युद्ध का असर: दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल के दाम में आग, कई देशों में 80% तक उछाल; भारत में अभी राहत क्यों?
Petrol Diesel Price: फिलीपींस में डीजल 81.6% और पेट्रोल 54.2% तक महंगा हो गया है। नाइजीरिया में भी डीजल 78.3% और पेट्रोल 58.2% बढ़ा है। म्यांमार, कंबोडिया और लाओस जैसे देशों में भी 70% तक की उछाल देखी गई है। अमेरिका में भी पेट्रोल 30.2% और डीजल 41.2% तक चढ़ चुका है।

ईरान में युद्ध शुरू होने से पहले 23 फरवरी 2026 तक ग्लोबल ऑयल मार्केट स्थिर था, लेकिन उसके बाद हालात तेजी से बदल गए। globalpetrolprices.com के ताजा आंकड़ों से साफ है कि दुनिया के कई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। खासकर एशिया और कुछ विकासशील देशों में कीमतों ने रिकॉर्ड स्तर छू लिया है, जबकि भारत समेत कई देशों में अभी तक दाम स्थिर बने हुए हैं।
दरअसल, जिन देशों में फ्यूल मार्केट पूरी तरह खुला है, वहां कीमतों में बदलाव तेजी से दिखा है। वहीं, जहां सरकारें कीमतों को नियंत्रित करती हैं, वहां असर धीरे-धीरे सामने आता है। आमतौर पर कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव का असर रिटेल फ्यूल प्राइस पर दिखने में 2-3 हफ्ते का समय लगता है।
फिलीपींस में डीजल 81.6% और पेट्रोल 54.2% तक हुआ महंगा
अगर सबसे ज्यादा बढ़ोतरी की बात करें तो फिलीपींस में डीजल 81.6% और पेट्रोल 54.2% तक महंगा हो गया है। नाइजीरिया में भी डीजल 78.3% और पेट्रोल 58.2% बढ़ा है। म्यांमार, कंबोडिया और लाओस जैसे देशों में भी 70% तक की उछाल देखी गई है। ऑस्ट्रेलिया में पेट्रोल 42% और डीजल 52.1% महंगा हुआ है, जबकि अमेरिका में भी पेट्रोल 30.2% और डीजल 41.2% तक चढ़ चुका है।
जर्मनी, फ्रांस, बेल्जियम और स्वीडन में भी बढ़े दाम
यूरोप भी इससे अछूता नहीं है। जर्मनी, फ्रांस, बेल्जियम और स्वीडन जैसे देशों में डीजल की कीमतों में 30% से 40% तक की तेजी आई है। वहीं, कनाडा में पेट्रोल 25.2% और डीजल 36.9% बढ़ा है। पाकिस्तान में पेट्रोल 24.4% और डीजल 21.8% महंगा हुआ है, जबकि श्रीलंका में भी दोनों ईंधनों में 30% से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
एशिया में सप्लाई शॉर्टेज का असर सबसे अधिक
एशिया में सप्लाई शॉर्टेज का असर सबसे ज्यादा दिख रहा है। यही वजह है कि वियतनाम, थाईलैंड और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में भी ईंधन के दाम तेजी से बढ़े हैं। खास बात यह है कि तेल उत्पादक देश होने के बावजूद नाइजीरिया में कीमतें इसलिए बढ़ीं, क्योंकि वहां की रिफाइनरियां अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर तेल खरीदती हैं।
भारत में कीमतें अभी तक क्यों नहीं बढ़ीं
अब सवाल यह है कि भारत में कीमतें अभी तक क्यों नहीं बढ़ीं? भारत जैसे देशों में सरकारें अक्सर फ्यूल प्राइस को नियंत्रित करती हैं और तुरंत बदलाव नहीं करतीं। वे पहले यह देखती हैं कि कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव स्थायी है या अस्थायी। अगर झटका बड़ा हो, तो सरकार टैक्स में कटौती या अन्य उपायों से कीमतों को नियंत्रित भी कर सकती है।
कुछ देशों में कीमतों में हल्की गिरावट
कई अफ्रीकी और एशियाई देशों जैसे अल्जीरिया, बांग्लादेश, सऊदी अरब और कुवैत में भी कीमतें अभी स्थिर हैं, क्योंकि वहां बाजार नियंत्रित है या सरकार सब्सिडी देती है। कुछ देशों में तो कीमतों में हल्की गिरावट भी दर्ज की गई है, जैसे फिजी, उरुग्वे और जाम्बिया।
कुल मिलाकर, वैश्विक ईंधन बाजार इस समय भारी दबाव में है। अगर ईरान से जुड़ा संकट लंबा खिंचता है, तो आने वाले हफ्तों में भारत में भी पेट्रोल-डीजल महंगा होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल राहत जरूर है, लेकिन यह कब तक टिकेगी, यह पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर करेगा।




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