कर्मचारियों की बढ़ गई मिनिमम पेंशन रकम? EPFO ने बता दिया पूरा सच
बीते कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा था कि कर्मचारी पेंशन योजना (EPS-95) के तहत न्यूनतम पेंशन राशि बढ़ाकर 7,500 रुपये प्रति माह कर दी गई है। अब EPFO ने इसका पूरा सच बता दिया।

अगर कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के कर्मचारी हैं तो ये खबर आपके काम की हो सकती है। दरअसल, बीते कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा था कि कर्मचारी पेंशन योजना (EPS-95) के तहत न्यूनतम पेंशन राशि बढ़ाकर 7,500 रुपये प्रति माह कर दी गई है। अब EPFO ने इस पर बयान दिया है।
क्या है मामला?
सोशल मीडिया पर एक पत्र तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया गया है कि कर्मचारी पेंशन योजना के तहत न्यूनतम पेंशन राशि बढ़ाकर 7,500 रुपये प्रति माह कर दी गई है। इस नोटिफिकेशन में यह भी बताया गया है कि बढ़ी हुई पेंशन 30 अप्रैल, 2026 से लागू होगी और संशोधित दर पर भुगतान 1 मई, 2026 से शुरू होगा। इस पत्र के मुताबिक सभी संबंधित विभागों और पेंशन बांटने वाली एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि वे इस प्रक्रिया को तुरंत और समय पर लागू करना सुनिश्चित करें। हालांकि, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने अब स्पष्ट किया है कि वह पत्र नकली है। EPFO ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा- न्यूनतम EPS पेंशन में बढ़ोतरी को लेकर जो चिट्ठी सर्कुलेट हो रही है, वह पूरी तरह से नकली है।
आई थी ये खबर
बीते दिनों ऐसी खबरें आई थीं कि श्रम और रोजगार मंत्रालय न्यूनतम EPS पेंशन को 1,000 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर अधिक करने पर विचार कर रहा है। हालांकि, सरकार ने यह साफ नहीं किया है कि EPS की न्यूनतम पेंशन कितनी बढ़ाई जाएगी लेकिन इस बढ़ोतरी से EPFO के उन कई सदस्यों को फायदा होने की संभावना है, जो न्यूनतम सीमा से कम पेंशन के हकदार हैं। जो कर्मचारी अपनी मासिक सैलरी से EPS में योगदान देते हैं (जिसमें सैलरी की ऊपरी सीमा 15,000 रुपये प्रति माह है) और जिन्होंने कम से कम 10 साल तक योगदान दिया है, वे आम तौर पर EPS पेंशन के हकदार होते हैं।
कुछ कर्मचारी, जो 1 सितंबर, 2024 से पहले इस स्कीम में शामिल हुए थे और जिन्होंने 15,000 रुपये की सैलरी सीमा से अधिक अपनी बेसिक सैलरी के आधार पर EPS में अधिक योगदान देने का विकल्प चुना था, वे सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के कारण पहले से ही अधिक EPS पेंशन के हकदार हैं। चूंकि उन्हें पहले से ही अधिक पेंशन मिल रही है, इसलिए इस बात की बहुत कम संभावना है कि न्यूनतम पेंशन में बढ़ोतरी का उन पर कोई असर पड़ेगा, जब तक कि यह बढ़ोतरी बहुत अधिक न हो।
इस स्कीम में एक अहम बदलाव 2014 में हुआ, जब सरकार ने यह घोषणा की कि 1 सितंबर, 2014 से, कोई भी नया कर्मचारी जो किसी कंपनी में 15,000 रुपये प्रति माह से अधिक की बेसिक सैलरी पर काम शुरू करता है, वह सिर्फ EPF में शामिल हो सकता है और EPS पेंशन फंड का सदस्य नहीं बन सकता।
EPS पेंशन में कितना योगदान होता है?
हर महीने EPFO कर्मचारी की सैलरी से EPS पेंशन के लिए तय रकम काट लेता है। यह कटौती कर्मचारी की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते (DA) के 8.33% या 1,250 रुपये, इनमें से जो भी अधिक हो, उतनी होती है। पेंशन की गणना पेंशन योग्य सेवा और पेंशन योग्य सैलरी के आधार पर की जाएगी, जिसमें सदस्य पेंशन और विधवा/विधुर/नॉमिनी/आश्रित माता-पिता की पेंशन के लिए कम से कम 1,000 रुपये और बच्चों की पेंशन के लिए 250 रुपये के अलावा अनाथ बच्चों की पेंशन के लिए 750 रुपये की न्यूनतम सीमा तय है।




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