New Labour Codes 2025 basic salary and PF will increase take home salary will decrease कम होगी इन हैंड सैलरी, बढ़ेगा PF, न्यू लेबर कोड से कर्मचारियों को क्या फायदा क्या नुकसान, Business Hindi News - Hindustan
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कम होगी इन हैंड सैलरी, बढ़ेगा PF, न्यू लेबर कोड से कर्मचारियों को क्या फायदा क्या नुकसान

New Labour Codes 2025: न्यू लेबर कोड के लागू होने से प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। जहां एक तरफ इनहैंड सैलरी कम होगी। वहीं, पीएफ कॉन्ट्रीब्यूशन अधिक होगा। 

Mon, 13 April 2026 07:06 PMTarun Pratap Singh लाइव हिन्दुस्तान
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कम होगी इन हैंड सैलरी, बढ़ेगा PF, न्यू लेबर कोड से कर्मचारियों को क्या फायदा क्या नुकसान

New Labour Codes 2025: प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए 1 अप्रैल 2026 से न्यू लेबर कोड प्रभावी हो चुका है। इस महीने की आपकी जो सैलरी आएगी उसपर न्यू लेबर कोड की छाप होगी। इसके लागू होने की वजह से कर्मचारियों की इन हैंड सैलरी कम हो जाएगी। वहीं, पीएम कॉन्ट्रीब्यूशन बढ़ेगा। ग्रेच्युटी को लेकर भी बड़ा बदलाव न्यू लेबर कोड में किया गया है। आइए समझते हैं कि न्यू लेबर कोड की वजह से प्राइवेट कर्मचारियों के सैलरी स्ट्रक्चर में क्या बदलाव होने जा रहा है?

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50 प्रतिशत होगा बेसिक पे (New Labour Codes Details)

अभी तक अगर अपना सीटीसी ध्यान से देखते होंगे तो उसमें पाते होंगे कि भत्ते अधिक रहते हैं। बेसिक सैलरी उसकी अपेक्षा कम होती है। लेकिन न्यू लेबर कोड के लागू होने की वजह से अब सैलरी का 50 प्रतिशत बेसिक पे रहेगा। वहीं, बाकि बचे 50 प्रतिशत में HRA सहित अन्य भत्ते रहेंगे।

बेसिक पे बढ़ने से क्या फायदा और क्या नुकसान

अगर आपका बेसिक पे बढ़ता है तो उस स्थिति में आपका पीएफ कॉन्ट्रीब्यूशन भी उसी हिसाब से बढ़ जाएगा। जिसकी वजह से आपकी इन हैंड सैलरी में थोड़ी सी कमी देखने को मिलेगी। बता दें, मौजूदा नियमों के अनुसार बेसिक पे का 12 प्रतिशत कर्मचारी को पीएफ में कॉन्ट्रीब्यूट करना होता है। वहीं, इतना ही नियोक्ता यानी कंपनी की तरफ से भी कॉन्ट्रीब्यूट किया जाता है। जिसकी वजह से आपका पीएफ ज्यादा होगा। अब आप न्यू लेबर कोड के जरिए लॉन्ग टर्म में ज्यादा बचत कर पाएंगे।

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ग्रेच्युटी से जुड़े नियमों में बदलाव

पहले ग्रेच्युटी के लिए कम से कम कंपनी में 5 साल की नौकरी करनी ही पड़ती थी। लेकिन न्यू लेबर कोड में इसे घटाकर 1 साल कर दिया गया है। यानी कोई भी कर्मचारी जो एक साल किसी कंपनी में नौकरी कर लेगा उस स्थिति में उसे ग्रेच्युटी का लाभ मिलेगा।

छुट्टियों को लेकर भी नियमों में संशोधन

अब कर्मचारी एक साल में अधिकतम 30 ईएल को अगले साल ट्रांसफर करवा सकते हैं। पहले कर्मचारी इन छुट्टियों को अगर नहीं लेता था तो उस स्थिति में कई कंपनियों यह समाप्त हो जाती थी। जिसकी वजह से हर साल नए स्तर पर छुट्टियां जारी होती थी। वहीं, अगर कर्मचारी 30 से अधिक छुट्टी की बचत एक साल में करता है तो उसे अन्य छुट्टियों के लिए कंपनी को भुगतान करना होगा।

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ओवराटइम पर पर एक्सट्रा पैसे

नए लेबर कोड में कर्मचारियों से अतिरिक्त घंटों में काम करवाने के लिए सैलरी का दोगुना भुगतान करना होगा।

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