बंदरगाहों की तेज रफ्तार! भारतीय अर्थव्यवस्था को मिला बड़ा बूस्ट, लक्ष्य के पार पहुंचा आंकड़ा
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के प्रमुख बंदरगाहों ने 915 मिलियन टन से अधिक कार्गो हैंडल कर रिकॉर्ड बनाया और तय लक्ष्य को भी पार कर लिया। 7.06% की यह वृद्धि देश के मजबूत होते लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकारी सुधारों का नतीजा है।

भारत के समुद्री क्षेत्र ने वित्त वर्ष 2025-26 में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है, जिसने देश की आर्थिक मजबूती को नई रफ्तार दी है। मिनिस्ट्री ऑफ पोर्ट्स, शिपिंग एंड वाटरवेज के तहत आने वाले प्रमुख बंदरगाहों ने इस दौरान कुल 915.17 मिलियन टन कार्गो हैंडल किया, जो तय किए गए 904 मिलियन टन के लक्ष्य से भी ज्यादा है। खास बात यह है कि यह प्रदर्शन पिछले साल के मुकाबले 7.06% की मजबूत वृद्धि दर्शाता है। यह आंकड़ा साफ संकेत देता है कि भारत का लॉजिस्टिक्स और ट्रेड इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से मजबूत हो रहा है और वैश्विक स्तर पर अपनी पकड़ बना रहा है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।
इस उपलब्धि के पीछे सरकार की कई बड़ी नीतियां और सुधार काम कर रहे हैं। पीएम मोदी (Narendra Modi) के विजन और मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047 (Maritime Amrit Kaal Vision 2047) के तहत बंदरगाहों को आधुनिक बनाने, डिजिटल टेक्नोलॉजी अपनाने और मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को बेहतर करने पर लगातार काम किया जा रहा है। इससे न सिर्फ कार्गो हैंडलिंग क्षमता बढ़ी है, बल्कि माल ढुलाई का समय भी कम हुआ है, जिससे व्यापार करना आसान हुआ है।
अगर प्रमुख बंदरगाहों की बात करें, तो दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण (Deendayal Port Authority) 160.11 मिलियन टन के साथ सबसे आगे रहा, जबकि पैराडिप पोर्ट अथॉर्टी (Paradip Port Authority) और जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉर्टी (Jawaharlal Nehru Port Authority) ने भी शानदार प्रदर्शन किया।
इसके अलावा विशाखापत्तनम बंदरगाह प्राधिकरण (Visakhapatnam Port Authority), मुंबई पोर्ट अथॉर्टी (Mumbai Port Authority) और चेन्नई पोर्ट अथॉर्टी (Chennai Port Authority) जैसे बड़े पोर्ट्स ने भी कुल कार्गो हैंडलिंग में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
ग्रोथ के मामले में मोरमुगाओ बंदरगाह प्राधिकरण (Mormugao Port Authority) ने सबसे तेज 15.91% की वृद्धि दर्ज की, जो यह दिखाता है कि छोटे और मिड-साइज पोर्ट्स भी अब तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इस पूरी सफलता के पीछे कोयला, कच्चा तेल, कंटेनर, उर्वरक और पेट्रोलियम जैसे प्रमुख सामानों की बढ़ती मांग भी एक बड़ा कारण रही है।
यह रिकॉर्ड प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि भारत का समुद्री सेक्टर अब सिर्फ घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक व्यापार में भी अहम भूमिका निभाने लगा है। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, तेज लॉजिस्टिक्स और मजबूत नीतियों के चलते आने वाले सालों में भारत एक ग्लोबल मैरिटाइम हब बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।




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