इनकम टैक्स डिपॉर्टमेंट का नया फॉर्म नं. 128, जानें किसके लिए है जरूरी
Income Tax New Rules: नए आयकर अधिनियम, 2025 के तहत फॉर्म 13 की जगह नया फॉर्म नं. 128 शुरू किया गया है। इसे कोई भी टैक्सपेयर चाहे भारतीय हो या अनिवासी, भर सकता है।

इनकम टैक्स डिपॉर्टमेंट ने पुराने फॉर्म 13 की जगह नया फॉर्म नं. 128 शुरू किया है। यह बदलाव नए आयकर अधिनियम, 2025 के तहत किया गया है। इस फॉर्म का उपयोग करके करदाता टीडीएस (कटौती) या टीसीएस (कलेक्शन) की दर कम या शून्य कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। अगर आपकी असली टैक्स देनदारी डिफॉल्ट रेट से कम है, तो यह फॉर्म आपके लिए फायदेमंद है।
कौन आवेदन कर सकता है?
इस नए फॉर्म 128 को कोई भी टैक्सपेयर चाहे भारतीय हो या अनिवासी, भर सकता है। यह फॉर्म वैकल्पिक है। केवल तभी भरें जब जरूरत हो। आवेदन लेन-देन या भुगतान होने से पहले जमा करना होगा। अगर टैक्स कट चुका है, तो आवेदन मान्य नहीं होगा। हमेशा काफी पहले आवेदन करें, ताकि देरी न हो।
ऑनलाइन कैसे करें अप्लाई
यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल है। यानी ऑफलाइन भरने की कोई सुविधा नहीं है। इसके लिए सबसे पहले TRACES पोर्टल पर जाएं।
1. TRACES में लॉगिन करें
2. फॉर्म नं. 128 सेक्शन में जाएं
3. अनुमानित आय और टैक्स देनदारी भरें
4. जरूरी दस्तावेज अपलोड करें
5. ई-वेरीफिकेशन करें और आवेदन सबमिट करें
क्या-क्या जानकारी देना जरूरी है?
संबंधित टैक्स ईयर की अनुमानित आय
अनुमानित टैक्स देनदारी
पिछले सालों की आय (अगर रिटर्न नहीं भरा था)
छूट वाली आय (अगर हो)
पैन कार्ड (PAN) अनिवार्य है
कितनी बार कर सकते हैं आवेदन?
कोई सीमा नहीं है। आप एक साल में कई बार फॉर्म नं. 128 जमा कर सकते हैं। अगर आय का अनुमान बदलता है तो भी।
आवेदन जमा करने के बाद क्या होगा?
· आपको ARN (Acknowledgment Receipt Number) मिलेगा
· इस नंबर से आप आवेदन की स्थिति ट्रैक कर सकते हैं
· मंजूर होने पर सर्टिफिकेट TRACES से डाउनलोड कर सकते हैं
अगर आपके 100 से अधिक भुगतानकर्ता हैं और आपके पास सबके डिटेल्स नहीं हैं, तो Annexure-II का उपयोग करें। आपके नाम पर एक मुख्य सर्टिफिकेट जारी होगा। आप हर भुगतानकर्ता के लिए "चाइल्ड सर्टिफिकेट" बना सकते हैं। हर चाइल्ड सर्टिफिकेट बताएगा कि कितनी दर से टैक्स काटना है।
क्या आवेदन वापस ले सकते हैं?
हां। प्रोसेसिंग से पहले किसी भी समय आवेदन वापस लिया जा सकता है।
फॉर्म 13 से फॉर्म 128 क्यों?
· नए आयकर अधिनियम, 2025 के तहत धाराएं और नियम बदले हैं।
· उद्देश्य है अत्यधिक टैक्स कटौती से बचना।
· अब प्रक्रिया अधिक सरल और पूरी तरह डिजिटल है।
डिसक्लेमर: यह जानकारी केवल सामान्य समझ के लिए है। अपनी विशेष स्थिति में टैक्स एडवाइजर से सलाह जरूर ले लें।




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