OMCs lose 20 rs per litre on sale of petrol and 100 rs per litre on diesel check detail एक लीटर पेट्रोल पर ₹20, डीजल पर ₹100 नुकसान, तेल कंपनियां ग्राहकों को देंगी झटका?, Business Hindi News - Hindustan
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एक लीटर पेट्रोल पर ₹20, डीजल पर ₹100 नुकसान, तेल कंपनियां ग्राहकों को देंगी झटका?

सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को पेट्रोल की बिक्री पर हर लीटर ₹20 और डीजल की बिक्री पर करीब ₹100 का नुकसान हो रहा है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमत को बढ़ाने की कोई योजना नहीं है।

Thu, 23 April 2026 11:22 PMDeepak Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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एक लीटर पेट्रोल पर ₹20, डीजल पर ₹100 नुकसान, तेल कंपनियां ग्राहकों को देंगी झटका?

पेट्रोल और डीजल के दाम नहीं बढ़ाए जाने से तेल कंपनियों को इससे बड़ा नुकसान हो रहा है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि तेल की ऊंची कीमतों के बीच, सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को पेट्रोल की बिक्री पर हर लीटर ₹20 और डीजल की बिक्री पर करीब ₹100 का नुकसान हो रहा है। सुजाता शर्मा ने बताया कि कच्चा तेल पिछले साल 70 डॉलर प्रति बैरल था और इस महीने औसतन 113 डॉलर से अधिक रहा।

कीमत बढ़ाने की योजना नहीं

हालांकि, सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमत को बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। बता दें कि पेट्रोलियम मंत्रालय ने विधानसभा चुनाव के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतें 25-28 रुपये प्रति लीटर बढ़ाए जाने का दावा करने वाली खबरों को खारिज कर दिया और कहा कि ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें अस्थिर हैं फिर भी उपभोक्ताओं को कीमतों में बढ़ोतरी से बचाने के लिए पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती जैसे कदम उठाए गए हैं।

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क्यों दी गई सफाई?

यह स्पष्टीकरण कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की एक रिपोर्ट के बाद आया है जिसमें संकेत दिया गया था कि पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में 29 अप्रैल को मतदान खत्म होने के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हो सकती है। कोटक ने कच्चे तेल की कीमत करीब 120 डॉलर प्रति बैरल रहने के आधार पर 25-28 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया था। मंत्रालय ने कहा कि ऐसी खबरें नागरिकों में डर एवं घबराहट पैदा करने के लिए पेश की जा रही हैं और ये भ्रामक, गुमराह करने वाली हैं।

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क्यों लगे कयास?

बता दें कि अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतें 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले तथा उसकी जवाबी कार्रवाई के बाद तेजी से बढ़ी हैं। इससे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक, फारस की खाड़ी को वैश्विक बाजारों से जोड़ने वाला और वैश्विक तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा संभालने वाला होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावी रूप से बंद हो गया है।

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ईरान युद्ध के बाद तेल की कीमतें लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 119 डॉलर तक पहुंच गई थीं। हालांकि बाद में कुछ गिरावट आई। नए सिरे से तनाव शुरू होने के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत 103-106 डॉलर प्रति बैरल के बीच बनी हुई है। कच्चे कच्चे तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक वृद्धि के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम अब तक नहीं बढ़े हैं।

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