New salary rules in India: What the 50pc wage norm means for EPF, gratuity and take home pay EPFO और ग्रेच्युटी में बढ़ोतरी, लेकिन सैलरी होगी कम? समझें नया नियम, Business Hindi News - Hindustan
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EPFO और ग्रेच्युटी में बढ़ोतरी, लेकिन सैलरी होगी कम? समझें नया नियम

1 अप्रैल 2026 से लागू नए 50% वेज रूल के तहत कर्मचारियों की बेसिक सैलरी बढ़ेगी, जिससे EPF और ग्रेच्युटी में योगदान बढ़ेगा। इसका असर यह होगा कि हर महीने मिलने वाली टेक-होम सैलरी थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन लंबी अवधि में कर्मचारियों की बचत और सामाजिक सुरक्षा मजबूत होगी।

Wed, 8 April 2026 09:48 AMSarveshwar Pathak लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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EPFO और ग्रेच्युटी में बढ़ोतरी, लेकिन सैलरी होगी कम? समझें नया नियम

अगर आप नौकरीपेशा हैं, तो अप्रैल 2026 से आपकी सैलरी स्लिप में बड़ा बदलाव दिख सकता है। सरकार द्वारा लागू किए गए नए लेबर रूल्स के तहत अब सैलरी स्ट्रक्चर को पूरी तरह से नया रूप दिया गया है। इन बदलावों का सबसे अहम हिस्सा 50% वेज रूल है, जिसका सीधा असर आपकी टेक-होम सैलरी, EPF और ग्रेच्युटी पर पड़ेगा। आइए इसको जरा विस्तार से समझते हैं।

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नए नियम में क्या बदलाव?



नए नियमों के अनुसार, किसी भी कर्मचारी की कुल सैलरी (CTC) में बेसिक सैलरी, डीए (Dearness Allowance) और रिटेनिंग अलाउंस मिलाकर कम से कम 50% होना जरूरी है। पहले कई कंपनियां बेसिक सैलरी को कम रखकर HRA, बोनस और अन्य अलाउंस ज्यादा दिखाती थीं, जिससे कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी ज्यादा नजर आती थी। लेकिन, अब ऐसा करना संभव नहीं होगा। अगर अलाउंस 50% से ज्यादा होते हैं, तो अतिरिक्त हिस्सा बेसिक सैलरी में जोड़ दिया जाएगा।

EPF पर सबसे बड़ा असर

इस बदलाव का सबसे बड़ा असर EPF (Employees’ Provident Fund) पर पड़ेगा, क्योंकि EPF का कैलकुलेशन बेसिक सैलरी पर होता है, इसलिए बेसिक बढ़ने से PF में कर्मचारी और कंपनी दोनों का योगदान बढ़ जाएगा। इसका मतलब है कि हर महीने आपकी सैलरी से ज्यादा कटौती होगी और आपका टेक-होम सैलरी थोड़ा कम हो सकता है। हालांकि, यह पैसा आपकी भविष्य की बचत को मजबूत करेगा।

ग्रेच्युटी के नियमों में भी बड़ा बदलाव

ग्रेच्युटी के नियमों में भी बड़ा बदलाव आया है। अब फिक्स्ड-टर्म और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को सिर्फ 1 साल की नौकरी के बाद भी ग्रेच्युटी का लाभ मिल सकेगा, जबकि पहले इसके लिए 5 साल का इंतजार करना पड़ता था। साथ ही, क्योंकि ग्रेच्युटी का कैलकुलेशन आखिरी बेसिक सैलरी पर होता है, इसलिए बेसिक बढ़ने से रिटायरमेंट या नौकरी छोड़ने पर मिलने वाली रकम भी ज्यादा होगी।

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इन नए नियमों से आपकी मौजूदा इन-हैंड सैलरी थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन लंबे समय में यह आपके लिए फायदेमंद साबित होंगे। ज्यादा PF और ग्रेच्युटी का मतलब बेहतर रिटायरमेंट प्लानिंग और मजबूत वित्तीय सुरक्षा है। आसान शब्दों में कहें तो यह बदलाव आज की कम कमाई, लेकिन कल की ज्यादा सुरक्षा का फॉर्मूला लेकर आया है, जो कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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