन योजना के 14.38 करोड़ खाते नहीं हैं एक्टिव
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में सबसे ज्यादा गिरावट आई है। ICICI बैंक में अब भी 65% खाते निष्क्रिय हैं। PMJDY ऐसे बचत खाते जिनमें लगातार दो साल तक ग्राहक की ओर से कोई लेन-देन (जमा, निकासी, ट्रांसफर) नहीं हुआ हो, निष्क्रिय या सुस्त खाता कहलाते हैं।

पीएम मोदी की सबसे महत्वाकांक्षी स्कीम्स में से एक प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) के तहत सरकारी बैंकों में निष्क्रिय और जीरो बैलेंस वाले खातों की संख्या बढ़कर 26% यानी 14.38 करोड़ हो गई है। वहीं, प्राइवेट बैंकों में यह आंकड़ा घटकर 36% (63 लाख) रह गया है। ये आंकड़े मार्च 2026 तक के हैं। मार्च 2026 के अंत तक सरकारी और निजी बैंकों में कुल PMJDY खातों की संख्या 58.18 करोड़ थी।
इन खातों में कुल जमा राशि ₹3.02 लाख करोड़ (अप्रैल 2026 की शुरुआत तक) रही। सरकारी बैंकों में 44.98 करोड़ खाते थे, जबकि निजी बैंकों में 2.08 करोड़ खाते थे।
पिछले साल की तुलना में कितना बदलाव?
मार्च 2025 में सरकारी बैंकों में 11.24 करोड़ (21%) इनएक्टिव खाते थे, जो अब बढ़कर 14.38 करोड़ हो गए है। केवल इंडियन बैंक और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के आंकड़े ही इसके उलट हैं, बाकी सभी सरकारी बैंकों में निष्क्रिय खातों की संख्या बढ़ी है।
सरकारी बैंकों की स्थिति: किसका प्रदर्शन कितना खराब?
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में सबसे ज्यादा गिरावट आई है। यहां निष्क्रिय खातों की संख्या दोगुनी से अधिक होकर 42 लाख तक पहुंच गई। SBI की सुस्ती दर 11% से बढ़कर 23% हो गई।
पंजाब नेशनल बैंक (PNB) और बैंक ऑफ बड़ौदा में 27% खाते निष्क्रिय हो गए हैं। बैंक ऑफ इंडिया और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की स्थिति और भी गंभीर है, जहां 36% खाते निष्क्रिय हैं। केनरा बैंक में 29%, बैंक ऑफ महाराष्ट्र में 20% और यूको बैंक में 15% निष्क्रिय खाते हैं।
निजी बैंकों में सुधार के संकेत
निजी बैंकों में कुल निष्क्रिय खाते पिछले साल 40% से घटकर 36% हो गए हैं। हालांकि, ICICI बैंक में अब भी 65% खाते निष्क्रिय हैं, जो सबसे ज्यादा है। कोटक महिंद्रा बैंक में भी निष्क्रियता बढ़कर 49% पहुंच गई।
वहीं एक्सिस बैंक (35%), इंडसइंड बैंक (25%) और IDBI बैंक (41%) ने अपने आंकड़ों में सुधार किया है। एचडीएफसी बैंक (9%) और आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (7%) में निष्क्रिय खातों का स्तर सबसे कम है।
आरबीआई की परिभाषा: किसे कहते हैं निष्क्रिय खाता?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अनुसार, ऐसे बचत खाते जिनमें लगातार दो साल तक ग्राहक की ओर से कोई लेन-देन (जमा, निकासी, ट्रांसफर) नहीं हुआ हो, निष्क्रिय या सुस्त खाता कहलाते हैं। इन्हें 'जॉम्बी अकाउंट्स' भी कहा जाता है।
निष्क्रिय खाते क्यों बढ़ रहे हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार, इसके कई कारण हैं। EGROW फाउंडेशन के चरण सिंह बताते हैं कि शुरुआत में कई डुप्लीकेट खाते खुल गए थे, जिन्हें अब हटाया जा रहा है। कोविड के बाद डेटाबेस की सफाई की जा रही है। सख्त KYC और आधार लिंकिंग नियमों का भी असर पड़ा है। साथ ही, MGNREGA और DBT पर निर्भरता कम होने से लोग इन खातों का उपयोग नहीं कर रहे हैं।
एमके ग्लोबल की माधवी अरोड़ा का कहना है कि कम आय वाले परिवारों के पास नियमित नकदी प्रवाह नहीं होता। इसके अलावा वित्तीय और डिजिटल साक्षरता की कमी भी एक बड़ी वजह है। प्रवासी मजदूर अक्सर कई राज्यों में खाते खोल लेते हैं, जिससे उनका 'घर वाला' खाता निष्क्रिय हो जाता है।
गौरतलब है कि PMJDY योजना JAM (जन धन-आधार-मोबाइल) ट्रिनिटी पर आधारित है। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 में ₹6.96 लाख करोड़ का डीबीटी वितरित किया, जो पिछले वर्ष ₹6.89 लाख करोड़ से अधिक है।




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