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पेट्रोल का दाम कहीं दोगुना हुआ तो डीजल ढाई गुना, भारत में क्यों है राहत

Petrol Diesel Price Today: ईरान संकट के बाद दुनिया में ईंधन की कीमतों में तेज उछाल आया है, लेकिन भारत ने अभी तक इस झटके को सीमित रखा है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि यह स्थिरता कब तक बनी रहती है और वैश्विक बाजार का दबाव कब असर दिखाता है।

Mon, 27 April 2026 06:33 AMDrigraj Madheshia लाइव हिन्दुस्तान
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पेट्रोल का दाम कहीं दोगुना हुआ तो डीजल ढाई गुना, भारत में क्यों है राहत

ईरान संकट के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में आई तेज उछाल का असर दुनिया भर के फ्यूल मार्केट पर साफ दिख रहा है। क्रूड ऑयल आज भी 100 डॉलर के पार हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमत 107 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई हैं। इस बीच ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के रेट अपडेट कर दी हैं।

आज के रेट के मुताबिक दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर उपलब्ध है। जबकि, पड़ोसी देशों में कीमतें आसमान छू रही हैं। पाकिस्तान में पेट्रोल 123.05 और चीन में 131.13 रुपये लीटर है। श्रीलंका में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 134.60 रुपये पर पहुंच गई है।

दूसरी ओर नेपाल में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 137.12 रुपये तक पहुंच गई है। जबकि, भूटान में पेट्रोल 102.78 रुपये लीटर पर पहुंच गया है। बंग्लादेश में भी पेट्रोल 106.85 रुपये लीटर है। जबकि, म्यांमार में 147.54 रुपये।

दुनिया में सबसे अधिक दाम कहां बढ़े

अगर दुनिया की बात करें तो ग्लोबल पेट्र्रोल प्राइस डॉट कॉम का लेटेस्ट डेटा बताता है कि कई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ऐतिहासिक बढ़ोतरी हुई है। खासकर एशिया और छोटे विकासशील देशों में यह असर ज्यादा देखने को मिला।

म्यांमार में पेट्रोल की कीमतें 101% और डीजल 161% तक बढ़ गईं, जो इस लिस्ट में सबसे ज्यादा उछाल है। लाओस, फिलीपींस और मलेशिया जैसे देशों में भी डीजल की कीमतों में 100% के आसपास बढ़ोतरी दर्ज की गई। न्यूजीलैंड और यूएई जैसे अपेक्षाकृत विकसित बाजार भी इस झटके से अछूते नहीं रहे, जहां 80-100% तक बढ़ोतरी देखी गई।

भारत में क्यों नहीं बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम

इस वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत का डेटा चौंकाने वाला है। यहां पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 0% बदलाव दिख रहा है। यह संकेत देता है कि सरकार और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय कीमतों के झटके को सीधे उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचने दिया।

भारत में ईंधन कीमतों को लेकर एक “संतुलन रणनीति” अपनाई जाती है, जिसमें टैक्स, सब्सिडी और कंपनियों के मार्जिन के जरिए कीमतों को नियंत्रित किया जाता है। यही वजह है कि जब दुनिया के कई देशों में ईंधन महंगा हो रहा है, भारत में कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।

क्या भारत में भी बढ़ सकती हैं कीमतें?

सरकार का कहना है कि आगे भी कीमतें स्थिर रखने की कोशिश जारी रहेगी। सरकार के मुताबिक अप्रैल 2022 के शुरू से ही पेट्रोल और डीजल के रिटेल दाम नहीं बदले हैं। इस दौरान कई महीने तेल के दाम बढ़े भी और कई महीने घटे भी। जब कीमतें कम थीं, तब सरकारी तेल कंपनियों (PSU) को अच्छा मुनाफा हुआ, जिसका इस्तेमाल उन्होंने बाद में बढ़ी हुई कीमतों के नुकसान को पाटने में किया। इस संकट के दौरान उपभोक्ताओं के हित में भारत सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है।

दूसरी ओर विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो भारत में भी कीमतों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। फिलहाल सरकार कीमतों को स्थिर रखकर महंगाई को काबू में रखने की कोशिश कर रही है।

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