Iran-US War Crisis affect sulphur suplly distrupted farmers in big trouble LPG और तेल ही नहीं, किसानों सामने भी खड़ी है बड़ी समस्या, इस वजह से बढ़ी टेंशन, Business Hindi News - Hindustan
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LPG और तेल ही नहीं, किसानों सामने भी खड़ी है बड़ी समस्या, इस वजह से बढ़ी टेंशन

Iran-US War Crisis: अमेरिका-ईरान युद्ध की वजह से सल्फर की सप्लाई प्रभावित हुई है। जिसकी वजह से देश के किसानों के सामने नया संकट खड़ा हो गया है। बता दें, तेल और एलपीजी की आपूर्ति पर पहले से ही असर पड़ रहा है। 

Tue, 14 April 2026 11:18 AMTarun Pratap Singh लाइव हिन्दुस्तान
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LPG और तेल ही नहीं, किसानों सामने भी खड़ी है बड़ी समस्या, इस वजह से बढ़ी टेंशन

Iran-US War Crisis: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के प्रभावित होने की वजह से सिर्फ तेल और एलपीजी ही नहीं सल्फर की समस्या खड़ी हो सकती है। सल्फर आज के समय में फर्टीलाइजर्स, बैटरी, केमिकल्स, मेटल्स और सेमीकंडक्टर्स के लिए जरूरी है। यूरिया से कंप्यूटर चिप्स तक के लिए सलफ्यूरिक एसिड काफी जरूरी है। लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बाधित होने की वजह से फैक्टरी प्रोडक्शन धीमा और फूड की कीमतें बढ़ सकती हैं। बता दें, भारत अपनी जरूरत का बढ़ा हिस्सा खाड़ी के देशों से मंगाता है। ऐसे में सल्फर की आपूर्ति प्रभावित होने की वजह से खाद की कीमतों पर असर दिखेगा। इससे किसानों के सामने नई समस्या खड़ी हो सकती है।

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Modern War Institute ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया की जरूरत का 50 प्रतिशत समुद्री सल्फर गुजरता है। जब से युद्ध शुरू हुआ है तब से 44000 कंपनियों का कम से कम एक शिपमेंट प्रभावित हुआ है।

सल्फर क्यों है इतना जरूरी?

खाड़ी के देशों से दुनिया के एक्सपोर्ट का 45 प्रतिशत उत्पादन होता है। तेल और गैस रिफाइनिंग का सल्फर एक बायप्रोडक्ट है। ऐसे में तेल की आपूर्ति प्रभावित होने का सीधा असर सल्फर पर पड़ता है। बता दें, दुनिया का 60 प्रतिशत सल्फर डिमांड सिर्फ फर्टीलाइजर्स के लिए आता है। बाकि बचा 40 प्रतिशत केमिकल्स, मेटल प्रोसेशिंग, बैटरी और चिप फाइब्रेकेशन के लिए होता है।

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भारत के लिए क्यों है चिंता की बात

यूरिया और फॉस्फेट फर्टीलाइजर्स के लिए सल्फर बहुत जरूरी है। सल्फर की आपूर्ति प्रभावित होने की स्थिति में सरकार पर खाद की सब्सिडी बढ़ाने का दबाव होगा। वहीं, किसानों का उत्पादन खर्च बढ़ सकता है। खाद्य महंगाई में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। केमिकल और मेटल का प्रोडक्शन करने वाले लोगों की लागत बढ़ने का दबाव रहेगा।

चीन ने भी दिखाई सख्ती

मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए चीन ने मई से सल्फ्यूरिक एसिड के एक्सपोर्ट को रोकने का संकेत दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह 2026 सख्ती 2026 तक लगाई जा सकती है। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार जब से युद्ध शुरू हुआ है तब से चीन में सल्फर की कीमतों में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली है।

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सरकार ने सब्सिडी में किया इजाफा

इस महीने की शुरुआत में केंद्र सरकार ने आने वाले खरीफ फसल के लिए न्यूट्रियन्ट आधारित सब्सिडी में करीब 12 प्रतिशत का इजाफा किया है। अगर युद्ध लम्बा खींचा तब की स्थिति में सरकार पर भी दबाव बढ़ेगा। ऐसे में सरकार के पास तब दो ही विकल्प रह जाएंगे। पहला विकल्प कीमतों को किसानों तक बढ़ा दिया जाए। या फिर सरकार के स्तर पर खर्च उठाया जाए।

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