इंडिगो के शेयर क्रैश, क्रूड के दाम और 500 से ज्यादा फ्लाइट्स कैंसिलेशन ने किया बंटाधार
IndiGo shares crash: ईरान-इजरायल युद्ध की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग और फ्लाइट्स कैंसिल होने की वजह से इंडिगो को डबल झटका लगा है। दूसरी ओर आज शेयर मार्केट में तबाही के बीच इंडिगो के शेयर भी क्रैश हो गए।

ईरान-इजरायल युद्ध की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग और फ्लाइट्स कैंसिल होने की वजह से इंडिगो को डबल झटका लगा है। दूसरी ओर आज शेयर मार्केट में तबाही के बीच इंडिगो के शेयर भी क्रैश हो गए। सोमवार को शुरुआती कारोबार में इंडिगो के शेयरों में 8% की भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह गिरकर ₹4,045 प्रति शेयर पर आ गए। यह लगातार दूसरे सेशन में शेयरों में गिरावट है।
सोमवार को इंडिगो का शेयर ₹4,150 पर खुला, जबकि पिछले शुक्रवार को यह ₹4,404 पर बंद हुआ था। 6 मार्च को भी यह एविएशन स्टॉक करीब 2.41% की गिरावट के साथ बंद हुआ था। मार्च 2026 में अब तक इंडिगो के शेयरों में 11% से अधिक की गिरावट आ चुकी है।
युद्ध का असर: निवेशक चिंतित
बाजार के जानकारों के मुताबिक, इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों का आसमान छूना है। कच्चा तेल 2022 के बाद पहली बार $100 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जो इसका 52 सप्ताह का उच्चतम स्तर है।
ब्रोकरेज फर्म जेएम फाइनेंशियल का कहना है कि इंडिगो की ईंधन लागत के प्रति अधिक संवेदनशीलता और सीमित हेजिंग को देखते हुए, क्रूड ऑयल में भू-राजनीतिक उछाल मार्जिन के लिए जोखिम पैदा करता है। फर्म के अनुसार, ब्रेंट क्रूड की कीमत में हर 5 डॉलर के इजाफे से इंडिगो की कमाई में करीब 13% की गिरावट आने की आशंका है।
फ्लाइट कैंसिलेशन से बढ़ी मुश्किलें
इंडिगो के शेयरों पर तब और दबाव बढ़ा जब कंपनी ने मध्य पूर्व के लिए अपनी उड़ानें स्थगित कर दीं। दरअसल, अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हमले के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया था, जिसके चलते कई देशों में जवाबी कार्रवाई हुई।
कंपनी ने 4 मार्च को शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया, "ईरान और मध्य पूर्व में हवाई क्षेत्र पर बढ़ती पाबंदियों को देखते हुए, 28 फरवरी 2026 से 3 मार्च 2026 के बीच मध्य पूर्व और कुछ चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों के लिए 500 से अधिक उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं। हम यात्रियों को होने वाली असुविधा को कम करने के लिए लगातार स्थिति का आकलन कर रहे हैं और अपने उड़ान कार्यक्रम को फिर से तैयार कर रहे हैं।"
ब्रोकरेज फर्म की राय
ब्रोकरेज फर्म जेएम फाइनेंशियल का मानना है कि इंडिगो की संरचनात्मक ताकतें जैसे कम लागत वाला नेतृत्व, मजबूत तरलता और मजबूत घरेलू मांग, इसे इन अस्थायी झटकों को झेलने की ताकत देती हैं। हालांकि, मध्य पूर्व में व्यवधान अंतरराष्ट्रीय क्षमता में रुकावट और ईंधन की कीमतों में अस्थिरता के कारण निकट भविष्य में कमाई और निवेशकों के विश्वास पर नकारात्मक असर डाल सकता है।
फर्म ने आगे कहा कि अगर जल्दी ही तनाव कम हो जाता है, तो संचालन और बुकिंग सामान्य हो सकती है। लेकिन अगर यह स्थिति लंबी खिंचती है, तो क्षमता में कटौती, मार्जिन में कमी और अनुमानों में गिरावट का जोखिम है। फिलहाल, हवाई क्षेत्र पर पाबंदियां कितने दिनों तक रहेंगी और क्रूड ऑयल की कीमतों का रुख क्या होगा, यही स्टॉक की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे।
कैसा रहा है इंडिगो शेयर का प्रदर्शन?
हाल के दिनों में इंडिगो की मूल कंपनी इंटरग्लोब एविएशन के शेयरों का रुख ज्यादातर कमजोर बना हुआ है। पिछले एक महीने में स्टॉक में करीब 18% की गिरावट आई है, जबकि इस साल (2026) में अब तक यह लगभग 20% लुढ़क चुका है।
पिछले एक साल में इंडिगो के शेयरों में 12.26% की और गिरावट आई है। हालांकि, लॉन्ग टर्म के नजरिए से देखें तो यह स्टॉक मल्टीबैगर रहा है। तीन साल में इसने 119% और पांच साल में 142% का जबरदस्त रिटर्न दिया है।
बता दें कि इंडिगो के शेयर एनएसई और बीएसई दोनों पर लिस्टेड हैं। इस मल्टीबैगर एविएशन स्टॉक ने 18 अगस्त, 2025 को अपना 52-सप्ताह का उच्चतम स्तर ₹6,232.50 छुआ था, जबकि 9 मार्च, 2026 को यह अपने 52-सप्ताह के निचले स्तर ₹4,035 पर पहुंच गया।
(डिस्क्लेमर: एक्सपर्ट्स की सिफारिशें, सुझाव, विचार और राय उनके अपने हैं, लाइव हिन्दुस्तान के नहीं। यहां सिर्फ शेयर के परफॉर्मेंस की जानकारी दी गई है, यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट में निवेश जोखिमों के अधीन है और निवेश से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें।)




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