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2 महीने के हाई पर कोर सेक्टर के आंकड़े, सीमेंट समेत इस सेक्टर ने दी रफ्तार

इस्पात, सीमेंट और बिजली के बेहतर प्रदर्शन से अप्रैल में आठ प्रमुख उद्योगों की उत्पादन वृद्धि दो महीने के उच्चतम स्तर 1.7 प्रतिशत पर पहुंच गई। इस माह के दौरान कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद और उर्वरक उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई।

Wed, 20 May 2026 11:37 PMDeepak Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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2 महीने के हाई पर कोर सेक्टर के आंकड़े, सीमेंट समेत इस सेक्टर ने दी रफ्तार

अप्रैल महीने के कोर सेक्टर के आंकड़े जारी कर दिए गए हैं। इस्पात, सीमेंट और बिजली के बेहतर प्रदर्शन से अप्रैल में आठ प्रमुख उद्योगों की उत्पादन वृद्धि दो महीने के उच्चतम स्तर 1.7 प्रतिशत पर पहुंच गई। पिछले वर्ष इसी महीने में आठ उद्योगों में एक प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। इससे पहले, मार्च में वृद्धि दर 1.2 प्रतिशत थी। आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल माह के दौरान कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद और उर्वरक उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई। इस्पात, सीमेंट और बिजली उत्पादन में अप्रैल में क्रमशः 6.2 प्रतिशत, 9.4 प्रतिशत और 4.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च की निदेशक (अर्थशास्त्र) मेघा अरोड़ा ने कहा कि अप्रैल में उद्योगों के बेहतर प्रदर्शन से आगामी औद्योगिक उत्पादन वृद्धि लगभग पांच प्रतिशत तक रहने की उम्मीद है। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में बुनियादी उद्योगों का योगदान 40.27 प्रतिशत है। अरोड़ा ने कहा कि इंडिया रेटिंग्स को उम्मीद है कि कमजोर तुलनात्मक आधार और उर्वरक उत्पादन में संभावित सुधार के कारण मई, 2026 में लगभग तीन प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ बुनियादी उद्योगों में सुधार जारी रहेगा। इक्रा के वरिष्ठ अर्थशास्त्री राहुल अग्रवाल ने कहा कि इस्पात, सीमेंट और बिजली उत्पादन को छोड़कर, आठ में से पांच क्षेत्रों में उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई। इससे पता चलता है कि कुछ क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित हुई है।

जीडीपी में गिरावट का अनुमान

इस बीच, संयुक्त राष्ट्र ने पश्चिम एशिया संकट से वैश्विक अनिश्चितताओं और आर्थिक झटकों का हवाला देते हुए 2026 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान 6.6 प्रतिशत से घटाकर 6.4 प्रतिशत कर दिया है। हालांकि, भारत अब भी सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया कि पश्चिम एशिया संकट ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक और झटका दिया है जिससे वृद्धि धीमी हुई है, मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ा है और अनिश्चितता उत्पन्न हुई है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 2027 में देश की वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत हो सकती है।

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इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर घटकर 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान जताते हुए कहा कि मांग और आपूर्ति दोनों में सुस्ती और वैश्विक अनिश्चितताएं इसकी प्रमुख वजह होंगी। रेटिंग एजेंसी का यह अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक के 6.9 प्रतिशत की वृद्धि दर के अनुमान से कम है। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने मुद्रास्फीति दर 4.6 प्रतिशत पर रहने का अनुमान लगाया है।

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