भारत पर बढ़ा खाद संकट, DAP आयात 30% महंगा; सब्सिडी बोझ बढ़ने की आशंका
Urea DAP Crisis: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के किसानों से रासायनिक खादों का कम उपयोग करने और प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील यूं ही नहीं की है। देश को डीएपी और यूरिया का आयात महंगे दामों पर करना पड़ रहा है। असली चुनौती तो धान की रोपाई के बाद शुरू होगी।

पश्चिम एशिया संकट और अमेरिका-ईरान टेंशन का असर अब भारत के किसानों पर भी देखने को मिल सकता है। खरीफ सीजन से पहले भारत को महंगे दामों पर डीएपी (DAP) और यूरिया आयात करना पड़ रहा है। इससे सरकार पर खाद की सब्सिडी का बोझ बढ़ने की आशंका है। इसके अलावा किसानों को खाद की किल्लत का सामना करना पड़ सकता है। बता दें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को देश के किसानों से रासायनिक खादों का कम उपयोग करने और प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील कर चुके हैं।
डीएपी 920 से 930 डॉलर प्रति टन तक पहुंची
रूरल वॉयस की खबर के मुताबिक भारत की फर्टिलाइजर्स कंपनियों ने खरीफ सीजन के लिए करीब 15 लाख टन डीएपी आयात के सौदे किए हैं। सूत्रों के मुताबिक, फरवरी में डीएपी की ग्लोबल प्राइस 720 से 730 डॉलर प्रति टन थी, लेकिन अब यह बढ़कर 920 से 930 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई है। यानी आयात लागत में करीब 30% की बढ़ोतरी हुई है। ऊपर से रुपये के मुकाबले डॉलर का महंगा होना भी कोढ़ में खाज का काम कर रहा है।
युद्ध के बाद डबल से अधिक हो गई यूरिया की कीमत
इसके अलावा खेती में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाले फर्टिलाइजर यूरिया का आयात भी भारी महंगा हो गया है। भारत ने लगभग 25 लाख टन यूरिया आयात के लिए 935 से 959 डॉलर प्रति टन की दर पर सौदे किए हैं, जबकि ईरान युद्ध से पहले यही कीमत करीब 435 डॉलर प्रति टन थी।
मोरक्को और चीन से सप्लाई प्रभावित
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, चीन फिलहाल डीएपी निर्यात नहीं कर रहा है। वहीं सल्फर की कमी के कारण मोरक्को में डीएपी उत्पादन प्रभावित हुआ है। सल्फ्यूरिक एसिड, जो डीएपी निर्माण का अहम कच्चा माल है, सल्फर से तैयार होता है।
LNG संकट से घरेलू उत्पादन प्रभावित
खाड़ी देशों से LNG सप्लाई में रुकावट आने से भारत में घरेलू उर्वरक उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। भारत का प्रमुख LNG सप्लायर कतर है, जहां से सप्लाई कम होने का असर सीधे खाद उत्पादन पर पड़ रहा है।
1 मार्च से 10 मई के बीच भारत का कुल खाद का उत्पादन घटकर 76.78 लाख टन रह गया, जो पिछले साल इसी अवधि में 92.01 लाख टन था। यूरिया और NPK उर्वरकों का उत्पादन भी तेजी से घटा है।
धान की रोपाई के बाद बढ़ेगी यूरिया की मांग
गन्ना फसल में अभी यूरिया की मांग बनी हुई है, जबकि अगले एक महीने में धान की रोपाई शुरू होने के साथ खाद की मांग और बढ़ने वाली है। किसानों को डर है कि यदि स्थिति नहीं सुधरी तो खरीफ सीजन में गंभीर संकट पैदा हो सकता है।
क्या कर रही केंद्र सरकार
केंद्र सरकार सब्सिडी वाले खादों की बिक्री के लिए नेशनल स्तर पर एक फ्रेमवर्क तैयार कर रही है। इसमें किसानों को मिलने वाली खाद की मात्रा और प्रक्रिया तय की जाएगी। हालांकि अभी तक इसका अंतिम फ्रेमवर्क जारी नहीं हुआ है, जिससे किसानों और खाद विक्रेताओं में अनिश्चितता बनी हुई है।




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