देश के सामने खाद का संकट! यूरिया से लेकर अमोनिया, सल्फर के बढ़े दाम, सप्लाई में भी गिरावट
Fertilizer Crisis: इंटरनेशनल मार्केट में खाद की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। यूरिया से सल्फर तक की कीमतों में इटरनेशनल मार्केट में उछाल देखने को मिल रही है। इसके अलावा डिमांड की तुलना में सप्लाई भी कम हो रही है।

Fertilizer Crisis: क्या आने वाले दिनों में देश के अंदर खाद का संकट आने वाला है। CRU Group की रिपोर्ट के अनुसार भारत के अमोनिया टेंडर ने ग्लोबल सप्लाई चेन की पोल खोल कर रख दी। कीमतों में बढ़ोतरी के बाद भी जितनी डिमांड की गई है। सप्लायर उसका आधा भी नहीं दे पा रहे हैं। जिसने नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
कहां कितनी है अमोनिया की डिमांड?
बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार सीआरयू ग्रुप ने बताया है कि इंडियन पोटाश लिमिटेड ने 521000 टन की अमोनिया का टेंडर डाला था। लेकिन 239000 टन ही अमोनिया के टेंशन को लेकर बोली आई। यानी डिमांड की तुलना में काफी बोलियां आई है। जोकि खतरे की घंटी के तौर पर देखा जा रहा है। बता दें, सप्लायर ने भारत के पश्चिमी तट के लिए 101000 टन अमोनिया देने की बात कही है। जब डिमांड यहां 151000 टन की है। वहीं, पूर्वी तट के लिए सप्लायर की तरफ से 138000 टन अमोनिया ऑफर किया गया है। जबकि 370000 टन अमोनिया की आवश्यकता है।
जिस तरह से रिस्पॉन्स आया उससे एक बात तो साफ है कि अब सिर्फ कीमत ही वजह नहीं रह गई है। उपलब्धता को लेकर भी प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
रुस-यूक्रेन और पश्चिम एशिया के युद्ध का असर
मौजूदा समय में दुनिया भर में चल रहे अलग-अलग युद्ध की वजह से सप्लाई चेन पर बुरा असर पड़ा है। जिसकी वजह से खाद की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है।
यूरिया के दाम में उछाल
युद्ध से पहले यूरिया का रेट 510 डॉलर प्रति टन हुआ करता था। जोकि अब 950 डॉलर प्रति टन के करीब पहुंच गया है। अमोनिया का दाम 500 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 900 डॉलर प्रति टन पहुंच गया है। वहीं, सल्फर की कीमतों भी इजाफा देखने को मिला है। मौजूदा समय में सल्फर का रेट 800 डॉलर प्रति टन था जोकि अब 500 डॉलर प्रति टन के स्तर पर पहुंच गया है।
अमोनिया क्यों है जरूरी?
खाद इंडस्ट्री के लिए अमोनिया काफी जरूरी है। यह नाइट्रोजन आधारित फर्टीलाइजर्स के उत्पादन के लिए काम आता है। इसके अलावा पोटाश के साथ ही अमोनिया का उपयोग किसान उत्पादन बढ़ाने के लिए करते हैं।
भारत खाद जरूरतों को पूरा करने के लिए इंपोर्ट पर निर्भर रहता है। ऐसे में अगर कोई भी दिक्कत बाहर आती है तब की स्थिति में खाद की कीमतों और सप्लाई पर सीधा असर पड़ेगा।
केंद्र सरकार की तरफ से खाद की खपत कम से कम करने के लिए कहा जा रहा है। केंद्र सरकार ने किसानों से नैनो यूरिया का प्रयोग अधिक करने की बात कही है।




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