HDFC Bank Share: विदेशी निवेशकों ने बेचे 48 करोड़ शेयर, 26% टूटा स्टॉक, खरीदारी का मौका या रिस्क?
HDFC Bank में FII ने 48 करोड़ शेयर बेचे। मार्च तिमाही में बैंक का शेयर करीब 26% गिरा। इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण गवर्नेंस से जुड़ी चिंताएं रहीं। जानें क्या यह गिरावट खरीदारी का मौका है या जोखिम…
भारत के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक एचडीएफसी बैंक में विदेशी निवेशकों (FII) ने मार्च तिमाही में बड़ी बिकवाली की है। इस दौरान एफआईआई ने करीब 48 करोड़ शेयर बेचकर अपनी हिस्सेदारी 47.67% से घटाकर 44.05% कर दी। लगातार तीसरी तिमाही में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी घटी है।
शेयर में 26% गिरावट, गवर्नेंस बना बड़ा मुद्दा
मार्च तिमाही में बैंक का शेयर करीब 26% गिरा। इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण गवर्नेंस से जुड़ी चिंताएं रहीं। पूर्व चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे ने निवेशकों का भरोसा कमजोर कर दिया। उनके इस्तीफे के बाद एक ही दिन में शेयर 8.7% गिरा और कुछ ही दिनों में अरबों डॉलर का मार्केट वैल्यू घट गया।
म्यूचुअल फंड बने सहारा
जहां विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे हैं, वहीं घरेलू म्यूचुअल फंड्स ने इस गिरावट को खरीदारी का मौका माना। म्यूचुअल फंडों ने हिस्सेदारी 26.66% से बढ़ाकर 29.54% कर लिया। इससे साफ है कि घरेलू निवेशकों को अभी भी बैंक के फंडामेंटल्स पर भरोसा है।
सेबी और RBI की नजर
द इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक एचडीएफसी मामले ने नियामकों का ध्यान भी खींचा है। SEBI ने प्रारंभिक जांच शुरू की तो आरबीआई ने फिलहाल कोई बड़ी गवर्नेंस चिंता नहीं जताई। यानी जांच जारी है, लेकिन सिस्टम पर अभी बड़ा खतरा नहीं माना गया।
एनालिस्ट और स्ट्रैटेजिस्ट की अलग-अलग राय
यहां शेयर के आउटलुक पर दिलचस्प बात देखने को मिल रही है। जेफरीज के स्ट्रैटेजिस्ट ने स्टॉक बेचने की सलाह दी है तो वहीं एनालिस्ट्स ने BUY रेटिंग बरकरार रखी है। टार्गेट प्राइस ₹1240 का रखा है। एनालिस्ट्स का मानना है कि वैल्यूएशन सस्ता हो चुका है और गिरावट जरूरत से ज्यादा हुई है। आगे ग्रोथ की संभावना बनी हुई है।
आगे क्या हो सकते हैं ट्रिगर्स?: स्टॉक में तेजी के लिए जो फैक्टर अहम होंगे, उनमें नए चेयरमैन की नियुक्ति, CEO टर्म पर स्पष्टता, गवर्नेंस मुद्दों का समाधान। इनसे निवेशकों का भरोसा लौट सकता है।
क्या हैं बड़े रिस्क?
ब्याज दरों में बढ़ोतरी और फंडिंग लागत में दबाव, प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग की धीमी ग्रोथ जैसे ये फैक्टर बैंक के मार्जिन पर असर डाल सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि HDFC Ltd के साथ मर्जर के फायदे अभी पूरी तरह सामने नहीं आए हैं। आगे संभावित फायदे की बात करें तो क्रास सेलिंग, बेहतर ऑपरेशन, मजबूत डिपॉजिट ग्रोथ देखने को मिल सकता है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत: फिलहाल स्थिति मिश्रित है। जैसे विदेशी निवेशक बेच रहे हैं। म्यूचुअल फंडस खरीद रहे हैं और एनालिस्ट बुलिश हैं। यानी स्टॉक में शॉर्ट टर्म वोलैटिलिटी, लेकिन लॉन्ग टर्म पोटेंशियल बना हुआ है।
गिरावट में मौका या जोखिम: HDFC Bank फिलहाल दबाव में है, लेकिन वैल्यूएशन आकर्षक हो चुका है। आने वाले समय में गवर्नेंस क्लियरिटी ही तय करेगी कि यह स्टॉक तेजी पकड़ेगा या और दबाव में आएगा।
(डिस्क्लेमर: एक्सपर्ट्स की सिफारिशें, सुझाव, विचार और राय उनके अपने हैं, लाइव हिन्दुस्तान के नहीं। शेयर मार्केट में निवेश जोखिमों के अधीन है और निवेश से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें।)




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