सोने की खदान वाली चीन की कंपनियों का दबदबा, रिकॉर्ड मुनाफे की तैयारी
Gold Mining News: 2026 चीन की गोल्ड माइनिंग कंपनियों के लिए एक ऐतिहासिक साल बन सकता है। चीनी गोल्ड कंपनियां रिकॉर्ड मुनाफे की ओर बढ़ रही हैं। जानिए क्यों पीछे छूट रही हैं वैश्विक कंपनियां।

वैश्विक अनिश्चितता और ऊंचे सोने के दाम के बीच 2026 में चीन की गोल्ड माइनिंग कंपनियां दुनिया भर की कंपनियों को पीछे छोड़ने की तैयारी में हैं। मजबूत कीमतों, आक्रामक विस्तार रणनीति और विदेशी खदानों में निवेश के दम पर चीनी कंपनियां इस साल रिकॉर्ड मुनाफा दर्ज कर सकती हैं।
रिकॉर्ड कीमतों का मिला बड़ा फायदा
ब्लूमबर्ग की खबर के मुताबिक इस साल की शुरुआत में सोना $5,000 प्रति औंस के पार पहुंच गया था, जिसे जियो पॉलिटिकल टेंशन और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग का सपोर्ट मिला। हालांकि, हाल के हफ्तों में डॉलर की मजबूती, महंगे तेल और मिडिल ईस्ट तनाव के कारण सोने में करीब 10% गिरावट आई है, लेकिन बाजार में अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जोखिम से बचने की प्रवृत्ति और वैश्विक तनाव आगे भी सोने की कीमतों को सपोर्ट दे सकते हैं।चीन की कंपनियां क्यों आगे?
चीन की प्रमुख गोल्ड कंपनियां जैसे जिजिंग गोल्ड, शैंडांग गोल्ड माइनिंग और चीफेंग जिलांग उत्पादन बढ़ाने और नए प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम कर रही हैं। इन कंपनियों ने उत्पादन क्षमता बढ़ाई, विदेशों में खदानें खरीदीं और लंबी अवधि की ग्रोथ रणनीति अपनाईं। इसका असर यह हुआ कि जहां पश्चिमी कंपनियों का उत्पादन घट रहा है, वहीं चीनी कंपनियां तेजी से विस्तार कर रही हैं।
विदेशी खदानों पर बड़ा दांव
सबसे बड़ी डील में जिजिंग गोल्ड ने करीब 4 अरब डॉलर में कनाडा की अलॉयड गोल्ड कॉर्प का अधिग्रहण किया है, जिसके अफ्रीका में माइनिंग प्रोजेक्ट्स हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक चीनी कंपनियां उन खदानों को खरीद रही हैं, जहां पश्चिमी कंपनियां जोखिम के कारण नहीं जातीं। चीन की कूटनीतिक ताकत उन्हें लंबे समय तक टिके रहने में मदद करती है।
मुनाफे में जबरदस्त उछाल
जिजिंग का मुनाफा 2025 में तीन गुना से ज्यादा बढ़ा और शेंडांग गोल्ड का नेट प्रॉफिट 66% तक बढ़ा। जबकि, शीफेंग जिलांग का मुनाफा 81% तक उछला। 2026 में भी इन कंपनियों की कमाई में तेज वृद्धि की उम्मीद है। विश्लेषकों का मानना है कि नई परियोजनाएं और बढ़ता उत्पादन इन कंपनियों के मुनाफे को और मजबूत करेंगे।
दूसरी वैश्विक कंपनियां पीछे क्यों?
दूसरी ओर, अमेरिका और यूरोप की कंपनियां कई चुनौतियों से जूझ रही हैं। जैसें, उत्पादन में गिरावट, लागत में बढ़ोतरी, नए प्रोजेक्ट्स की कमी आदि। दुनिया की सबसे बड़ी गोल्ड कंपनी Newmont ने 2026 में कम उत्पादन का अनुमान दिया है। वहीं Fresnillo और अन्य कंपनियों पर बढ़ते खर्च का दबाव है।
खर्च और जोखिम भी बड़ी चुनौती
हालांकि, चीनी कंपनियों की रणनीति आक्रामक है, लेकिन इसमें जोखिम भी शामिल हैं। जैसे, राजनीतिक अस्थिरता, ऑपरेशन से जुड़े खतरे, विदेशी बाजारों में अनिश्चितता। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती लागत आगे चलकर मुनाफे पर दबाव डाल सकती है।
आगे क्या रहेगा ट्रेंड?
ब्लूमबर्ग के विश्लेषकों के अनुसार 2026 में चीनी गोल्ड कंपनियों का दबदबा बना रह सकता है। उत्पादन और अधिग्रहण से ग्रोथ जारी रहेगी, लेकिन लागत और वैश्विक जोखिम अहम फैक्टर रहेंगे। यानी जहां एक ओर वैश्विक कंपनियां चुनौतियों से जूझ रही हैं, वहीं चीनी कंपनियां आक्रामक रणनीति और मजबूत उत्पादन के दम पर बाजार में अपनी पकड़ मजबूत कर रही हैं।




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