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पेट्रोल-डीजल को लेकर किया जा रहा बड़ा खेल, एक्शन मोड में मोदी सरकार

पश्चिम एशिया संकट के बीच सरकार ने बुधवार को कहा कि देश में घरेलू मांग पूरी करने के लिए पेट्रोल और डीजल की पर्याप्त से अधिक आपूर्ति है और इन ईंधनों की कोई किल्लत नहीं है। इसके साथ ही सरकार ने सब्सिडी वाले खुदरा ईंधन को औद्योगिक उपयोग में लाए जाने पर चेतावनी भी दी।

Thu, 28 May 2026 02:23 PMDeepak Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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पेट्रोल-डीजल को लेकर किया जा रहा बड़ा खेल, एक्शन मोड में मोदी सरकार

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बाद अब ईंधन कमी की खबरें आने लगी हैं। हालांकि, केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने गुरुवार को देश में ईंधन की कमी की आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि भारत में पेट्रोल और डीजल की पर्याप्त उपलब्धता है और किसी प्रकार का आपूर्ति संकट नहीं है। इसके साथ ही सरकार ने ईंधन की कमी को लेकर किए जा रहे एक बड़े खेल का भी जिक्र किया है।

क्या कहा सरकार ने?

सरकार की ओर से जारी बयान के मुताबिक भारत की रिफाइनिंग क्षमता अभी 22 चालू रिफाइनरियों में सालाना 258.1 मिलियन टन है जबकि वित्त वर्ष 26 में घरेलू पेट्रोलियम की खपत 243.2 मिलियन टन थी। भारत ने इस साल 61.5 मिलियन टन पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात किया, जिससे वह रिफाइंड ईंधन के दुनिया के सबसे बड़े निर्यातकों में से एक बन गया।

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केंद्र सरकार ने कहा कि पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी देश भर में पेट्रोल और डीजल की बिना किसी रुकावट के सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMCs), राज्य सरकारों और उद्योग निकायों के लगातार संपर्क में हैं। सरकार की ओर से जारी बयान में यह भी कहा गया है कि अलग-अलग स्तर पर बैठकें की जा रही हैं।

क्या हो रहा खेल?

सरकार के अनुसार कुछ क्षेत्रों में जो समस्या दिखाई दे रही है, वह वास्तविक कमी नहीं बल्कि आर्बिट्राज की स्थिति है। आर्बिट्राज का मतलब है कि एक ही चीज को वहां से खरीदना जहां वह सस्ती हो और वहां इस्तेमाल या बेचना जहां वह महंगी हो, ताकि फायदा कमाया जा सके। सरकार के मुताबिक कुछ औद्योगिक उपभोक्ता कम कीमत का लाभ उठाने के लिए औद्योगिक आपूर्ति चैनलों की बजाय खुदरा पेट्रोल पंपों से डीजल खरीद रहे हैं। इससे कुछ स्थानों पर खुदरा आउटलेट्स पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है और स्थानीय स्तर पर कमी जैसी स्थिति दिखाई दे रही है। मंत्रालय ने कहा कि इस तरह की गतिविधियों से निजी ईंधन विक्रेताओं की डीजल बिक्री में करीब 38 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के माध्यम से थोक खपत में लगभग 29 प्रतिशत कमी आई है।

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इसके साथ ही सरकार ने राज्यों से ईंधन की जमाखोरी, कालाबाजारी, अवैध भंडारण और हेराफेरी पर रोक लगाने के लिए विशेष प्रवर्तन दल बनाने को कहा है। साथ ही आम लोगों से अपील की गई है कि वे अफवाहों से बचें और आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।

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अब भी तेल कंपनियों को बड़ा नुकसान

सरकार की ओर से जारी बयान के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद सरकारी तेल कंपनियों ने उसका पूरा बोझ आम उपभोक्ताओं पर नहीं डाला है। ऐसे में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी की बिक्री पर प्रतिदिन लगभग 550 करोड़ रुपये का नुकसान उठा रही हैं। आपको बता दें कि मई के महीने में अब तक 4 बार पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए गए हैं।

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