Edible oil firms weigh fresh price hikes amid cost pressures, check all details बढ़ेगा आम लोगों की रसोई का बजट! महंगा होगा खाने वाला तेल, 5-6% तक बढ़ सकती हैं कीमतें, Business Hindi News - Hindustan
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बढ़ेगा आम लोगों की रसोई का बजट! महंगा होगा खाने वाला तेल, 5-6% तक बढ़ सकती हैं कीमतें

Edible Oil Price Hike: भारत में खाने के तेल (Edible Oil) की कीमतें एक बार फिर बढ़ सकती हैं, जिससे आम लोगों की रसोई का बजट प्रभावित होना तय है। देश की बड़ी कंपनियां जैसे अडानी विल्मर (Adani Wilmar) और इमामी 5-6% तक दाम बढ़ाने पर विचार कर रही हैं।

Thu, 30 April 2026 01:00 AMSarveshwar Pathak लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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बढ़ेगा आम लोगों की रसोई का बजट! महंगा होगा खाने वाला तेल, 5-6% तक बढ़ सकती हैं कीमतें

Edible Oil Price Hike: भारत में खाने के तेल (Edible Oil) की कीमतें एक बार फिर बढ़ सकती हैं, जिससे आम लोगों की रसोई का बजट प्रभावित होना तय है। देश की बड़ी कंपनियां जैसे अडानी विल्मर (Adani Wilmar) और इमामी 5-6% तक दाम बढ़ाने पर विचार कर रही हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की बढ़ती कीमतें और आयात लागत में तेजी है। आइए इसको जरा विस्तार से समझते हैं।

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दरअसल, भारत अपनी जरूरत का करीब 57% खाने का तेल आयात करता है। ऐसे में जब वैश्विक बाजार में पाम ऑयल, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ता है। पिछले एक साल में इन तेलों की लागत में 14% से 20% तक की बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा माल ढुलाई (freight), बीमा और रुपये की कमजोरी ने भी कीमतों को और बढ़ा दिया है।

इस स्थिति को और मुश्किल पश्चिम एशिया में चल रहा तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें बना रहा है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें हाल ही में 115 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। आम तौर पर कच्चे तेल की कीमत बढ़ने पर खाने के तेल के दाम भी बढ़ते हैं, क्योंकि दोनों के बाजार आपस में जुड़े होते हैं।

वर्तमान में देश में खाने के तेल की खुदरा कीमतें पहले से ही ऊंचे स्तर पर हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सोयाबीन तेल करीब 158 रुपये प्रति लीटर, सरसों तेल 189 रुपये और सूरजमुखी तेल 184 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चुका है। पिछले साल के मुकाबले इनमें 5% से 14% तक की बढ़ोतरी देखी गई है।

इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि अगर वैश्विक कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव ऐसे ही बने रहे, तो कंपनियों के पास दाम बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा। हालांकि, कुछ कंपनियां अभी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और जल्दबाजी में फैसला नहीं लेना चाहतीं।

खाने का तेल हर भारतीय घर की जरूरत है, इसलिए इसकी कीमत में छोटी-सी बढ़ोतरी भी लोगों के मासिक खर्च पर बड़ा असर डालती है। पहले भी सरकार ने आयात शुल्क में कटौती जैसे कदम उठाए हैं, लेकिन इस बार समस्या ज्यादा जटिल है, क्योंकि इसमें वैश्विक और घरेलू दोनों कारण शामिल हैं।

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आने वाले समय में खाने के तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है। ऐसे में आम लोगों को अपने बजट में बदलाव करना पड़ सकता है, जबकि सरकार और कंपनियां इस दबाव को कम करने के उपाय तलाश रही हैं।

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